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Bilaspur News: आवारा सांड का बढ़ता आतंक, ग्रामीणों में दहशत
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 01 Jan 2026 11:59 PM IST
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भराड़ी क्षेत्र में खेतों में आवारा सांड। संवाद
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राहगीरों पर कर रहे हैं हमले, सड़कों पर हो रहे हादसे
किसान रातभर खेतों की रखवाली को हो रहे मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
भराडी़(बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी के अंतर्गत पड़यालग, दधोल, गाहर, बाड़ी और लेठवीं सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा सांड का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर खुलेआम घूम रहे ये पशु अब आम लोगों और किसानों के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। आए दिन इनके हमलों से राहगीर घायल हो रहे हैं, वहीं अचानक सड़क पर इनके आ जाने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। लोगों के अनुसार सुबह और शाम के समय सड़कों पर आवारा सांडों का जमावड़ा लगा रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खासतौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार यह अचानक आक्रामक हो जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। पिछले एक वर्ष के भीतर अलग-अलग स्थानों पर आवारा सांड के हमलों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इनमें से कई को अस्पताल में उपचार कराना पड़ा, जबकि कुछ को गंभीर चोटें भी आई हैं। सिर्फ आमजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसान भी इनसे खासे परेशान हैं। खेतों में घुसकर ये बैल गेहूं, सरसों, मटर और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत पर रातों-रात पानी फिर जाता है। ठंड के मौसम में किसान रात-रात भर खेतों में जागकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड में भी वे अलाव जलाकर और टॉर्च लेकर खेतों में पहरा दे रहे हैं। प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। क्षेत्र में गोसदन तो बनाए गए हैं, लेकिन उनमें इन सांडों को रखने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। कई गोसदनों में क्षमता से अधिक पशु पहले से ही मौजूद हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उचित प्रबंधन और देखरेख का अभाव है। नतीजतन यह खुले में घूमने को मजबूर हैं।
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किसान रातभर खेतों की रखवाली को हो रहे मजबूर
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भराडी़(बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी के अंतर्गत पड़यालग, दधोल, गाहर, बाड़ी और लेठवीं सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा सांड का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर खुलेआम घूम रहे ये पशु अब आम लोगों और किसानों के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। आए दिन इनके हमलों से राहगीर घायल हो रहे हैं, वहीं अचानक सड़क पर इनके आ जाने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। लोगों के अनुसार सुबह और शाम के समय सड़कों पर आवारा सांडों का जमावड़ा लगा रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को खासतौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार यह अचानक आक्रामक हो जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। पिछले एक वर्ष के भीतर अलग-अलग स्थानों पर आवारा सांड के हमलों में दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। इनमें से कई को अस्पताल में उपचार कराना पड़ा, जबकि कुछ को गंभीर चोटें भी आई हैं। सिर्फ आमजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसान भी इनसे खासे परेशान हैं। खेतों में घुसकर ये बैल गेहूं, सरसों, मटर और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत पर रातों-रात पानी फिर जाता है। ठंड के मौसम में किसान रात-रात भर खेतों में जागकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड में भी वे अलाव जलाकर और टॉर्च लेकर खेतों में पहरा दे रहे हैं। प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। क्षेत्र में गोसदन तो बनाए गए हैं, लेकिन उनमें इन सांडों को रखने की व्यवस्था प्रभावी नहीं है। कई गोसदनों में क्षमता से अधिक पशु पहले से ही मौजूद हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उचित प्रबंधन और देखरेख का अभाव है। नतीजतन यह खुले में घूमने को मजबूर हैं।