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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भूमि अधिग्रहण में अनियमितताएं होने पर समिति भड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:46 PM IST
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केंद्र के पक्ष में दर्ज कर तस्दीक किए गए इंतकालों में करूकान और विभाजन छोड़े जाने की पुष्टि
भू-अर्जन अधिकारी की रिपोर्टों पर फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क परियोजना के तहत हुए भूमि अधिग्रहण में केंद्र सरकार के पक्ष में दर्ज कर तस्दीक किए गए इंतकालों को लेकर गंभीर प्रशासनिक और राजस्वीय अनियमितताएं सामने आई हैं, उनपर समिति ने रोष जताया है। जांच में यह पुष्टि हुई है कि कई मामलों में विधिवत विभाजित होने वाले करूकान बिना विभाजित किए ही भूमि के इंतकाल दर्ज कर तस्दीक कर दिए गए, जो हिमाचल प्रदेश के राजस्व नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इन अनियमितताओं को लेकर फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यह मामला एसडीएम झंडूता के निर्देशों पर तहसीलदार झंडूता की ओर से करवाई गई छानबीन के दौरान सामने आया। इसके तहत पटवारी हल्का समलेटा से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने 12 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री भारत सरकार और राज्य सरकार को पत्र भेजकर भूमि अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। यह शिकायत राज्य सरकार के माध्यम से एसडीएम झंडूता तक पहुंची, जिसके बाद मामले को जांच के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों को सौंपा गया।। पटवारी हल्का समलेटा की रिपोर्ट में सामने आया कि फोरलेन परियोजना के तहत केंद्र सरकार के पक्ष में दर्ज कर तस्दीक किए गए कई इंतकालों में मुसाबी में दर्ज करूकान इंतकालों के साथ संलग्न नक्शा में दर्ज ही नहीं किए गए। विभाजित होने वाले करुकान का विधिवत विभाजन दर्शाए बिना ही कार्रवाई की गई। इसकी पुष्टि तहसीलदार झंडूता ने की, जिसके बाद रिपोर्ट एसडीएम झंडूता के माध्यम से अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर को भेजी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसी बिलासपुर ने भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद भू-अर्जन अधिकारी ने एसडीएम झंडूता को रिकॉर्ड में दुरुस्ती को लेकर पत्र लिखा, लेकिन इसी स्तर पर प्रशासनिक विरोधाभास सामने आए।
फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने एसडीएम झंडूता को पत्र लिखकर इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। समिति का कहना है कि जब प्रशासनिक जांच में स्वयं अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, तो उनकी दुरुस्ती उसी इकाई की जिम्मेदारी बनती है, जिसने नियमों के खिलाफ इंतकाल दर्ज कर तस्दीक किए हैं। समिति ने मौजा बागठेहड़ु का हवाला देते हुए बताया कि वहां इंतकाल नंबर 336 और 337 में पहले ही नियमानुसार दुरुस्त किए जा चुके हैं। समिति ने तत्कालीन एसडीएम घुमारवीं के पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि फोरलेन परियोजना से जुड़े मामलों में तहसीलदार एनएचएआई बिलासपुर सक्षम न्यायालय से अनुमति लेकर ही आगे की कार्रवाई करें। समिति का कहना है कि भू-अर्जन अधिकारी एक ही विषय पर बार-बार अलग-अलग और विरोधाभासी रिपोर्टें पेश कर रहे हैं, जिससे प्रभावित भूमि मालिकों को न्याय मिलने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। समिति ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया है कि मौज धराड़सानी के छत धराड़सानी, कल्लर और बेहलग में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना ही 4 इंतकालों में दुरुस्ती कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है। फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी त्रुटिपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड को न्यायालय के माध्यम से पारदर्शी, नियमों के अनुसार और समयबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो और प्रभावित परिवारों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
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भू-अर्जन अधिकारी की रिपोर्टों पर फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क परियोजना के तहत हुए भूमि अधिग्रहण में केंद्र सरकार के पक्ष में दर्ज कर तस्दीक किए गए इंतकालों को लेकर गंभीर प्रशासनिक और राजस्वीय अनियमितताएं सामने आई हैं, उनपर समिति ने रोष जताया है। जांच में यह पुष्टि हुई है कि कई मामलों में विधिवत विभाजित होने वाले करूकान बिना विभाजित किए ही भूमि के इंतकाल दर्ज कर तस्दीक कर दिए गए, जो हिमाचल प्रदेश के राजस्व नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इन अनियमितताओं को लेकर फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यह मामला एसडीएम झंडूता के निर्देशों पर तहसीलदार झंडूता की ओर से करवाई गई छानबीन के दौरान सामने आया। इसके तहत पटवारी हल्का समलेटा से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने 12 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री भारत सरकार और राज्य सरकार को पत्र भेजकर भूमि अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी। यह शिकायत राज्य सरकार के माध्यम से एसडीएम झंडूता तक पहुंची, जिसके बाद मामले को जांच के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों को सौंपा गया।। पटवारी हल्का समलेटा की रिपोर्ट में सामने आया कि फोरलेन परियोजना के तहत केंद्र सरकार के पक्ष में दर्ज कर तस्दीक किए गए कई इंतकालों में मुसाबी में दर्ज करूकान इंतकालों के साथ संलग्न नक्शा में दर्ज ही नहीं किए गए। विभाजित होने वाले करुकान का विधिवत विभाजन दर्शाए बिना ही कार्रवाई की गई। इसकी पुष्टि तहसीलदार झंडूता ने की, जिसके बाद रिपोर्ट एसडीएम झंडूता के माध्यम से अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर को भेजी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसी बिलासपुर ने भू-अर्जन अधिकारी बिलासपुर को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद भू-अर्जन अधिकारी ने एसडीएम झंडूता को रिकॉर्ड में दुरुस्ती को लेकर पत्र लिखा, लेकिन इसी स्तर पर प्रशासनिक विरोधाभास सामने आए।
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फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने एसडीएम झंडूता को पत्र लिखकर इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। समिति का कहना है कि जब प्रशासनिक जांच में स्वयं अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, तो उनकी दुरुस्ती उसी इकाई की जिम्मेदारी बनती है, जिसने नियमों के खिलाफ इंतकाल दर्ज कर तस्दीक किए हैं। समिति ने मौजा बागठेहड़ु का हवाला देते हुए बताया कि वहां इंतकाल नंबर 336 और 337 में पहले ही नियमानुसार दुरुस्त किए जा चुके हैं। समिति ने तत्कालीन एसडीएम घुमारवीं के पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि फोरलेन परियोजना से जुड़े मामलों में तहसीलदार एनएचएआई बिलासपुर सक्षम न्यायालय से अनुमति लेकर ही आगे की कार्रवाई करें। समिति का कहना है कि भू-अर्जन अधिकारी एक ही विषय पर बार-बार अलग-अलग और विरोधाभासी रिपोर्टें पेश कर रहे हैं, जिससे प्रभावित भूमि मालिकों को न्याय मिलने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। समिति ने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया है कि मौज धराड़सानी के छत धराड़सानी, कल्लर और बेहलग में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना ही 4 इंतकालों में दुरुस्ती कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है। फोरलेन विस्थापित व प्रभावित समिति ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी त्रुटिपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड को न्यायालय के माध्यम से पारदर्शी, नियमों के अनुसार और समयबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो और प्रभावित परिवारों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।