सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Despite claims of cleaning water tanks, patients with diarrhea are visiting the hospital daily.

Hamirpur (Himachal) News: पानी के टैंकों की सफाई के दावों के बीच रोजाना अस्पताल आ रहे दस्त के मरीज

संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Mon, 12 Jan 2026 01:06 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
हमीरपुर। खराब खानपान और पानी में पाई जाने वाली अशुद्धियां उल्टी-दस्त और पेट की बीमारियों का कारण बन रहे हैं। रोजाना आने वाले उल्टी, दस्त और पेट की बीमारियों के मरीजों की संख्या जल शक्ति विभाग के पानी के टैंकों के दावों की हकीकत बयां कर रही है।
Trending Videos

जिले में मेडिकल कॉलेज सहित सिविल अस्पताल और पीएचसी हैं। इन अस्पतालों में रोजाना उल्टी और दस्त के एक से दो मामले आ रहे हैं। औसतन रोजाना आठ से दस मामले जलजनित रोगों के आ रहे हैं। हालांकि बरसात के दिनों में उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में इजाफा हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बरसात के दिनों में मटमैला पानी पेट की बीमारियों की वृद्धि का कारण बनता है। मात्र ब्लीचिंग पाउडर डालकर पानी का शुद्धिकरण किया जाता है। टैंकों की समय पर सफाई के दावों के बीच अशुद्धियों से भरा पानी लोगों के घरों तक पहुंचता है और उन्हें बीमार करता है। सबसे गंभीर बात यह है कि जल शक्ति विभाग की ओर से पानी के टैंकों की सफाई की तिथि टैंकों पर अंकित नहीं है। लोगों को पता नहीं होता है कि किस टैंक की सफाई कब हुई, जिस टैंक का पानी प्रयोग किया जा रहा है, उसमें पानी कितना शुद्ध है।


टौणी देवी और नादौन में आए ज्यादा मामले
टौणीदेवी और नादौन में बीते दो से तीन सालों में जनजनित रोगों का प्रकोप लगातार रहा है। जोलसप्पड़, रैल, बमसन के ग्वारडू, छत्रैल, टौणीदेवी, भोरंज और लंबलू क्षेत्र में बड़े स्तर पर हाल के वर्षों में डायरिया और पीलिया के मामले सामने आए हैं।


वर्ष में दो बार की जाती है टैंकों की सफाई
जिले में करीब 1204 पानी के टैंक हैं। इनमें से 919 अंडग्राउंड और 285 ओवरहेड टैंक हैं। जल शक्ति विभाग का दावा है कि वर्ष में दो बार पानी टैंकों की सफाई की जाती है। समय पर ब्लीचिंग पाउडर डाला जाता है। सफाई की नियमित रूप से निगरानी की जाती है। सफाई के फोटो और वीडियो जल शक्ति विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किए जाते हैं। प्रदेश सरकार तक सफाई की जानकारी दी जाती है। हालांकि कुछ टैंकों की दीवारों पर उगी काई से ऐसा लगता है कि इन टैंकों की सफाई को काफी अरसा बीत गया है।


कोट
उल्टी, दस्त और पेट की बीमारियों के मामले बरसात में अधिक आते हैं। यह जलजनित अधिक होते हैं। वर्तमान में रोजाना अस्पतालों में एक से दो मामले पेट की बीमारियों के ही आ रहे हैं। मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपयुक्त इलाज मुहैया करवाया जाता है। -डॉ. प्रवीण चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर

साल में दो बार पेयजल टैंकों की प्री और पोस्ट मानसून में सफाई करवाई जाती है। टैंकों पर सफाई की तिथि लिखना अनिवार्य है। -नीरज भोगल, अधीक्षक अभियंता, जल शक्ति वृत हमीरपुर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article