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Hamirpur (Himachal) News: जिले के 92% स्कूलों में नहीं मिल रहा प्रमाणित स्वच्छ पेयजल
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हमीरपुर। एजुकेशन हब कहे जाने वाले हमीरपुर जिले के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर चिंताजनक सामने आई है।
समग्र शिक्षा योजना के तहत सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 56 फीसदी स्कूल फर्नीचर की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि 92 फीसदी स्कूलों में पेयजल सुविधा होने के बावजूद विद्यार्थियों को प्रमाणित स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
वहीं, आठ फीसदी स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं और स्टाफ रूम नहीं हैं। प्रदेश विश्वविद्यालय की टीम ने सोमवार को डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में जिले के 704 में से 146 स्कूलों का मूल्यांकन किया। सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट में 500 से अधिक अभिभावक, शिक्षक, एसएमसी सदस्य, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
मूल्यांकन रिपोर्ट में उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, छात्र सुरक्षा, दिव्यांग अनुकूल व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोर स्थिति का ब्योरा प्रस्तुत किया।
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27 फीसदी स्कूलों में चहारदीवारी ही नहीं
32 फीसदी स्कूलों में स्कूल सुरक्षा समितियों का गठन नहीं हुआ है, जबकि 27 फीसदी स्कूलों में चहारदीवारी ही नहीं है।
पुस्तकालय सुविधाओं के बुरे हाल, 70 फीसदी से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे
पुस्तकालय सुविधाओं के मामले में 70 फीसदी से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। 84 फीसदी स्कूलों में बाधारहित पहुंच और 63 फीसदी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अनुकूलित शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।
19 फीसदी स्कूलों में किशोरियों को सेनेटरी पैड नहीं मिल रहे
सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य बचन सिंह ने कहा कि 19 फीसदी स्कूलों में किशोरियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। एक तिहाई स्कूलों में शिकायत एवं सुझाव पेटियां नहीं हैं।
सामाजिक अंकेक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए कार्य किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कमियां सामने आई हैं, उनमें सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। नवीन शर्मा,
समग्र शिक्षा योजना के तहत सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 56 फीसदी स्कूल फर्नीचर की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि 92 फीसदी स्कूलों में पेयजल सुविधा होने के बावजूद विद्यार्थियों को प्रमाणित स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
वहीं, आठ फीसदी स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं और स्टाफ रूम नहीं हैं। प्रदेश विश्वविद्यालय की टीम ने सोमवार को डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में जिले के 704 में से 146 स्कूलों का मूल्यांकन किया। सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट में 500 से अधिक अभिभावक, शिक्षक, एसएमसी सदस्य, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
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मूल्यांकन रिपोर्ट में उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, छात्र सुरक्षा, दिव्यांग अनुकूल व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोर स्थिति का ब्योरा प्रस्तुत किया।
27 फीसदी स्कूलों में चहारदीवारी ही नहीं
32 फीसदी स्कूलों में स्कूल सुरक्षा समितियों का गठन नहीं हुआ है, जबकि 27 फीसदी स्कूलों में चहारदीवारी ही नहीं है।
पुस्तकालय सुविधाओं के बुरे हाल, 70 फीसदी से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे
पुस्तकालय सुविधाओं के मामले में 70 फीसदी से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। 84 फीसदी स्कूलों में बाधारहित पहुंच और 63 फीसदी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अनुकूलित शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।
19 फीसदी स्कूलों में किशोरियों को सेनेटरी पैड नहीं मिल रहे
सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य बचन सिंह ने कहा कि 19 फीसदी स्कूलों में किशोरियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। एक तिहाई स्कूलों में शिकायत एवं सुझाव पेटियां नहीं हैं।
सामाजिक अंकेक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए कार्य किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कमियां सामने आई हैं, उनमें सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। नवीन शर्मा,