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Chamba News: गुलाबी हुआ घोल, खुला रिश्वतखोरी की जांच का राज
Sun, 25 Oct 2026 10:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 25 Oct 2026 10:35 PM IST
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चंबा में प्रदर्शनी के दौरान कैमिकल बारे जानकारी देता शिक्षक।संवाद
चौगान की आत्मनिर्भर भारत प्रदर्शनी में रासायनिक प्रयोग से समझाई सतर्कता विभाग की कार्रवाई
फिनॉल्फ्थेलीन और सोडियम कार्बोनेट की प्रतिक्रिया से बच्चों ने जाना जांच का वैज्ञानिक पहलू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। एक रासायनिक प्रयोग और रंग बदलता गुलाबी घोल। चंबा के चौगान में आयोजित आत्मनिर्भर भारत प्रदर्शनी में इस प्रदर्शन के जरिये बच्चों और आम लोगों को समझाया गया कि रिश्वतखोरी के मामलों में सतर्कता विभाग वैज्ञानिक तरीकों से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया कैसे अपनाता है।
सहायक शिक्षक अमितेश वर्मा ने प्रयोग के माध्यम से जांच के एक पहलू को सरल ढंग से प्रस्तुत किया। प्रदर्शन देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रही।
अमितेश वर्मा ने बताया कि रिश्वतखोरी के मामलों में जाल बिछाने की कार्रवाई के दौरान फिनॉल्फ्थेलीन नामक रसायन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उपचारित नोटों को छूने पर रसायन के अंश हाथों तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धोने पर रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण घोल गुलाबी हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि घोल का रंग बदलना अपने आप में रिश्वत लेने का अंतिम प्रमाण नहीं है। जांच में अन्य साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का भी महत्व रहता है। प्रदर्शनी में बच्चों ने प्रयोग को ध्यान से देखा और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक जांच के बारे में जानकारी हासिल की। इस गतिविधि ने किताबी ज्ञान को व्यावहारिक उदाहरण से जोड़ने के साथ ईमानदारी और कानून के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया।
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फिनॉल्फ्थेलीन और सोडियम कार्बोनेट की प्रतिक्रिया से बच्चों ने जाना जांच का वैज्ञानिक पहलू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। एक रासायनिक प्रयोग और रंग बदलता गुलाबी घोल। चंबा के चौगान में आयोजित आत्मनिर्भर भारत प्रदर्शनी में इस प्रदर्शन के जरिये बच्चों और आम लोगों को समझाया गया कि रिश्वतखोरी के मामलों में सतर्कता विभाग वैज्ञानिक तरीकों से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया कैसे अपनाता है।
सहायक शिक्षक अमितेश वर्मा ने प्रयोग के माध्यम से जांच के एक पहलू को सरल ढंग से प्रस्तुत किया। प्रदर्शन देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रही।
अमितेश वर्मा ने बताया कि रिश्वतखोरी के मामलों में जाल बिछाने की कार्रवाई के दौरान फिनॉल्फ्थेलीन नामक रसायन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उपचारित नोटों को छूने पर रसायन के अंश हाथों तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धोने पर रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण घोल गुलाबी हो सकता है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि घोल का रंग बदलना अपने आप में रिश्वत लेने का अंतिम प्रमाण नहीं है। जांच में अन्य साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का भी महत्व रहता है। प्रदर्शनी में बच्चों ने प्रयोग को ध्यान से देखा और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक जांच के बारे में जानकारी हासिल की। इस गतिविधि ने किताबी ज्ञान को व्यावहारिक उदाहरण से जोड़ने के साथ ईमानदारी और कानून के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया।
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