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हिमाचल: हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ की ग्रांट का दावा फर्जी, एफआईआर दर्ज, विभाग ने बैठाई जांच
Thu, 29 Oct 2026 03:50 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 29 Oct 2026 03:50 PM IST
सार
डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) ने स्पष्ट किया है कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में सर्वेश या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर होने का उल्लेख नहीं है। प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी की आशंका सामने आने के बाद सदर थाना हमीरपुर में एफआईआर दर्ज की गई है।
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सर्वेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के छात्र सर्वेश शर्मा का दावा सवालों के घेरे में आ गया है। डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (डीआईओ) ने स्पष्ट किया है कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में सर्वेश या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर होने का उल्लेख नहीं है। प्रारंभिक जांच में साइबर ठगी की आशंका सामने आने के बाद सदर थाना हमीरपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर संस्थान प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कॉलेज प्रबंधन को 15 अक्तूबर को सेना की ओर से फोन आया था, जिसके बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई। 27 अक्तूबर को सेना के अधिकारियों ने छात्र का रिकॉर्ड मांगा। इसके बाद अधिकारियों ने सर्वेश से भी बातचीत की है।
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Public Clarification‼️ News claiming that a ₹3.5 crore #iDEX grant was sanctioned to Sarvesh Sharma for developing an Army drone has been circulating online for two months. DIO clarifies that the news is FAKE. Please verify information through official sources before sharing. https://t.co/65UUoZm45A
— iDEX DIO (@India_iDEX) October 28, 2026विज्ञापन
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पुलिस ने कॉलेज प्राचार्य की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस कथित ग्रांट मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों, 40 पन्नों के अनुबंध, इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। आशंका है कि फर्जी वेबसाइट और कथित फर्जी अनुबंध के जरिये छात्र को ग्रांट मंजूर होने का भरोसा दिलाया गया। सितंबर में सर्वेश ने ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन परियोजना के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा किया था। इसके बाद उन्हें राज्यपाल सहित कई प्रमुख लोगों ने सम्मानित भी किया था। छात्र ने अपनी कंपनी बनाकर अन्य विद्यार्थियों को भी साथ जोड़ा था और ग्रांट मिलने पर उन्हें वेतन देने की बात कही थी।
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डीआईओ के 28 अक्तूबर के स्पष्टीकरण के बाद इस दावे की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच, सर्वेश बीते बुधवार को हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे की बालकनी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। पीजीआई चंडीगढ़ में उसके जबड़े की सर्जरी की गई है। उसकी टांग में भी कई फ्रैक्चर हैं। पुलिस के अनुसार सर्वेश ने गलती से गिरने की बात कही है, लेकिन कमरे में अंदर से कुंडी लगी होने सहित अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल गिरने के कारण स्पष्ट नहीं हैं। छात्र के कमरे में अंदर से कुंडी लगी होने समेत अन्य पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है। सर्वेश के बयान और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का मिलान किया जा रहा है। गिरने के कारणों का अब तक खुलासा नहीं हुआ है।
मामले की जानकारी मिलते ही कॉलेज प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस को भी शिकायत दी गई है, जिससे मामले की गहन जांच हो सके। - रोहित राठौड़, निदेशक हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग
मामले की जानकारी मिलते ही कॉलेज प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस को भी शिकायत दी गई है, जिससे मामले की गहन जांच हो सके। - रोहित राठौड़, निदेशक हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग
पहले मीडिया रिपोर्टों में ग्रांट मिलने की बात आई थी
सितंबर 2026 में प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। इन खबरों में उनकी परियोजना का नाम ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ बताया गया था। हालांकि, बाद में आईडेक्स और डीआईओ के स्पष्टीकरण ने ग्रांट मंजूर होने के दावे का खंडन कर दिया। इसलिए पहले प्रकाशित खबरों और संस्था की ओर से बाद में दी गई जानकारी के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।
सितंबर 2026 में प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। इन खबरों में उनकी परियोजना का नाम ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ बताया गया था। हालांकि, बाद में आईडेक्स और डीआईओ के स्पष्टीकरण ने ग्रांट मंजूर होने के दावे का खंडन कर दिया। इसलिए पहले प्रकाशित खबरों और संस्था की ओर से बाद में दी गई जानकारी के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।
कम लागत वाले ड्रोन प्रोटोटाइप की भी हुई थी चर्चा
पहले प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में सर्वेश शर्मा के ड्रोन प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लगभग 87 हजार रुपये की लागत से ड्रोन का प्रोटोटाइप तैयार किया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि उनकी टीम ने आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर से जुड़ी ड्रोन प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया था और 10 लाख रुपये का पुरस्कार जीता था। हालांकि, ये विवरण मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और इन्हें 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने के दावे से अलग देखा जाना चाहिए।
पहले प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में सर्वेश शर्मा के ड्रोन प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया गया था। इन रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लगभग 87 हजार रुपये की लागत से ड्रोन का प्रोटोटाइप तैयार किया था। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि उनकी टीम ने आईआईटी जोधपुर और कोणार्क कोर से जुड़ी ड्रोन प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया था और 10 लाख रुपये का पुरस्कार जीता था। हालांकि, ये विवरण मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और इन्हें 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने के दावे से अलग देखा जाना चाहिए।
ग्रांट को लेकर फैली खबर पर क्यों जरूरी है स्पष्टीकरण?
किसी छात्र या परियोजना को सरकारी अथवा संस्थागत आर्थिक सहायता मिलने की खबर महत्वपूर्ण होती है। ऐसी जानकारी प्रकाशित या साझा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
सर्वेश शर्मा के मामले में आईडेक्स डीआईओ के स्पष्टीकरण के अनुसार, 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने का दावा फर्जी है। इसलिए इस राशि को छात्र को मिली स्वीकृत आर्थिक सहायता के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
किसी छात्र या परियोजना को सरकारी अथवा संस्थागत आर्थिक सहायता मिलने की खबर महत्वपूर्ण होती है। ऐसी जानकारी प्रकाशित या साझा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
सर्वेश शर्मा के मामले में आईडेक्स डीआईओ के स्पष्टीकरण के अनुसार, 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने का दावा फर्जी है। इसलिए इस राशि को छात्र को मिली स्वीकृत आर्थिक सहायता के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।