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Bilaspur News: प्राथमिक शिक्षा बचाओ न्याय यात्रा बिलासपुर पहुंची
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बिलासपुर के भराड़ी पहुंची प्राथमिक शिक्षक संघ की पदयात्रा। संवाद
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भराड़ी में हुआ जोरदार स्वागत, 26 जुलाई को शिमला में प्रदेश स्तरीय विरोध प्रदर्शन
शिक्षकों ने सरकार से मांगी 25 सूत्री मांगों पर कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। प्राथमिक शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश की ओर से निकाली जा रही प्राथमिक शिक्षा बचाओ न्याय यात्रा शुक्रवार को बिलासपुर पहुंची। भराड़ी क्षेत्र में स्थानीय प्राथमिक शिक्षकों, सेवानिवृत्त अध्यापकों और विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। डंगार, दधोल, निहारी समेत कई स्थानों पर लोगों ने प्राथमिक शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि संघ न्यू कांप्लेक्स सिस्टम के विरोध सहित 25 सूत्री मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जेबीटी से टीजीटी पदोन्नति वर्षों से लंबित है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं प्रदेश के अनेक सरकारी प्राथमिक विद्यालय आज भी एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सरकार को रिक्त पदों को जल्द भरकर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ ने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई बार प्रदर्शन किए और उपायुक्तों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजे। पिछले आठ महीनों में संघ के प्रतिनिधि 14 बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। हर बार बैठक का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई औपचारिक वार्ता नहीं हो सकी। इसी के चलते 11 जुलाई को कांगड़ा जिले के बनखंडी से शिमला तक प्राथमिक शिक्षा बचाओ न्याय यात्रा शुरू की गई।
रमेश शर्मा ने बताया कि 25 जुलाई को यह पदयात्रा शिमला पहुंचेगी और 26 जुलाई को चौड़ा मैदान में प्रदेशभर के प्राथमिक शिक्षक व सेवानिवृत्त कर्मचारी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि सरकारी प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रदेशभर में शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे स्पष्ट है कि समाज भी सरकारी प्राथमिक शिक्षा को मजबूत देखना चाहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को पर्याप्त संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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शिक्षकों ने सरकार से मांगी 25 सूत्री मांगों पर कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। प्राथमिक शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश की ओर से निकाली जा रही प्राथमिक शिक्षा बचाओ न्याय यात्रा शुक्रवार को बिलासपुर पहुंची। भराड़ी क्षेत्र में स्थानीय प्राथमिक शिक्षकों, सेवानिवृत्त अध्यापकों और विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने यात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। डंगार, दधोल, निहारी समेत कई स्थानों पर लोगों ने प्राथमिक शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा कि संघ न्यू कांप्लेक्स सिस्टम के विरोध सहित 25 सूत्री मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जेबीटी से टीजीटी पदोन्नति वर्षों से लंबित है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं प्रदेश के अनेक सरकारी प्राथमिक विद्यालय आज भी एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। सरकार को रिक्त पदों को जल्द भरकर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ ने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई बार प्रदर्शन किए और उपायुक्तों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजे। पिछले आठ महीनों में संघ के प्रतिनिधि 14 बार मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। हर बार बैठक का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई औपचारिक वार्ता नहीं हो सकी। इसी के चलते 11 जुलाई को कांगड़ा जिले के बनखंडी से शिमला तक प्राथमिक शिक्षा बचाओ न्याय यात्रा शुरू की गई।
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रमेश शर्मा ने बताया कि 25 जुलाई को यह पदयात्रा शिमला पहुंचेगी और 26 जुलाई को चौड़ा मैदान में प्रदेशभर के प्राथमिक शिक्षक व सेवानिवृत्त कर्मचारी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि सरकारी प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रदेशभर में शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे स्पष्ट है कि समाज भी सरकारी प्राथमिक शिक्षा को मजबूत देखना चाहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को पर्याप्त संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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