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Chamba News: मेडिकल कॉलेज चंबा में 58 साल बाद मरीजों के लिए स्नानगृह नसीब नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 06 Feb 2026 10:49 PM IST
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चंबा मेडिकल कॉलेज के पास खुले में कपड़े धोते मरीजों के तीमारदार। संवाद
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चंबा। वर्ष 1968 में बने चंबा के सबसे बड़े चिकित्सालय को 58 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी यहां भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए स्नानगृह की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में उपचाराधीन मरीज नहाने और कपड़े धोने के लिए सार्वजनिक नलों पर निर्भर हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।
4 जनवरी 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. परमार द्वारा इस अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था। निर्माण के दौरान शौचालयों को तो महत्व दिया गया, लेकिन जनरल वार्डों में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए अलग स्नानगृह की व्यवस्था नहीं की गई। यह कमी आज भी जस की तस बनी हुई है। स्पेशल वार्डों को छोड़ दें तो अन्य किसी भी वार्ड में स्नानगृह की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है।
वर्तमान में अस्पताल में शौचालयों की मरम्मत का कार्य तो किया जा रहा है, लेकिन नहाने और कपड़े धोने के लिए अलग स्नानगृह कक्षों के निर्माण पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिणामस्वरूप आज भी कई मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल परिसर से बाहर मुख्य मार्ग पर नहाते-धोते देखे जा सकते हैं, जो न केवल असहज बल्कि स्वास्थ्य मानकों के भी खिलाफ है।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन उपायुक्त देवेश कुमार के कार्यकाल के दौरान अस्पताल की सभी मंजिलों पर जनरल वार्डों के लिए स्नानगृह निर्माण के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत विभाग की तकनीकी विंग को एक किस्त भी जारी की गई थी, बावजूद इसके न तो उस समय क्षेत्रीय चिकित्सालय में और न ही वर्तमान पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में यह कार्य पूरा हो सका।
मामला ध्यान में है। मरीजों के लिए शौचालयों में ही स्नानगृह की व्यवस्था करवाई जाएगी, ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियां पेश न आ सके। डॉ. प्रदीप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबा
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4 जनवरी 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. परमार द्वारा इस अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था। निर्माण के दौरान शौचालयों को तो महत्व दिया गया, लेकिन जनरल वार्डों में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए अलग स्नानगृह की व्यवस्था नहीं की गई। यह कमी आज भी जस की तस बनी हुई है। स्पेशल वार्डों को छोड़ दें तो अन्य किसी भी वार्ड में स्नानगृह की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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वर्तमान में अस्पताल में शौचालयों की मरम्मत का कार्य तो किया जा रहा है, लेकिन नहाने और कपड़े धोने के लिए अलग स्नानगृह कक्षों के निर्माण पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिणामस्वरूप आज भी कई मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल परिसर से बाहर मुख्य मार्ग पर नहाते-धोते देखे जा सकते हैं, जो न केवल असहज बल्कि स्वास्थ्य मानकों के भी खिलाफ है।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन उपायुक्त देवेश कुमार के कार्यकाल के दौरान अस्पताल की सभी मंजिलों पर जनरल वार्डों के लिए स्नानगृह निर्माण के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत विभाग की तकनीकी विंग को एक किस्त भी जारी की गई थी, बावजूद इसके न तो उस समय क्षेत्रीय चिकित्सालय में और न ही वर्तमान पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में यह कार्य पूरा हो सका।
मामला ध्यान में है। मरीजों के लिए शौचालयों में ही स्नानगृह की व्यवस्था करवाई जाएगी, ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियां पेश न आ सके। डॉ. प्रदीप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबा