बिलासपुर वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़ा: तत्कालीन अफसरों की भूमिका पर जांच की आंच; जानें विस्तार से
आरएलए शाखा बिलासपुर में वाहनों के अवैध पंजीकरण से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले की जड़ें करीब तीन साल पुराने उस घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जब गौरव के खिलाफ स्टेट ट्रांसपोर्ट विभाग को शिकायतें भेजी गईं। पढ़ें पूरी खबर...
विस्तार
पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) शाखा बिलासपुर में वाहनों के अवैध पंजीकरण से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में अब जांच की दिशा तत्कालीन प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अधिकारियों की भूमिका की ओर घूम गई है। प्रकरण में पूर्व में स्थानीय स्तर पर की गई जांच और अब सामने आ रहे तथ्यों के बीच विरोधाभास ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने वरिष्ठ सहायक सुभाष को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसकी शिनाख्त पर जिले में इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड माने जा रहे एक अन्य वरिष्ठ सहायक गौरव की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार गौरव गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा है। जानकारी के अनुसार इस फर्जीवाड़े की जड़ें करीब तीन साल पुराने उस घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जब गौरव के खिलाफ स्टेट ट्रांसपोर्ट विभाग को शिकायतें भेजी गईं। इन शिकायतों के आधार पर स्थानीय स्तर पर एक आंतरिक जांच भी बिठाई गई, लेकिन बताया जा रहा है कि उस समय संबंधित कार्यालय की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट कुछ अस्पष्ट थी। आरोपी को इसके बाद दूसरी ब्रांच में शिफ्ट कर दिया गया। यदि उस समय जांच रिपोर्ट में तथ्यों को ईमानदारी से प्रस्तुत किया गया होता, तो माना जा रहा है कि फर्जीवाड़े का दायरा इतना बड़ा नहीं बनता। अब इस बात की गहन समीक्षा की जा रही है कि कहीं उस दौर में जांच को प्रभावित कर मामले को सेटल तो नहीं किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरएलए शाखा के अंतर्गत किस अधिकारी के कार्यकाल में कितनी गाड़ियों का पंजीकरण किया गया, इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। डीसी की इस पहल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या तत्कालीन समय में नियमों को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन पंजीकरण किए गए और किन अधिकारियों के कार्यकाल में संदिग्ध गतिविधियां हुईं। इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू विभागीय पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग से जुड़ा है। संदेह जताया जा रहा है कि तकनीकी समझ कम रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के डिजिटल क्रेडेंशियल्स का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। अब यह भी जांच का विषय है कि संदिग्ध प्रविष्टियों के दौरान सिस्टम का वास्तविक एक्सेस किसके पास था और किसके लॉगिन से अवैध पंजीकरण किए गए।
प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल
यह मामला केवल कर्मचारियों की मिलीभगत तक सीमित नहीं है, बल्कि उस समय के प्रशासनिक नेतृत्व और पर्यवेक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। शिकायतों के बावजूद सुधारात्मक कदम न उठाना और संदिग्ध रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई को रोक देना एक बड़ी प्रशासनिक चूक मानी जा रही है।
प्रशासन ने अब उन सभी फाइलों को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्हें पूर्व में बिना गहन जांच के बंद कर दिया गया था। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए सरकार ने समिति गठित की है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सभी तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आ पाएंगे।