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Bilaspur News: शोभा यात्रा, बैल पूजन, खूंटा गाड़कर राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले का आगाज
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नलवाड़ी मेले के शुभारंभ पर लुहणू मैदान में खूंटा गाड़ते मंत्री राजेश धर्माणी व उपायुक्त। स्रोत:
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मंत्री राजेश धर्माणी ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में की पूजा-अर्चना, लोगों को मेले की दीं शुभकामनाएं
मेले का 23 मार्च को होगा समापन, लोगों को मनोरंजन करेंगे कलाकार
-1889 में हुई थी सांडू मैदान से हुई थी शुरुआत
-समय के साथ मेले के स्वरूप में आया परिवर्तन: राजेश धर्माणी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले का मंगलवार को पारंपरिक ढंग से शुभारंभ हुआ। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। मेला 23 मार्च तक चलेगा, जिसमें विभिन्न गतिविधियां होंगी। मंत्री राजेश धर्माणी ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की और लोगों को मेले की शुभकामनाएं दीं।
लक्ष्मी नारायण मंदिर से लुहणू मैदान तक शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों, पारंपरिक परिधानों और झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद लुहणू मैदान में खूंटा गाड़कर बैल पूजन किया गया, जिसके बाद मेला शुरू हुआ। जनसमूह को संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि नलवाड़ी मेला बिलासपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसकी पहचान प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में रही है। उन्होंने कहा कि इस मेले का इतिहास लगभग 137 वर्ष पुराना है तथा वर्ष 1889 में इसकी शुरुआत सांडू मैदान से हुई थी, जो समय के साथ अब लुहणू मैदान में स्थानांतरित हो गया है। यह मेला वर्षों से स्थानीय संस्कृति, लोक परम्पराओं, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। कहा कि समय के साथ मेले के स्वरूप में परिवर्तन आया है। पूर्व में जहां ग्रामीण अपने उत्पादों की बिक्री और पशुधन की खरीद-फरोख्त के लिए इसमें भाग लेते थे, वहीं वर्तमान में यह मेला सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि परंपरागत हुनर को प्रोत्साहित एवं जीवंत बनाए रखने के लिए घुमारवीं में कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक शिल्पकारों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़कर युवाओं को पुरातन कलाओं से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले की प्रतिभाशाली युवतियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के लिए मिस बिलासपुर 2026 प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। 18 मार्च से शुरू होने वाले कहलूर उत्सव में स्थानीय कलाकार नाटी, लोक नृत्य, वाद्य यंत्रों और लोक गीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी।
मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए मेले की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। कहलूर उत्सव हमारी परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। इस अवसर पर पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, कांग्रेस नेता विवेक कुमार, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर, पुलिस अधीक्षक संदीप धवल, निदेशक हिमूडा जितेंद्र चंदेल, पूर्व जिला पार्षद गौरव शर्मा, प्रोमिला वसु, राजेंद्र पाल, बसंत राम, श्याम शर्मा, ज्योति, अनिल मिंटू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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मेले का 23 मार्च को होगा समापन, लोगों को मनोरंजन करेंगे कलाकार
-1889 में हुई थी सांडू मैदान से हुई थी शुरुआत
-समय के साथ मेले के स्वरूप में आया परिवर्तन: राजेश धर्माणी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले का मंगलवार को पारंपरिक ढंग से शुभारंभ हुआ। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। मेला 23 मार्च तक चलेगा, जिसमें विभिन्न गतिविधियां होंगी। मंत्री राजेश धर्माणी ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की और लोगों को मेले की शुभकामनाएं दीं।
लक्ष्मी नारायण मंदिर से लुहणू मैदान तक शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों, पारंपरिक परिधानों और झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद लुहणू मैदान में खूंटा गाड़कर बैल पूजन किया गया, जिसके बाद मेला शुरू हुआ। जनसमूह को संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि नलवाड़ी मेला बिलासपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसकी पहचान प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में रही है। उन्होंने कहा कि इस मेले का इतिहास लगभग 137 वर्ष पुराना है तथा वर्ष 1889 में इसकी शुरुआत सांडू मैदान से हुई थी, जो समय के साथ अब लुहणू मैदान में स्थानांतरित हो गया है। यह मेला वर्षों से स्थानीय संस्कृति, लोक परम्पराओं, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। कहा कि समय के साथ मेले के स्वरूप में परिवर्तन आया है। पूर्व में जहां ग्रामीण अपने उत्पादों की बिक्री और पशुधन की खरीद-फरोख्त के लिए इसमें भाग लेते थे, वहीं वर्तमान में यह मेला सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि परंपरागत हुनर को प्रोत्साहित एवं जीवंत बनाए रखने के लिए घुमारवीं में कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक शिल्पकारों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़कर युवाओं को पुरातन कलाओं से जोड़ा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जिले की प्रतिभाशाली युवतियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के लिए मिस बिलासपुर 2026 प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। 18 मार्च से शुरू होने वाले कहलूर उत्सव में स्थानीय कलाकार नाटी, लोक नृत्य, वाद्य यंत्रों और लोक गीतों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे, जिससे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी।
मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए मेले की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। कहलूर उत्सव हमारी परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। इस अवसर पर पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, कांग्रेस नेता विवेक कुमार, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर, पुलिस अधीक्षक संदीप धवल, निदेशक हिमूडा जितेंद्र चंदेल, पूर्व जिला पार्षद गौरव शर्मा, प्रोमिला वसु, राजेंद्र पाल, बसंत राम, श्याम शर्मा, ज्योति, अनिल मिंटू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।