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Hamirpur (Himachal) News: नए मेडिकल कॉलेज भवन में शिफ्टिंग की राह में फर्नीचर की दीवार
Wed, 01 Jul 2026 01:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निरीक्षण और जुलाई के पहले सप्ताह में शिफ्टिंग के दावे के बावजूद जोलसप्पड़ स्थित नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक और अस्पताल भवन में स्थानांतरण को लेकर संशय बरकरार है। सबसे बड़ी बाधा भवन में फर्नीचर नहीं लगने की है।
मंगलवार को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), राज्य लोक निर्माण विभाग, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कैंपस में शिफ्टिंग की तैयारियों को लेकर विस्तृत बैठक की, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। अब अगले सप्ताह एक और बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें विभिन्न तकनीकी कार्यों से जुड़े वेंडरों को भी शामिल किया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों की राय रही कि फर्नीचर लगाए बिना भवन में शिफ्टिंग करना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि फर्नीचर लगाने के दौरान ही दरवाजों, खिड़कियों और अन्य संरचनात्मक कमियों की पहचान हो सकेगी। यदि ये खामियां शिफ्टिंग के बाद सामने आईं तो अस्पताल के संचालन में गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं।
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यही कारण रहा कि बैठक का अधिकांश समय इसी मुद्दे पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री पहले ही जुलाई के पहले सप्ताह में मेडिकल कॉलेज को क्षेत्रीय अस्पताल परिसर से नए भवन में स्थानांतरित करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन मंगलवार की बैठक के बाद यह लक्ष्य फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अगले सप्ताह मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम (एमजीपीएस), ऑपरेशन थियेटर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े वेंडरों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इन सभी प्रणालियों की अंतिम तकनीकी जांच और परीक्षण के बाद ही भवन को पूर्ण रूप से संचालन के लिए तैयार माना जाएगा।
करीब डेढ़ वर्ष पहले 280 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल और प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण पूरा हो चुका था। उस समय भवन के हस्तांतरण से पहले आवश्यक तकनीकी परीक्षण भी किए गए थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से भवन का औपचारिक हस्तांतरण नहीं हो सका।
उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद से पिछले आठ वर्षों से इसकी सेवाएं क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर परिसर से ही संचालित हो रही हैं।
तीसरी एजेंसी बदली, फिर भी फर्नीचर लगाने की तारीख तय नहीं
अस्पताल और प्रशासनिक भवन में फर्नीचर लगाने का काम अभी भी अधूरा है। यह जिम्मेदारी एचपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचपीएसईडीसी) के माध्यम से कराई जानी है। फर्नीचर लगाने के लिए सरकार अब तक तीन बार एजेंसी बदल चुकी है, लेकिन मामला टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाया। नतीजतन डेढ़ वर्ष बाद भी भवन फर्नीचर का इंतजार कर रहा है।
कोट
भवन के हस्तांतरण को लेकर नियमित बैठकें हो रही हैं। फर्नीचर लगाने का कार्य कब शुरू होगा, इस बारे में वरिष्ठ अधिकारी ही स्पष्ट जानकारी दे सकते हैं। अगले सप्ताह फिर बैठक बुलाई गई है, जिसमें मेडिकल कॉलेज भवन में विभिन्न कार्य करने वाले वेंडरों को भी आमंत्रित किया गया है। -डॉ. रमेश भारती, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
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हमीरपुर। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निरीक्षण और जुलाई के पहले सप्ताह में शिफ्टिंग के दावे के बावजूद जोलसप्पड़ स्थित नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक और अस्पताल भवन में स्थानांतरण को लेकर संशय बरकरार है। सबसे बड़ी बाधा भवन में फर्नीचर नहीं लगने की है।
मंगलवार को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), राज्य लोक निर्माण विभाग, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कैंपस में शिफ्टिंग की तैयारियों को लेकर विस्तृत बैठक की, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। अब अगले सप्ताह एक और बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें विभिन्न तकनीकी कार्यों से जुड़े वेंडरों को भी शामिल किया जाएगा।
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बैठक में अधिकारियों की राय रही कि फर्नीचर लगाए बिना भवन में शिफ्टिंग करना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि फर्नीचर लगाने के दौरान ही दरवाजों, खिड़कियों और अन्य संरचनात्मक कमियों की पहचान हो सकेगी। यदि ये खामियां शिफ्टिंग के बाद सामने आईं तो अस्पताल के संचालन में गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं।
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यही कारण रहा कि बैठक का अधिकांश समय इसी मुद्दे पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री पहले ही जुलाई के पहले सप्ताह में मेडिकल कॉलेज को क्षेत्रीय अस्पताल परिसर से नए भवन में स्थानांतरित करने का दावा कर चुके हैं, लेकिन मंगलवार की बैठक के बाद यह लक्ष्य फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अगले सप्ताह मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम (एमजीपीएस), ऑपरेशन थियेटर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े वेंडरों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इन सभी प्रणालियों की अंतिम तकनीकी जांच और परीक्षण के बाद ही भवन को पूर्ण रूप से संचालन के लिए तैयार माना जाएगा।
करीब डेढ़ वर्ष पहले 280 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल और प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण पूरा हो चुका था। उस समय भवन के हस्तांतरण से पहले आवश्यक तकनीकी परीक्षण भी किए गए थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से भवन का औपचारिक हस्तांतरण नहीं हो सका।
उल्लेखनीय है कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद से पिछले आठ वर्षों से इसकी सेवाएं क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर परिसर से ही संचालित हो रही हैं।
तीसरी एजेंसी बदली, फिर भी फर्नीचर लगाने की तारीख तय नहीं
अस्पताल और प्रशासनिक भवन में फर्नीचर लगाने का काम अभी भी अधूरा है। यह जिम्मेदारी एचपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचपीएसईडीसी) के माध्यम से कराई जानी है। फर्नीचर लगाने के लिए सरकार अब तक तीन बार एजेंसी बदल चुकी है, लेकिन मामला टेंडर प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाया। नतीजतन डेढ़ वर्ष बाद भी भवन फर्नीचर का इंतजार कर रहा है।
कोट
भवन के हस्तांतरण को लेकर नियमित बैठकें हो रही हैं। फर्नीचर लगाने का कार्य कब शुरू होगा, इस बारे में वरिष्ठ अधिकारी ही स्पष्ट जानकारी दे सकते हैं। अगले सप्ताह फिर बैठक बुलाई गई है, जिसमें मेडिकल कॉलेज भवन में विभिन्न कार्य करने वाले वेंडरों को भी आमंत्रित किया गया है। -डॉ. रमेश भारती, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर