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Hamirpur (Himachal) News: तीन साल बाद ताल फार्म की 20 क्विंटल ऊन बिकने की जगी उम्मीद
Mon, 26 Oct 2026 01:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:47 AM IST
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हमीरपुर। सरकारी भेड़ फार्म ताल में पिछले तीन वर्षों से खरीदार की राह देख रही करीब 20 क्विंटल ऊन के बिकने की उम्मीद जगी है। पशुपालन विभाग ने ऊन की बिक्री के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
विभाग अब तक तीन संभावित खरीदारों से संपर्क कर बातचीत कर चुका है। इसके बाद बिक्री के लिए विज्ञापन जारी करने की योजना है। इससे वर्ष 2023 से फार्म में जमा ऊन के स्टॉक की बिक्री का रास्ता खुलने की संभावना बढ़ गई है।
भेड़ों से ऊन उतारने और उसका भंडारण करने के बाद भी खरीदार नहीं मिलने से यह स्टॉक पिछले तीन वर्षों से फार्म में जमा है। ऊन की बिक्री में सबसे बड़ी अड़चन खरीद मूल्य को लेकर सहमति न बनना रही है।
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पशुपालन विभाग और हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के बीच कीमत पर सहमति नहीं बनने के कारण खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। नतीजतन, वर्ष 2023 से ऊन फार्म में ही रखी हुई है।
लंबे भंडारण से गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा
फिलहाल जमा ऊन को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित किया गया है, ताकि भंडारण के दौरान उसे नुकसान से बचाया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार ऊन को लंबे समय तक गोदाम में रखने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री में देरी से न केवल स्टॉक जमा रहने की समस्या बढ़ रही है, बल्कि भविष्य में ऊन की गुणवत्ता और उसके आर्थिक मूल्य पर भी असर पड़ सकता है।
कोट
ऊन की जल्द बिक्री हो, इसके लिए पशुपालन विभाग प्रयास कर रहा है। उम्मीद है कि इसमें जल्द सफलता मिलेगी। -डॉ. सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर
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विभाग अब तक तीन संभावित खरीदारों से संपर्क कर बातचीत कर चुका है। इसके बाद बिक्री के लिए विज्ञापन जारी करने की योजना है। इससे वर्ष 2023 से फार्म में जमा ऊन के स्टॉक की बिक्री का रास्ता खुलने की संभावना बढ़ गई है।
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भेड़ों से ऊन उतारने और उसका भंडारण करने के बाद भी खरीदार नहीं मिलने से यह स्टॉक पिछले तीन वर्षों से फार्म में जमा है। ऊन की बिक्री में सबसे बड़ी अड़चन खरीद मूल्य को लेकर सहमति न बनना रही है।
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पशुपालन विभाग और हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के बीच कीमत पर सहमति नहीं बनने के कारण खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। नतीजतन, वर्ष 2023 से ऊन फार्म में ही रखी हुई है।
लंबे भंडारण से गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा
फिलहाल जमा ऊन को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित किया गया है, ताकि भंडारण के दौरान उसे नुकसान से बचाया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार ऊन को लंबे समय तक गोदाम में रखने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री में देरी से न केवल स्टॉक जमा रहने की समस्या बढ़ रही है, बल्कि भविष्य में ऊन की गुणवत्ता और उसके आर्थिक मूल्य पर भी असर पड़ सकता है।
कोट
ऊन की जल्द बिक्री हो, इसके लिए पशुपालन विभाग प्रयास कर रहा है। उम्मीद है कि इसमें जल्द सफलता मिलेगी। -डॉ. सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर