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Bilaspur News: खड़े ट्रक से एचआरटीसी बस टकराने पर घायल यात्री को 90 हजार रुपये मुआवजा

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 14 May 2026 11:40 PM IST
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HRTC bus collides with a parked truck, injuring passenger gets Rs 90,000 compensation
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अदालत से
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घुमारवीं मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का फैसला, निगम को 30 दिन में जमा करनी होगी राशि

पंडोगा बैरियर के पास 2018 में हुआ था हादसा, बस चालक की लापरवाही मानी गई

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ऊना के पंडोगा बैरियर के पास वर्ष 2018 में हुए सड़क हादसे में घायल यात्री को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने 90,426 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने को कहा है। साथ ही एचआरटीसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह 30 दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करे।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार भागीरथ 8 अप्रैल 2018 को एचआरटीसी की बस में होशियारपुर से लदरौर की ओर सफर कर रहे थे। सुबह करीब 10 बजे जब बस ऊना जिले के पंडोगा बैरियर के पास पहुंची तो चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए सड़क किनारे खड़े ट्रक को टक्कर मार दी। हादसे में बस में सवार कई यात्री घायल हुए, जिनमें भगीरथ भी शामिल था। घायल को तुरंत क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। याचिका में बताया गया कि हादसे के बाद वह करीब एक माह तक बिस्तर पर रहा और उसे इलाज पर भारी खर्च करना पड़ा। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह दिल्ली की एक निजी संस्था में कार्यरत था और करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता था। दुर्घटना के कारण उसकी नौकरी चली गई और उसे भविष्य में भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर उसने पांच लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। मामले में एचआरटीसी प्रबंधन और बस चालक ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि हादसा ट्रक चालक की गलती से हुआ था। उनका कहना था कि ट्रक चालक ने अचानक सड़क के बीच वाहन रोक दिया था, जिसके कारण दुर्घटना हुई। हालांकि अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड, प्राथमिकी, घटनास्थल के नक्शे और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि दुर्घटना बस चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुई। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस जांच में बस चालक के खिलाफ ही मामला दर्ज कर चालान अदालत में पेश किया गया था। ट्रिब्यूनल ने उपचार से संबंधित बिलों और दस्तावेजों के आधार पर घायल को 35,426 रुपये चिकित्सा खर्च के रूप में मंजूर किए। इसके अलावा दर्द एवं मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये तथा विशेष आहार के लिए 5 हजार रुपये अलग से दिए गए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एचआरटीसी की बसें बीमा की अनिवार्यता से मुक्त हैं, इसलिए निगम और चालक संयुक्त रूप से मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार होंगे, जबकि पूरी राशि निगम द्वारा जमा की जाएगी।
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