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Earthquake: चंबा और कांगड़ा में भूकंप के झटके, भरमौर में एक घंटे में तीन बार कांपी धरती, घरों से बाहर आए लोग

Wed, 19 Aug 2026 08:11 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चंबा/कांगड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा/कांगड़ा Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 19 Aug 2026 08:11 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के चंबा और कांगड़ा में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भरमौर में एक घंटे के भीतर तीन बार झटके आने से लोगों की चिंता बढ़ गई। अचानक हुए कंपन से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। 

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Earthquake tremors felt three times within an hour in Bharmour of chamba himachal pradesh
भूकंप - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा और कांगड़ा जिलों में मंगलवार शाम भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। इन झटकों से लोगों में दहशत फैल गई और वे एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, प्रशासन ने जान-माल के किसी नुकसान की सूचना नहीं दी है।
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राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, चंबा के भरमौर क्षेत्र में मंगलवार शाम 6:54 बजे पहला झटका आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। इसका केंद्र करेरी के पास 5 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके बाद भरमौर में शाम 7:40 बजे और 7:43 बजे भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। लगभग 45 मिनट बाद, कांगड़ा जिले में भी मध्यम तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया।
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कांगड़ा में आए भूकंप की गहराई भी 5 किलोमीटर थी। भूकंप के झटके महसूस होते ही घरों में रखा सामान हिलने लगा। लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए और कुछ देर तक बाहर ही रहे। एडीएम चंबा अमित मेहरा ने बताया कि जिले में कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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चंबा और कांगड़ा जिले भूकंपीय क्षेत्र V में आते हैं। इस क्षेत्र को उच्च-क्षति-जोखिम क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। भूकंप की उथली गहराई के कारण झटके अधिक महसूस हुए। अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति की निगरानी कर रही हैं।

 

लोगों में दहशत
भरमौर में एक घंटे के भीतर तीन बार झटके आने से लोगों की चिंता बढ़ गई। अचानक हुए कंपन से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कुछ देर तक लोग एक-दूसरे से भूकंप के बारे में जानकारी लेते रहे। स्थिति सामान्य होने पर ही लोग वापस अपने घरों में लौटे।

क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। 

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

 

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
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