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Bilaspur News: मलोखर-कोलथी सड़क 25 साल से अधूरी, श्रद्धालु-ग्रामीण हो रहे परेशान
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राजस्व विवाद में फंसा निर्माण, 600-700 मीटर कच्चा मार्ग बना परेशानी का कारण
कई हादसों के बावजूद नहीं जागा प्रशासन, 2024 से राजस्व विभाग में निशानदेही लंबित होने से अटका है काम
सिद्ध बाबा बालक नाथ कठपौलधार तक पहुंचना जोखिमभरा
संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर (बिलासपुर)। मलोखर से कोलथी तक बनने वाली सड़क पिछले लगभग 25 वर्ष से अधूरी है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि सिद्ध बाबा बालक नाथ कठपौलधार के श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जब भी सड़क की स्थिति के बारे में प्रशासन और संबंधित विभाग से पूछताछ की जाती है, तो बताया जाता है कि भूमि विवाद के कारण कार्य रुका हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क का निर्माण आरंभ किया था, जिसमें लगभग दो किलोमीटर तक टारिंग का कार्य पूरा कर दिया गया है। लेकिन शेष लगभग 600-700 मीटर सड़क आज भी कच्ची है और उस पर तारकोल नहीं बिछाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण उन्हें प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं, राशन और अन्य सामान घर तक पहुंचाना कठिन हो गया है। साथ ही छोटे बच्चों को भी रोजाना उतनी ही दूरी पैदल तय करके स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में वृद्ध या बीमार व्यक्ति को चिकित्सीय सहायता के लिए पालकी में उठाकर कच्चे रास्ते से नीचे लाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो जाता है और जान का जोखिम भी बढ़ जाता है। यह मार्ग केवल गांव वालों के लिए नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। कठपौलधार मंदिर तक पहुंचने वाला शॉर्टकट रास्ता बंडोरा और जुब्बड़ से होकर कोलथी तक जाता है। इस मार्ग से दो प्राइमरी और माध्यमिक स्कूल भी जुड़े हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से अपील की है कि भूमि विवाद का शीघ्र समाधान कर शेष 600-700 मीटर सड़क पर तारकोल बिछाने का कार्य पूरा किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पर्यटन विभाग भी इस मार्ग को सुरक्षित बनाने में असफल रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाले पगडंडी मार्ग पर लाइटिंग, रेलिंग और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यही कारण है कि धार्मिक स्थल के विकास और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।
लोक निर्माण विभाग नम्होल के सहायक अभियंता जगत राम ने बताया कि वर्ष 2024 से विभाग की ओर से उक्त सड़क में निशानदेही के लिए तहसीलदार नम्होल के कार्यालय में आवेदन किया गया था, लेकिन यह अभी लंबित है। इस वजह से सड़क का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मलोखर (बिलासपुर)। मलोखर से कोलथी तक बनने वाली सड़क पिछले लगभग 25 वर्ष से अधूरी है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि सिद्ध बाबा बालक नाथ कठपौलधार के श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जब भी सड़क की स्थिति के बारे में प्रशासन और संबंधित विभाग से पूछताछ की जाती है, तो बताया जाता है कि भूमि विवाद के कारण कार्य रुका हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क का निर्माण आरंभ किया था, जिसमें लगभग दो किलोमीटर तक टारिंग का कार्य पूरा कर दिया गया है। लेकिन शेष लगभग 600-700 मीटर सड़क आज भी कच्ची है और उस पर तारकोल नहीं बिछाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण उन्हें प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं, राशन और अन्य सामान घर तक पहुंचाना कठिन हो गया है। साथ ही छोटे बच्चों को भी रोजाना उतनी ही दूरी पैदल तय करके स्कूल जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में वृद्ध या बीमार व्यक्ति को चिकित्सीय सहायता के लिए पालकी में उठाकर कच्चे रास्ते से नीचे लाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो जाता है और जान का जोखिम भी बढ़ जाता है। यह मार्ग केवल गांव वालों के लिए नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। कठपौलधार मंदिर तक पहुंचने वाला शॉर्टकट रास्ता बंडोरा और जुब्बड़ से होकर कोलथी तक जाता है। इस मार्ग से दो प्राइमरी और माध्यमिक स्कूल भी जुड़े हैं।
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स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से अपील की है कि भूमि विवाद का शीघ्र समाधान कर शेष 600-700 मीटर सड़क पर तारकोल बिछाने का कार्य पूरा किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पर्यटन विभाग भी इस मार्ग को सुरक्षित बनाने में असफल रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाले पगडंडी मार्ग पर लाइटिंग, रेलिंग और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यही कारण है कि धार्मिक स्थल के विकास और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।
लोक निर्माण विभाग नम्होल के सहायक अभियंता जगत राम ने बताया कि वर्ष 2024 से विभाग की ओर से उक्त सड़क में निशानदेही के लिए तहसीलदार नम्होल के कार्यालय में आवेदन किया गया था, लेकिन यह अभी लंबित है। इस वजह से सड़क का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।