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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापितों ने रैली निकालकर बुलंद की हक की आवाज
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उपायुक्त कार्यालय के बाहर रैली के बाद धरने पर बैठे भाखड़ा विस्थापित समिति के सदस्य। स्रोत: समित
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विस्थापितों की लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारी, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाखड़ा विस्थापितों एवं प्रभावितों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने सोमवार को बिलासपुर शहर में रैली निकाली। समिति के पदाधिकारी और सदस्य लक्ष्मी नारायण मंदिर से रैली के रूप में शहर के बीचोबीच होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। इस दौरान विस्थापितों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ रोष जताया। रैली की अगुवाई समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने की। रैली के उपायुक्त कार्यालय पहुंचने के बाद समिति की ओर से उपायुक्त राहुल कुमार के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में भाखड़ा विस्थापितों और प्रभावित परिवारों की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई गई। समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध देश के विकास, सिंचाई, पेयजल और विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन इस राष्ट्रीय परियोजना के लिए बिलासपुर के हजारों परिवारों ने अपना घर, जमीन, आजीविका और सामाजिक विरासत गंवाई है। इसके बावजूद दशकों बीत जाने के बाद भी विस्थापितों की अनेक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि विस्थापित बहुल क्षेत्रों में बंदोबस्त करवाकर कब्जे वाली भूमि का मालिकाना हक दिया जाए। जिन परिवारों को अभी तक प्लॉट और भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें शीघ्र भूमि उपलब्ध करवाई जाए। बिजली और पानी के काटे गए कनेक्शन बहाल करने के साथ विस्थापित परिवारों को बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई।
समिति ने गोबिंद सागर झील से पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने, विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी तथा अन्य सरकारी सेवाओं में उचित प्राथमिकता देने और भाखड़ा परियोजना से उत्पादित विद्युत की रॉयल्टी का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च करने की मांग की। इसके अलावा गोबिंद सागर झील क्षेत्र में आवागमन बेहतर बनाने के लिए बैरी-दड़ोला से लूहणु पुल सहित विभिन्न प्रस्तावित पुलों का निर्माण शीघ्र करवाने, मछुआरों और दौलों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी योजनाएं लागू करने तथा झील क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की गई। समिति ने वन भूमि पर बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों को उनके आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अधिकार-पट्टे प्रदान करने की मांग भी उठाई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि विस्थापित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को अब इन समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाखड़ा विस्थापितों एवं प्रभावितों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने सोमवार को बिलासपुर शहर में रैली निकाली। समिति के पदाधिकारी और सदस्य लक्ष्मी नारायण मंदिर से रैली के रूप में शहर के बीचोबीच होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। इस दौरान विस्थापितों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ रोष जताया। रैली की अगुवाई समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने की। रैली के उपायुक्त कार्यालय पहुंचने के बाद समिति की ओर से उपायुक्त राहुल कुमार के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में भाखड़ा विस्थापितों और प्रभावित परिवारों की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई गई। समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध देश के विकास, सिंचाई, पेयजल और विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन इस राष्ट्रीय परियोजना के लिए बिलासपुर के हजारों परिवारों ने अपना घर, जमीन, आजीविका और सामाजिक विरासत गंवाई है। इसके बावजूद दशकों बीत जाने के बाद भी विस्थापितों की अनेक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि विस्थापित बहुल क्षेत्रों में बंदोबस्त करवाकर कब्जे वाली भूमि का मालिकाना हक दिया जाए। जिन परिवारों को अभी तक प्लॉट और भूमि आवंटित नहीं हुई है, उन्हें शीघ्र भूमि उपलब्ध करवाई जाए। बिजली और पानी के काटे गए कनेक्शन बहाल करने के साथ विस्थापित परिवारों को बिजली और पेयजल की सुविधा निशुल्क उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई।
समिति ने गोबिंद सागर झील से पीने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने, विस्थापित परिवारों के बच्चों को बीबीएमबी तथा अन्य सरकारी सेवाओं में उचित प्राथमिकता देने और भाखड़ा परियोजना से उत्पादित विद्युत की रॉयल्टी का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापित क्षेत्रों के विकास पर खर्च करने की मांग की। इसके अलावा गोबिंद सागर झील क्षेत्र में आवागमन बेहतर बनाने के लिए बैरी-दड़ोला से लूहणु पुल सहित विभिन्न प्रस्तावित पुलों का निर्माण शीघ्र करवाने, मछुआरों और दौलों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी योजनाएं लागू करने तथा झील क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की गई। समिति ने वन भूमि पर बसे भाखड़ा विस्थापित परिवारों को उनके आवास, कृषि भूमि और पशुशालाओं के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अधिकार-पट्टे प्रदान करने की मांग भी उठाई। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि विस्थापित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को अब इन समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।
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