{"_id":"6a6515aa308532141501359a","slug":"inspired-by-his-fathers-sacrifice-the-son-took-up-the-mantle-of-serving-the-nation-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1026-202263-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: पिता के बलिदान से मिली प्रेरणा, बेटे ने संभाली देश सेवा की कमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: पिता के बलिदान से मिली प्रेरणा, बेटे ने संभाली देश सेवा की कमान
Sun, 26 Jul 2026 01:29 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:29 AM IST
विज्ञापन
रजनीश चंदेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टौणी देवी (हमीरपुर)। परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही देश सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कारगिल युद्ध के बलिदानी सैनिक स्वामी दास के बेटे ने भी भारतीय सेना की वर्दी पहन ली है।
दादा कांशी राम और ताया राम प्रकाश चंदेल के बाद पिता की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए लांस नायक रजनीश चंदेल वर्तमान में भारतीय सेना की 12 ग्रेनेडियर बटालियन में देश सेवा कर रहे हैं।
रजनीश चंदेल ने बताया कि जब उनके पिता स्वामी दास कारगिल युद्ध में बलिदान हुए थे, तब उनकी उम्र केवल आठ वर्ष थी। उस समय उन्हें हालात की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन बड़े होने के बाद लोगों से पिता की वीरता और साहस की कहानियां सुनकर उनके मन में भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का संकल्प जागा।
विज्ञापन
श्रीनगर में तैनात रजनीश का कहना है कि भारतीय सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि पिता के अधूरे सपनों और परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब पहली बार सेना की वर्दी पहनी तो ऐसा महसूस हुआ, जैसे पिता का आशीर्वाद उनके साथ है।
उन्होंने बताया कि आज भी हर वर्ष उनके बलिदानी पिता की बटालियन के अधिकारी उनके घर पहुंचकर परिवार का हालचाल पूछते हैं और पिता की बहादुरी, अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा से जुड़े प्रसंग साझा करते हैं। यह क्षण परिवार के लिए भावुक होने के साथ गर्व का भी होता है।
रजनीश का कहना है कि पिता का बलिदान उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनके अनुसार देश की रक्षा करना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सम्मान है। तीन पीढ़ियों से भारतीय सेना की सेवा की परंपरा आज भी उसी समर्पण और देशभक्ति के साथ आगे बढ़ रही है।
विज्ञापन
दादा कांशी राम और ताया राम प्रकाश चंदेल के बाद पिता की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए लांस नायक रजनीश चंदेल वर्तमान में भारतीय सेना की 12 ग्रेनेडियर बटालियन में देश सेवा कर रहे हैं।
विज्ञापन
रजनीश चंदेल ने बताया कि जब उनके पिता स्वामी दास कारगिल युद्ध में बलिदान हुए थे, तब उनकी उम्र केवल आठ वर्ष थी। उस समय उन्हें हालात की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन बड़े होने के बाद लोगों से पिता की वीरता और साहस की कहानियां सुनकर उनके मन में भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का संकल्प जागा।
विज्ञापन
श्रीनगर में तैनात रजनीश का कहना है कि भारतीय सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि पिता के अधूरे सपनों और परिवार की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब पहली बार सेना की वर्दी पहनी तो ऐसा महसूस हुआ, जैसे पिता का आशीर्वाद उनके साथ है।
उन्होंने बताया कि आज भी हर वर्ष उनके बलिदानी पिता की बटालियन के अधिकारी उनके घर पहुंचकर परिवार का हालचाल पूछते हैं और पिता की बहादुरी, अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा से जुड़े प्रसंग साझा करते हैं। यह क्षण परिवार के लिए भावुक होने के साथ गर्व का भी होता है।
रजनीश का कहना है कि पिता का बलिदान उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा है। उनके अनुसार देश की रक्षा करना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सम्मान है। तीन पीढ़ियों से भारतीय सेना की सेवा की परंपरा आज भी उसी समर्पण और देशभक्ति के साथ आगे बढ़ रही है।