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Hamirpur (Himachal) News: पेयजल स्रोतों के पास कीटनाशक उपयोग पर रोक के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:54 AM IST
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रंगस (हमीरपुर)। उपमंडल नादौन के अंतर्गत पेयजल स्रोतों के समीप कीटनाशकों एवं रासायनिक दवाइयों के अनुचित उपयोग को लेकर प्रशासन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में एसडीएम नादौन निशांत शर्मा ने सभी ग्राम पंचायत प्रधानों, सचिवों तथा संबंधित पटवारियों को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं।
एसडीएम ने बताया कि कई गांवों में कृषि फसलों पर कीटनाशकों, खरपतवार नाशकों एवं अन्य रासायनिक दवाइयों का अत्यधिक और असावधानीपूर्वक उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, इनका छिड़काव जल स्रोतों, बावड़ियों, कुओं, नालों, खड्डों एवं अन्य प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के निकट किए जाने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं, पंचायत बैठकों, महिला मंडलों, युवक मंडलों एवं किसान समूहों के माध्यम से लोगों को कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए।
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वहीं, पेयजल स्रोतों के आसपास किसी भी प्रकार की रासायनिक दवाइयों का छिड़काव न करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए तथा कृषि विभाग के मानकों के अनुसार ही दवाइयों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
एसडीएम ने यह भी कहा कि खाली कीटनाशक बोतलों, डिब्बों और पैकेटों का सुरक्षित निस्तारण किया जाए और तेज हवा, वर्षा या जल स्रोतों की दिशा में छिड़काव से बचने के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाए।
एसडीएम ने बताया कि कई गांवों में कृषि फसलों पर कीटनाशकों, खरपतवार नाशकों एवं अन्य रासायनिक दवाइयों का अत्यधिक और असावधानीपूर्वक उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, इनका छिड़काव जल स्रोतों, बावड़ियों, कुओं, नालों, खड्डों एवं अन्य प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के निकट किए जाने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं, पंचायत बैठकों, महिला मंडलों, युवक मंडलों एवं किसान समूहों के माध्यम से लोगों को कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाए।
वहीं, पेयजल स्रोतों के आसपास किसी भी प्रकार की रासायनिक दवाइयों का छिड़काव न करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए तथा कृषि विभाग के मानकों के अनुसार ही दवाइयों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
एसडीएम ने यह भी कहा कि खाली कीटनाशक बोतलों, डिब्बों और पैकेटों का सुरक्षित निस्तारण किया जाए और तेज हवा, वर्षा या जल स्रोतों की दिशा में छिड़काव से बचने के लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाए।