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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेज में एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म, मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ा
Sun, 26 Jul 2026 01:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:22 AM IST
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हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर एवं अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का स्टॉक समाप्त हो गया है। इसके चलते कुत्ते के काटने पर मरीजों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन चार से पांच डॉग बाइट के मामले उपचार के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में एआरवी की कमी मरीजों के लिए चिंता का कारण बन गई है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना करीब 1500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों से दस रुपये का पर्ची शुल्क लिया जाता है, बावजूद इसके अस्पताल में कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है।
अस्पताल आने वाले मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से जल्द से जल्द एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि डॉग बाइट के मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
बॉक्स
ढाई सालों में 11 हजार से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा
जनवरी 2024 से जून 2026 तक जिले में 11 हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं। वर्ष 2024 में 4,269, वर्ष 2025 में 4,325 और वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 2,406 मामले दर्ज हो चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस साल कुत्तों के काटने के मामले गत वर्षों से बढ़ सकते हैं।
कोट
एआरवी का नया स्टॉक मंगवाया है। जल्द ही मरीजों को एआरवी उपलब्ध हो जाएगाी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
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वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगे दामों पर वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन चार से पांच डॉग बाइट के मामले उपचार के लिए पहुंचते हैं।
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ऐसे में एआरवी की कमी मरीजों के लिए चिंता का कारण बन गई है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना करीब 1500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों से दस रुपये का पर्ची शुल्क लिया जाता है, बावजूद इसके अस्पताल में कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है।
अस्पताल आने वाले मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से जल्द से जल्द एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि डॉग बाइट के मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
बॉक्स
ढाई सालों में 11 हजार से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा
जनवरी 2024 से जून 2026 तक जिले में 11 हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं। वर्ष 2024 में 4,269, वर्ष 2025 में 4,325 और वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 2,406 मामले दर्ज हो चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस साल कुत्तों के काटने के मामले गत वर्षों से बढ़ सकते हैं।
कोट
एआरवी का नया स्टॉक मंगवाया है। जल्द ही मरीजों को एआरवी उपलब्ध हो जाएगाी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर