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Hamirpur (Himachal) News: फाइलों में उलझा मल्टीपर्पज कैफेटेरिया का निर्माण
Fri, 19 Jun 2026 12:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:40 AM IST
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हमीरपुर। शिमला–मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग-103 पर कैहडरू के समीप प्रस्तावित मल्टीपर्पज कैफेटेरिया का निर्माण एक वर्ष बाद भी फाइलों में ही उलझा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अभी तक मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहा है।
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने करीब 1.12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एक वर्ष पूर्व निदेशालय को भेजा था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
इस कैफेटेरिया का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थायी मंच प्रदान करना था।
प्रस्ताव के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्किंग शैड, ग्रामीण कैफे में काउंटर तथा स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले अचार, पापड़, मसाले, शहद, हस्तशिल्प वस्तुएं, बड़ियां और अन्य स्वदेशी उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था की जानी थी।
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मंजूरी न मिलने से परियोजना अधर में लटकी हुई है। वर्तमान में जिले में 2,738 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे हजारों महिलाएं जुड़ी हुई हैं। स्थायी बिक्री स्थल न होने के कारण इन समूहों की महिलाएं मेलों और दुकानों में जाकर सामान बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
प्रपोजल तैयार कर संबंधित विभाग ने निदेशालय को भेजी है, अभी तक प्रपोजल को मंजूरी नहीं मिल पाई है। मंजूरी मिलने के बाद ही मल्टीपर्पज कैफेटेरिया का कार्य किया जाएगा। -अस्मिता ठाकुर, उपनिदेशक सहपरियोजना अधिकारी, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण
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जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने करीब 1.12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एक वर्ष पूर्व निदेशालय को भेजा था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
इस कैफेटेरिया का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थायी मंच प्रदान करना था।
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प्रस्ताव के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्किंग शैड, ग्रामीण कैफे में काउंटर तथा स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले अचार, पापड़, मसाले, शहद, हस्तशिल्प वस्तुएं, बड़ियां और अन्य स्वदेशी उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था की जानी थी।
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मंजूरी न मिलने से परियोजना अधर में लटकी हुई है। वर्तमान में जिले में 2,738 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे हजारों महिलाएं जुड़ी हुई हैं। स्थायी बिक्री स्थल न होने के कारण इन समूहों की महिलाएं मेलों और दुकानों में जाकर सामान बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
प्रपोजल तैयार कर संबंधित विभाग ने निदेशालय को भेजी है, अभी तक प्रपोजल को मंजूरी नहीं मिल पाई है। मंजूरी मिलने के बाद ही मल्टीपर्पज कैफेटेरिया का कार्य किया जाएगा। -अस्मिता ठाकुर, उपनिदेशक सहपरियोजना अधिकारी, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण