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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन मुआवजा अनियमितताओं पर फिर उठे सवाल

Sat, 11 Jul 2026 10:32 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 10:32 PM IST
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Questions raised again regarding compensation irregularities for the Kiratpur-Nerchowk four-lane project.
कैग रिपोर्ट में 22 करोड़ की गड़बड़ियों का जिक्र, आरटीआई में विभाग ने बताया रिकॉर्ड नहीं
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विस्थापित समिति ने मांगी कार्रवाई और रिकवरी की जानकारी, दोबारा दायर किया आवेदन

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण से जुड़ी कैग की रिपोर्ट में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर काम कर रही फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई, मुख्यालय बिलासपुर से सूचना के अधिकार के तहत कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। समिति का कहना है कि कार्यालय ने मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के बजाय यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित जानकारी उनके कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं है।
समिति का कहना है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में करीब 22 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में भूमालिकों को 24.52 लाख रुपये का दोहरा भुगतान, 26.14 लाख रुपये के स्ट्रक्चर वैल्यूएशन में गड़बड़ी, मुआवजा जारी होने के बाद मौके पर दो अतिरिक्त मकान पाए जाने, एक मकान को न्यायालय से अंतरिम राहत मिलने, सरकारी भूमि पर बनी संरचनाओं को 8.29 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने सहित कई मामलों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2013 से 2023 के दौरान सात गांवों में घोषित आठ अवार्ड में नौ मामलों में 2.22 करोड़ रुपये की देय राशि के मुकाबले 2.48 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने, यानी करीब 26 लाख रुपये अधिक देने और 29 अलग-अलग अवार्डों के माध्यम से 122 लाभार्थियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने जैसी अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया है। समिति ने आरटीआई के माध्यम से इन मामलों में संबंधित भूमालिकों को जारी किए गए रिकवरी नोटिसों की प्रतियां, अब तक की गई विभागीय कार्रवाई तथा 15 प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई, बिलासपुर ने पत्र संख्या 652, दिनांक 04 जुलाई 2026 के माध्यम से सूचित किया कि मांगी गई सूचनाएं उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।
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समिति के महासचिव मदन लाल ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए दोबारा आरटीआई आवेदन दायर किया है। आवेदन में कहा गया है कि यदि संबंधित सूचनाएं विशेष भूमि अधिग्रहण इकाई के पास उपलब्ध नहीं हैं तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को उस सक्षम कार्यालय में पांच दिनों के भीतर स्थानांतरित किया जाए, जहां यह रिकॉर्ड उपलब्ध है, ताकि मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई जा सके। समिति का कहना है कि कैग रिपोर्ट में जिन अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है, उनसे संबंधित कार्रवाई और रिकवरी की स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है। ऐसे में विभाग द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का जवाब कई नए सवाल खड़े कर रहा है।
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