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Hamirpur (Himachal) News: हमीरपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा इंतजाम अधूरे, पीजी संचालन को बायलॉज ही नहीं बने
Fri, 31 Jul 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:39 AM IST
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हमीरपुर। लखनऊ के कोचिंग सेंटर हादसे ने देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, लेकिन एजुकेशन हब कहे जाने वाले हमीरपुर में इसका कोई बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है। शहर में संचालित अधिकांश कोचिंग सेंटर आज भी सुरक्षा मानकों से दूर हैं।
वहीं, विद्यार्थियों से भरे रहने वाले पीजी (पेइंग गेस्ट) आवासों के संचालन के लिए नगर निगम अब तक बायलॉज तैयार नहीं कर पाया है। ऐसे में हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे बनी हुई है।
शहर में पहले 22 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। इनमें से चार बंद हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 18 सेंटर चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोचिंग संचालकों को अग्निशमन यंत्र लगाने, भवन सुरक्षा सुनिश्चित करने और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
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निर्देशों के एक माह बाद भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। अब तक केवल दो कोचिंग सेंटर ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर पाए हैं। अधिकांश संचालकों ने व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा है, जिसे प्रशासन ने अंतिम अवसर के रूप में स्वीकार किया है।
दूसरी ओर, शहर में विद्यार्थियों के लिए बड़ी संख्या में पीजी संचालित हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के पास यह तक रिकॉर्ड नहीं है कि कुल कितने पीजी संचालित हैं। हैरानी की बात यह है कि करीब दो वर्षों से निगम पीजी संचालन के लिए बायलॉज बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
नियमों के अभाव में पीजी संचालकों पर प्रभावी निगरानी भी नहीं हो पा रही है। स्थिति इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि 26 अगस्त 2024 को हमीरपुर में एक छात्र की पीजी की दूसरी मंजिल से गिरने के कारण मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं की गई।
शहर के कई पीजी तंग गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जहां आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है। कई भवनों में आग लगने जैसी स्थिति से निपटने के लिए दूसरा निकासी मार्ग तक नहीं है।
सीढ़ियां भी इतनी संकरी हैं कि एक समय में केवल एक ही व्यक्ति चढ़ या उतर सकता है। अधिकांश स्थानों पर अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगाए गए हैं।
प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अधिकारी समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी।
कोट
कोचिंग सेंटर संचालकों ने एक माह का समय मांगा है। यदि तय अवधि में सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -संजीत सिंह, एसडीएम, हमीरपुर
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वहीं, विद्यार्थियों से भरे रहने वाले पीजी (पेइंग गेस्ट) आवासों के संचालन के लिए नगर निगम अब तक बायलॉज तैयार नहीं कर पाया है। ऐसे में हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे बनी हुई है।
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शहर में पहले 22 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। इनमें से चार बंद हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 18 सेंटर चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से कोचिंग संचालकों को अग्निशमन यंत्र लगाने, भवन सुरक्षा सुनिश्चित करने और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
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निर्देशों के एक माह बाद भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है। अब तक केवल दो कोचिंग सेंटर ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर पाए हैं। अधिकांश संचालकों ने व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा है, जिसे प्रशासन ने अंतिम अवसर के रूप में स्वीकार किया है।
दूसरी ओर, शहर में विद्यार्थियों के लिए बड़ी संख्या में पीजी संचालित हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के पास यह तक रिकॉर्ड नहीं है कि कुल कितने पीजी संचालित हैं। हैरानी की बात यह है कि करीब दो वर्षों से निगम पीजी संचालन के लिए बायलॉज बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
नियमों के अभाव में पीजी संचालकों पर प्रभावी निगरानी भी नहीं हो पा रही है। स्थिति इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि 26 अगस्त 2024 को हमीरपुर में एक छात्र की पीजी की दूसरी मंजिल से गिरने के कारण मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं की गई।
शहर के कई पीजी तंग गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जहां आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है। कई भवनों में आग लगने जैसी स्थिति से निपटने के लिए दूसरा निकासी मार्ग तक नहीं है।
सीढ़ियां भी इतनी संकरी हैं कि एक समय में केवल एक ही व्यक्ति चढ़ या उतर सकता है। अधिकांश स्थानों पर अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगाए गए हैं।
प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या अधिकारी समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी।
कोट
कोचिंग सेंटर संचालकों ने एक माह का समय मांगा है। यदि तय अवधि में सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -संजीत सिंह, एसडीएम, हमीरपुर