{"_id":"6a0709a8aa50701dfc0577c0","slug":"woman-dies-in-truck-collision-children-get-rs-2033-lakh-compensation-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-159913-2026-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: ट्रक की टक्कर से महिला की मौत, बच्चों को 20.33 लाख मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: ट्रक की टक्कर से महिला की मौत, बच्चों को 20.33 लाख मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 15 May 2026 05:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अदालत से
घुमारवीं एमएसीटी का फैसला, ट्रक चालक को माना दोषी, बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश
मृतक फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन में थी कार्यरत, 2018 में दयोथ के पास हुआ था हादसा
अदालत ने कहा, शादीशुदा बेटियां और नौकरीपेशा बेटा भी मुआवजे के हकदार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दयोथ क्षेत्र में ट्रक की टक्कर से महिला की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक महिला के तीन बच्चों को 20,33,412 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए ट्रक चालक को जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि जमा कराने को कहा है।
मामले की सुनवाई मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं के अध्यक्ष डॉ. मोहित बंसल की अदालत में हुई। अदालत ने 13 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड, एफआईआर और गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि हादसा ट्रक चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुआ। अदालत में दायर याचिका के अनुसार 15 जुलाई 2018 को सत्या देवी अपने बेटे मुकेश कुमार के साथ मोटरसाइकिल पर गांव जयनगर से घर लौट रही थीं। मुकेश कुमार बाइक चला रहे थे और उनकी मां पीछे बैठी थीं। जब वे पीएनबी दयोथ के पास पहुंचे तो सामने से आए ट्रक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद सत्या देवी सड़क पर गिर गईं और ट्रक के पहियों के नीचे आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस थाना सदर बिलासपुर में ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद ट्रक चालक के खिलाफ अदालत में चालान भी पेश किया गया। मृतक महिला के बच्चों मुकेश कुमार, रेखा देवी और नीलम देवी ने ट्रिब्यूनल में मुआवजे की याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि सत्या देवी हिमाचल प्रदेश स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की रेजिन एंड टरपेंटाइन फैक्ट्री बिलासपुर में अकुशल कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं और उन्हें 14,372 रुपये मासिक वेतन मिलता था। इसके अलावा वे कृषि कार्य और दूध बेचने से भी आय अर्जित करती थीं। परिजनों ने अदालत से 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और मालिक की ओर से हादसे के लिए मोटरसाइकिल चालक को जिम्मेदार ठहराया गया। उनका कहना था कि ट्रक का आधा हिस्सा निकल चुका था और तभी बाइक चालक संतुलन खो बैठा, जिससे पीछे बैठी महिला ट्रक के पहियों के नीचे आ गई। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यदि मोटरसाइकिल चालक की गलती होती तो पुलिस उसके खिलाफ मामला दर्ज करती, लेकिन जांच में ट्रक चालक की लापरवाही सामने आई।
अदालत ने माना कि ट्रक चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, जिसके कारण महिला की मौत हुई। बीमा कंपनी की ओर से यह भी दलील दी गई कि मृतक का बेटा सेना में कार्यरत है और दोनों बेटियां शादीशुदा हैं, इसलिए वे आश्रित नहीं हैं और मुआवजे के हकदार नहीं बनते। इस पर अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मृतक के कानूनी वारिस मुआवजे का दावा कर सकते हैं। केवल आर्थिक निर्भरता ही मुआवजे का आधार नहीं होती। मां की मृत्यु से बच्चों को मानसिक पीड़ा और पारिवारिक स्नेह की क्षति हुई है, इसलिए वे मुआवजे के पात्र हैं। अदालत ने मृतिका की आय, उम्र और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की गणना की। ट्रिब्यूनल ने आश्रित क्षति के रूप में 18,68,412 रुपये, संपत्ति हानि के लिए 16,500 रुपये, अंतिम संस्कार खर्च के लिए 16,500 रुपये और तीनों बच्चों को पारिवारिक स्नेह की क्षति के लिए कुल 1,32,000 रुपये प्रदान किए। इस प्रकार कुल मुआवजा 20,33,412 रुपये तय किया गया। अदालत ने माना कि हादसे के समय ट्रक का बीमा वैध था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी था। ट्रक के सभी दस्तावेज सही पाए गए। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने ट्रक मालिक और चालक को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी राशि जमा कराने के आदेश दिए। मुआवजे की राशि तीनों बच्चों में बराबर बांटी जाएगी।
Trending Videos
घुमारवीं एमएसीटी का फैसला, ट्रक चालक को माना दोषी, बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश
मृतक फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन में थी कार्यरत, 2018 में दयोथ के पास हुआ था हादसा
अदालत ने कहा, शादीशुदा बेटियां और नौकरीपेशा बेटा भी मुआवजे के हकदार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दयोथ क्षेत्र में ट्रक की टक्कर से महिला की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने मृतक महिला के तीन बच्चों को 20,33,412 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने हादसे के लिए ट्रक चालक को जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि जमा कराने को कहा है।
मामले की सुनवाई मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं के अध्यक्ष डॉ. मोहित बंसल की अदालत में हुई। अदालत ने 13 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड, एफआईआर और गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि हादसा ट्रक चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुआ। अदालत में दायर याचिका के अनुसार 15 जुलाई 2018 को सत्या देवी अपने बेटे मुकेश कुमार के साथ मोटरसाइकिल पर गांव जयनगर से घर लौट रही थीं। मुकेश कुमार बाइक चला रहे थे और उनकी मां पीछे बैठी थीं। जब वे पीएनबी दयोथ के पास पहुंचे तो सामने से आए ट्रक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद सत्या देवी सड़क पर गिर गईं और ट्रक के पहियों के नीचे आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस थाना सदर बिलासपुर में ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद ट्रक चालक के खिलाफ अदालत में चालान भी पेश किया गया। मृतक महिला के बच्चों मुकेश कुमार, रेखा देवी और नीलम देवी ने ट्रिब्यूनल में मुआवजे की याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि सत्या देवी हिमाचल प्रदेश स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की रेजिन एंड टरपेंटाइन फैक्ट्री बिलासपुर में अकुशल कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं और उन्हें 14,372 रुपये मासिक वेतन मिलता था। इसके अलावा वे कृषि कार्य और दूध बेचने से भी आय अर्जित करती थीं। परिजनों ने अदालत से 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और मालिक की ओर से हादसे के लिए मोटरसाइकिल चालक को जिम्मेदार ठहराया गया। उनका कहना था कि ट्रक का आधा हिस्सा निकल चुका था और तभी बाइक चालक संतुलन खो बैठा, जिससे पीछे बैठी महिला ट्रक के पहियों के नीचे आ गई। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यदि मोटरसाइकिल चालक की गलती होती तो पुलिस उसके खिलाफ मामला दर्ज करती, लेकिन जांच में ट्रक चालक की लापरवाही सामने आई।
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत ने माना कि ट्रक चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, जिसके कारण महिला की मौत हुई। बीमा कंपनी की ओर से यह भी दलील दी गई कि मृतक का बेटा सेना में कार्यरत है और दोनों बेटियां शादीशुदा हैं, इसलिए वे आश्रित नहीं हैं और मुआवजे के हकदार नहीं बनते। इस पर अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मृतक के कानूनी वारिस मुआवजे का दावा कर सकते हैं। केवल आर्थिक निर्भरता ही मुआवजे का आधार नहीं होती। मां की मृत्यु से बच्चों को मानसिक पीड़ा और पारिवारिक स्नेह की क्षति हुई है, इसलिए वे मुआवजे के पात्र हैं। अदालत ने मृतिका की आय, उम्र और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की गणना की। ट्रिब्यूनल ने आश्रित क्षति के रूप में 18,68,412 रुपये, संपत्ति हानि के लिए 16,500 रुपये, अंतिम संस्कार खर्च के लिए 16,500 रुपये और तीनों बच्चों को पारिवारिक स्नेह की क्षति के लिए कुल 1,32,000 रुपये प्रदान किए। इस प्रकार कुल मुआवजा 20,33,412 रुपये तय किया गया। अदालत ने माना कि हादसे के समय ट्रक का बीमा वैध था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी था। ट्रक के सभी दस्तावेज सही पाए गए। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने ट्रक मालिक और चालक को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी राशि जमा कराने के आदेश दिए। मुआवजे की राशि तीनों बच्चों में बराबर बांटी जाएगी।