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Bilaspur News: दिन भर चला बैठकों, भर्ती का दौर, देर शाम हड़ताल वासप
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:57 PM IST
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क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में अस्थायी चालक भर्ती के लिए पहुंचे उम्मीदवार। संवाद
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संशोधित
एस्मा लगाने के निर्णय के बाद से ही हड़ताल से पीछे हट रहे थे कई कर्मचारी
हड़ताल से निपटने के लिए 25 चालक भर्ती, 25 परिचालकों व होमगार्ड की थी व्यवस्था
हड़ताल की स्थिति में 80 रूटों पर बसें चलाने की थी योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल आखिरकार शुरू होने से पहले ही कॉल ऑफ हो गई। देर शाम प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया पेज के माध्यम से हड़ताल वापस लिए जाने की जानकारी दी। इसके साथ ही प्रदेश भर में बस सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा टल गया और यात्रियों ने राहत की सांस ली।
हड़ताल की आशंका को देखते हुए जिले में पूरा दिन हड़ताल से निपटने के लिए प्रशासन की बैठकों का दौर जारी रहा, वहीं एचआरटीसी प्रबंधन ने पूरे दिन वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की थीं। बिलासपुर में बस सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए निगम ने दिहाड़ी आधार पर 25 चालकों की भर्ती की। इसके अलावा सात अन्य चालकों तथा 25 परिचालकों की व्यवस्था भी की गई थी। परिचालकों की कमी को पूरा करने के लिए होमगार्ड जवानों को भी तैयार रखा गया था। निगम के अनुसार बिलासपुर जिले में कुल 182 रूट संचालित होते हैं, जिन पर सामान्य दिनों में 113 बसें चलती हैं। इनमें अधिकांश रूट ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हैं। हड़ताल की स्थिति में निगम ने केवल 80 रूटों पर नियमित बस सेवाएं जारी रखने की योजना बनाई थी। इसके लिए उपलब्ध चालकों, परिचालकों और बसों का पुनर्गठन किया गया था, ताकि जरूरी और अधिक यात्री संख्या वाले मार्गों पर परिवहन व्यवस्था बनी रहे। वहीं बाहरी जिलों और राज्यों के करीब 20 रूटों को अस्थायी रूप से बंद करने की तैयारी भी कर ली गई थी। इनमें चंडीगढ़ के लिए नौ रूट, दिल्ली के लिए चार, हरिद्वार के लिए दो, अमृतसर के लिए दो, लुधियाना के लिए एक, कटड़ा के लिए एक, चंबा के लिए एक रूट शामिल थे। बंदला रूट के लिए भी अलग रणनीति तैयार की गई थी। निगम ने निर्णय लिया था कि दिहाड़ी आधार पर भर्ती किए गए चालकों को इस रूट पर नहीं भेजा जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के माध्यम से निजी बस चालकों का सहयोग लेने की योजना बनाई गई थी, ताकि क्षेत्र के लोगों को कम से कम परेशानी हो।
जिले के अधिकांश रूट ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, इसलिए हड़ताल की स्थिति में सबसे ज्यादा असर गांवों के लोगों पर पड़ने की आशंका थी। विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। इसी को देखते हुए निगम ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति तैयार की थी। क्षेत्रीय प्रबंधक बिलासपुर विवेक लखनपाल ने बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। उन्होंने कहा कि हड़ताल की स्थिति में भी अधिक से अधिक रूटों पर बस संचालन जारी रखने का प्रयास किया जाना था। लखनपाल ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर चयनित हुए दिहाड़ी चालकों को भर्ती वाले दिन का मानदेय दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद कई चालक और परिचालक हड़ताल में शामिल होने से पीछे हट गए थे। वहीं सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति के बाद देर शाम हड़ताल कॉल ऑफ करने का निर्णय लिया गया। हड़ताल वापस होने से अब जिले में एचआरटीसी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होंगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें हड़ताल की स्थिति में सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती थी।
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हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने चालक परिचालक यूनियन की प्रस्तावित हड़ताल से निपटने की तैयारी की है। निगम प्रबंधन ने वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था लागू करनी शुरू कर दी है ताकि बस सेवाएं प्रभावित न हों। इसके तहत 25 दिहाड़ी चालकों, सात अतिरिक्त चालकों और 25 परिचालकों को सेवाओं में शामिल किया गया है।
निगम का दावा है कि जिले के करीब 80 महत्वपूर्ण रूटों पर बस संचालन जारी रखने का प्रयास होगा। बिलासपुर में कुल 182 रूट हैं, जिन पर सामान्य तौर पर 113 बसें चलती हैं।
एस्मा लगाने के निर्णय के बाद से ही हड़ताल से पीछे हट रहे थे कई कर्मचारी
हड़ताल से निपटने के लिए 25 चालक भर्ती, 25 परिचालकों व होमगार्ड की थी व्यवस्था
हड़ताल की स्थिति में 80 रूटों पर बसें चलाने की थी योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल आखिरकार शुरू होने से पहले ही कॉल ऑफ हो गई। देर शाम प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया पेज के माध्यम से हड़ताल वापस लिए जाने की जानकारी दी। इसके साथ ही प्रदेश भर में बस सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा टल गया और यात्रियों ने राहत की सांस ली।
हड़ताल की आशंका को देखते हुए जिले में पूरा दिन हड़ताल से निपटने के लिए प्रशासन की बैठकों का दौर जारी रहा, वहीं एचआरटीसी प्रबंधन ने पूरे दिन वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की थीं। बिलासपुर में बस सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए निगम ने दिहाड़ी आधार पर 25 चालकों की भर्ती की। इसके अलावा सात अन्य चालकों तथा 25 परिचालकों की व्यवस्था भी की गई थी। परिचालकों की कमी को पूरा करने के लिए होमगार्ड जवानों को भी तैयार रखा गया था। निगम के अनुसार बिलासपुर जिले में कुल 182 रूट संचालित होते हैं, जिन पर सामान्य दिनों में 113 बसें चलती हैं। इनमें अधिकांश रूट ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हैं। हड़ताल की स्थिति में निगम ने केवल 80 रूटों पर नियमित बस सेवाएं जारी रखने की योजना बनाई थी। इसके लिए उपलब्ध चालकों, परिचालकों और बसों का पुनर्गठन किया गया था, ताकि जरूरी और अधिक यात्री संख्या वाले मार्गों पर परिवहन व्यवस्था बनी रहे। वहीं बाहरी जिलों और राज्यों के करीब 20 रूटों को अस्थायी रूप से बंद करने की तैयारी भी कर ली गई थी। इनमें चंडीगढ़ के लिए नौ रूट, दिल्ली के लिए चार, हरिद्वार के लिए दो, अमृतसर के लिए दो, लुधियाना के लिए एक, कटड़ा के लिए एक, चंबा के लिए एक रूट शामिल थे। बंदला रूट के लिए भी अलग रणनीति तैयार की गई थी। निगम ने निर्णय लिया था कि दिहाड़ी आधार पर भर्ती किए गए चालकों को इस रूट पर नहीं भेजा जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के माध्यम से निजी बस चालकों का सहयोग लेने की योजना बनाई गई थी, ताकि क्षेत्र के लोगों को कम से कम परेशानी हो।
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जिले के अधिकांश रूट ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, इसलिए हड़ताल की स्थिति में सबसे ज्यादा असर गांवों के लोगों पर पड़ने की आशंका थी। विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। इसी को देखते हुए निगम ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने की रणनीति तैयार की थी। क्षेत्रीय प्रबंधक बिलासपुर विवेक लखनपाल ने बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। उन्होंने कहा कि हड़ताल की स्थिति में भी अधिक से अधिक रूटों पर बस संचालन जारी रखने का प्रयास किया जाना था। लखनपाल ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर चयनित हुए दिहाड़ी चालकों को भर्ती वाले दिन का मानदेय दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम लागू होने के बाद कई चालक और परिचालक हड़ताल में शामिल होने से पीछे हट गए थे। वहीं सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति के बाद देर शाम हड़ताल कॉल ऑफ करने का निर्णय लिया गया। हड़ताल वापस होने से अब जिले में एचआरटीसी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होंगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें हड़ताल की स्थिति में सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती थी।
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने चालक परिचालक यूनियन की प्रस्तावित हड़ताल से निपटने की तैयारी की है। निगम प्रबंधन ने वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था लागू करनी शुरू कर दी है ताकि बस सेवाएं प्रभावित न हों। इसके तहत 25 दिहाड़ी चालकों, सात अतिरिक्त चालकों और 25 परिचालकों को सेवाओं में शामिल किया गया है।
निगम का दावा है कि जिले के करीब 80 महत्वपूर्ण रूटों पर बस संचालन जारी रखने का प्रयास होगा। बिलासपुर में कुल 182 रूट हैं, जिन पर सामान्य तौर पर 113 बसें चलती हैं।