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Bilaspur News: सड़क हादसे में मौत के आठ साल बाद परिवार को मिला 19.91 लाख मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 14 May 2026 11:45 PM IST
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घुमारवीं एमएसीटी ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित भुगतान के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ऊना से शादी समारोह से लौटते समय हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रिटायर्ड डाक विभाग कर्मचारी के परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक के परिजनों को 19 लाख 91 हजार 800 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। साथ ही याचिका दायर होने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है। यह फैसला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल घुमारवीं के पीठासीन अधिकारी ने सुनाया।
मामला वर्ष 2018 में हुए सड़क हादसे से जुड़ा था। अदालत में दायर याचिका के अनुसार 12 मई 2018 को सोहन सिंह ऊना में एक शादी समारोह में शामिल होकर कार में वापस घुमारवीं लौट रहे थे। जब वाहन बरी कलां के पास पहुंचा तो चालक की ओर से कथित रूप से तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण कार अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में सोहन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुमारवीं ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद भराड़ी थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद चालक के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया। मृतक की पत्नी और बच्चों ने अदालत में दावा याचिका दायर कर कहा था कि सोहन सिंह डाक विभाग से सेवानिवृत्त थे और पेंशन सहित उनकी मासिक आय करीब 50 हजार रुपये थी। परिवार पूरी तरह उन पर निर्भर था और उनकी मौत के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
वाहन चालक और मालिक की ओर से अदालत में कहा गया कि हादसा सड़क पर अचानक आए आवारा पशु के कारण हुआ था और चालक की कोई लापरवाही नहीं थी। वहीं बीमा कंपनी ने भी दावा खारिज करने की मांग की। सुनवाई के दौरान अदालत ने एफआईआर, पुलिस चालान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पेंशन दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक की पारिवारिक पेंशन को मुआवजे की गणना से अलग नहीं किया जा सकता।
ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक पेंशन 27,600 रुपये मानते हुए आश्रितों की निर्भरता, अंतिम संस्कार खर्च और पारिवारिक कंसोर्टियम को जोड़कर कुल 19,91,800 रुपये मुआवजा तय किया। आदेश के अनुसार कुल मुआवजा राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पत्नी राधा देवी को, शेष राशि बच्चों को बराबर बांटी जाएगी। अदालत ने वाहन मालिक और चालक को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पूरी राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
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बिलासपुर। ऊना से शादी समारोह से लौटते समय हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रिटायर्ड डाक विभाग कर्मचारी के परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक के परिजनों को 19 लाख 91 हजार 800 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। साथ ही याचिका दायर होने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है। यह फैसला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल घुमारवीं के पीठासीन अधिकारी ने सुनाया।
मामला वर्ष 2018 में हुए सड़क हादसे से जुड़ा था। अदालत में दायर याचिका के अनुसार 12 मई 2018 को सोहन सिंह ऊना में एक शादी समारोह में शामिल होकर कार में वापस घुमारवीं लौट रहे थे। जब वाहन बरी कलां के पास पहुंचा तो चालक की ओर से कथित रूप से तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण कार अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में सोहन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुमारवीं ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद भराड़ी थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद चालक के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया। मृतक की पत्नी और बच्चों ने अदालत में दावा याचिका दायर कर कहा था कि सोहन सिंह डाक विभाग से सेवानिवृत्त थे और पेंशन सहित उनकी मासिक आय करीब 50 हजार रुपये थी। परिवार पूरी तरह उन पर निर्भर था और उनकी मौत के बाद आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
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वाहन चालक और मालिक की ओर से अदालत में कहा गया कि हादसा सड़क पर अचानक आए आवारा पशु के कारण हुआ था और चालक की कोई लापरवाही नहीं थी। वहीं बीमा कंपनी ने भी दावा खारिज करने की मांग की। सुनवाई के दौरान अदालत ने एफआईआर, पुलिस चालान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पेंशन दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। ट्रिब्यूनल ने माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक की पारिवारिक पेंशन को मुआवजे की गणना से अलग नहीं किया जा सकता।
ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक पेंशन 27,600 रुपये मानते हुए आश्रितों की निर्भरता, अंतिम संस्कार खर्च और पारिवारिक कंसोर्टियम को जोड़कर कुल 19,91,800 रुपये मुआवजा तय किया। आदेश के अनुसार कुल मुआवजा राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पत्नी राधा देवी को, शेष राशि बच्चों को बराबर बांटी जाएगी। अदालत ने वाहन मालिक और चालक को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को पूरी राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।