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Chamba News: पीपल के पत्तों ने खिलाए स्वरोजगार के फूल
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खास खबर
पीपल के पत्तों ने खिलाए स्वरोजगार के फूल
गुजरात, मुंबई, केरल और दक्षिण भारत से आ रही मांग
ममता के हाथों बने फूल मिंजर मेले में बटोर रहे वाहवाही
तीसा की ममता ने हुनर को बनाया अपना रोजगार
रिंपी ठाकुर
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार तीसा की ममता ठाकुर की अनोखी हस्तकला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उनके स्टॉल पर पीपल के पत्तों और सोला वुड से तैयार किए गए खूबसूरत फूल और गुलदस्ते देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पहली नजर में इन फूलों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये प्राकृतिक पत्तों और लकड़ी से तैयार किए गए हैं।
ममता ने बताया कि वह वर्ष 2015 से इस कला से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने यह हुनर अपनी एक सहेली से सीखा था, जिसे आज उन्होंने अपने रोजगार का माध्यम बना लिया है। उनके हाथों से तैयार उत्पादों की मांग अब हिमाचल के साथ-साथ गुजरात, मुंबई, केरल और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों तक पहुंच चुकी है। पीपल के पत्तों से फूल तैयार करने की प्रक्रिया काफी मेहनत और धैर्य भरी होती है। सबसे पहले पत्तों को करीब दो माह तक पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद उन्हें सावधानी से साफ कर सुखाया जाता है ताकि केवल उनकी महीन नसों का प्राकृतिक ढांचा बचा रहे। इसके बाद इन्हें लकड़ी की सहायता से आकर्षक फूलों का रूप दिया जाता है। इसके अलावा ममता सोला वुड से भी विभिन्न डिजाइन के फूल और आकर्षक गुलदस्ते तैयार करती हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होते और प्राकृतिक सौंदर्य का एहसास करवाते हैं। यही वजह है कि उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। मिंजर मेले में ममता का स्टॉल न केवल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि पारंपरिक हस्तकला के दम पर स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
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पीपल के पत्तों ने खिलाए स्वरोजगार के फूल
गुजरात, मुंबई, केरल और दक्षिण भारत से आ रही मांग
ममता के हाथों बने फूल मिंजर मेले में बटोर रहे वाहवाही
तीसा की ममता ने हुनर को बनाया अपना रोजगार
रिंपी ठाकुर
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार तीसा की ममता ठाकुर की अनोखी हस्तकला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उनके स्टॉल पर पीपल के पत्तों और सोला वुड से तैयार किए गए खूबसूरत फूल और गुलदस्ते देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पहली नजर में इन फूलों को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये प्राकृतिक पत्तों और लकड़ी से तैयार किए गए हैं।
ममता ने बताया कि वह वर्ष 2015 से इस कला से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने यह हुनर अपनी एक सहेली से सीखा था, जिसे आज उन्होंने अपने रोजगार का माध्यम बना लिया है। उनके हाथों से तैयार उत्पादों की मांग अब हिमाचल के साथ-साथ गुजरात, मुंबई, केरल और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों तक पहुंच चुकी है। पीपल के पत्तों से फूल तैयार करने की प्रक्रिया काफी मेहनत और धैर्य भरी होती है। सबसे पहले पत्तों को करीब दो माह तक पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद उन्हें सावधानी से साफ कर सुखाया जाता है ताकि केवल उनकी महीन नसों का प्राकृतिक ढांचा बचा रहे। इसके बाद इन्हें लकड़ी की सहायता से आकर्षक फूलों का रूप दिया जाता है। इसके अलावा ममता सोला वुड से भी विभिन्न डिजाइन के फूल और आकर्षक गुलदस्ते तैयार करती हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये लंबे समय तक खराब नहीं होते और प्राकृतिक सौंदर्य का एहसास करवाते हैं। यही वजह है कि उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। मिंजर मेले में ममता का स्टॉल न केवल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, बल्कि यह भी साबित कर रहा है कि पारंपरिक हस्तकला के दम पर स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
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