चंद्रमणी कुलेठी की मौत: एक हादसे ने छीन लिया युवा कांग्रेस नेता का जीवन, पीछे छूट गया हंसता-खेलता परिवार
चंबा की होली घाटी में युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणी कुलेठी की असमय मौत ने परिवार और क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों के दौरान हुए हादसे में उनकी जान चली गई। पीछे छूट गया परिवार, एक छोटा बेटा और अपनों के साथ बिताए जाने वाले भविष्य के अनगिनत सपने।
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कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो एक पल में जिंदगी की पूरी तस्वीर बदल देती हैं। घर में किसी का इंतजार कर रहे परिजन, भविष्य के सपने संजोता परिवार और अपने काम में जुटा एक व्यक्ति सब कुछ अचानक एक ऐसी खबर के सामने ठहर जाता है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। चंबा जिले की होली घाटी में युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणी कुलेठी के साथ हुआ हादसा भी एक ऐसी ही दुखद घटना बन गया।
चंबा जिला के होली निवासी एवं यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री चंद्रमणि कुलेठी जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनके निधन से कांग्रेस परिवार ने अपना एक समर्पित और कर्मठ युवा साथी खो दिया है। चंद्रमणि जी मेरे होली दौरे को लेकर बेहद उत्साहित थे, और कई दिन से कार्यक्रम की तैयारियों में जी-जान से जुटे थे। इस कठिन घड़ी में, मैं शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा हूँ। ईश्वर दिवंगत की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति।
— Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) October 22, 2026विज्ञापन
चंद्रमणी कुलेठी हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। संगठन की गतिविधियों में उनकी भागीदारी थी और वह क्षेत्र में राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों में सक्रिय रहते थे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से जुड़ा काम भी इसी सक्रियता का हिस्सा था। लेकिन इस हादसे ने उनके जीवन का सफर अचानक समाप्त कर दिया। किसी भी सार्वजनिक आयोजन की तैयारियों में जुटे लोगों की मेहनत अक्सर मंच, कार्यक्रम और व्यवस्थाओं के पीछे छिपी रहती है। ऐसे कामों के दौरान सुरक्षा का महत्व भी सामने आता है। चंद्रमणी की मौत ने एक परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई और क्षेत्र में शोक का माहौल पैदा कर दिया।
इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू उनका परिवार है। चंद्रमणी अपने पीछे पत्नी, दो साल के बेटे और माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनका बेटा अभी उस उम्र में है, जब बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं और माता-पिता का साथ ही उनके लिए सबसे बड़ी सुरक्षा होता है। अब परिवार को उस कमी के साथ आगे बढ़ना होगा, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। बच्चे के भविष्य, उसकी परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच चंद्रमणी की अनुपस्थिति लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
चंद्रमणी कुलेठी की पहचान केवल एक राजनीतिक पदाधिकारी के रूप में नहीं थी। वह एक परिवार के सदस्य, पति, पिता और बेटे भी थे। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले व्यक्ति के पीछे भी एक निजी दुनिया होती है परिवार की उम्मीदें, बच्चों के सपने और आने वाले वर्षों की योजनाएं। उनके निधन ने यही याद दिलाया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके पद से आगे बढ़कर उसके रिश्तों और जिम्मेदारियों से भी बनती है। राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय चंद्रमणी के असमय चले जाने से उनके परिवार के साथ-साथ उनसे जुड़े लोगों को भी गहरा आघात पहुंचा है।
हादसे की खबर फैलने के बाद होली क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। एक ओर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर क्षेत्र में गतिविधियां चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर उसी आयोजन की तैयारियों के दौरान हुए हादसे ने माहौल को गमगीन कर दिया। जिस कार्यक्रम के लिए लोग व्यवस्थाएं जुटा रहे थे, उससे जुड़ी तैयारियां एक परिवार के लिए जीवनभर न भूल पाने वाली त्रासदी बन गईं।
पुलिस ने घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, बिजली की तारों के संपर्क में आने की वजह क्या थी और घटना के दौरान सुरक्षा की क्या व्यवस्था थी इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। यह घटना सार्वजनिक आयोजनों, प्रचार सामग्री लगाने और बिजली की लाइनों के आसपास काम करने के दौरान सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करती है। बिजली से जुड़े कार्यों के निकट पर्याप्त सावधानी, सुरक्षित दूरी और आवश्यक सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं।
चंद्रमणी कुलेठी की जिंदगी का अंत एक दुखद हादसे में हुआ, लेकिन उनके जाने से पैदा हुई रिक्तता परिवार के लिए बहुत बड़ी है। पत्नी के लिए जीवनसाथी का बिछुड़ना, माता-पिता के लिए इकलौते बेटे को खोना और छोटे बच्चे के लिए पिता का साथ छूट जाना इस घटना के अलग-अलग दर्द हैं, जिन्हें कोई शब्द पूरी तरह बयान नहीं कर सकते। होली घाटी में हुआ यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में जुटे हर व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। चंद्रमणी कुलेठी के परिवार के सामने अब इस अपूरणीय क्षति के साथ आगे बढ़ने की कठिन चुनौती है।