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Hamirpur (Himachal) News: कारगिल के वीरों को सम्मान का इंतजार, 27 साल बाद भी नहीं बने स्मृति द्वार
Sun, 26 Jul 2026 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 26 Jul 2026 01:27 AM IST
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हमीरपुर। कारगिल युद्ध में बलिदान देने वाले हमीरपुर जिले के वीर सपूतों की स्मृति में आज तक प्रवेश द्वारों का निर्माण नहीं हो पाया है। 27 वर्ष बीत जाने के बाद भी बलिदानियों के परिजन सम्मान स्वरूप प्रवेश द्वार बनने का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार की अन्य घोषणाएं भले ही पूरी हो गई हों, लेकिन इस मांग के अधूरा रहने से परिजनों का दर्द आज भी छलक उठता है। कारगिल युद्ध के दौरान हमीरपुर जिले के आठ जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
अंदराल गांव के 3 पंजाब रेजिमेंट के वीर बलिदानी दिनेश कुमार की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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बलिदानी दिनेश कुमार के पिता भूप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च पर बेटे की प्रतिमा स्थापित करवाई है। उनकी इच्छा है कि गांव में दिनेश कुमार की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाया जाए, लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी।
इसी तरह 28 राष्ट्रीय राइफल्स (20 जैक राइफल) के वीर बलिदानी सुनील कुमार की स्मृति में अमरोह चौक पर प्रवेश द्वार बनाने की भी घोषणा हुई थी। इस संबंध में स्थानीय विधायक कैप्टन रंजीत सिंह से भी मुलाकात की गई, लेकिन बजट के अभाव में निर्माण शुरू नहीं हो सका।
बलिदानी सुनील कुमार के भाई मेहर चंद ने बताया कि 25 जुलाई को सुनील कुमार को अपने बुआ के बेटे की शादी में घर आना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 20 जुलाई को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ घर पहुंचा।
बलिदानियों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि कारगिल के वीर बलिदानियों की स्मृति में प्रस्तावित प्रवेश द्वारों का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि उनके सर्वोच्च बलिदान को स्थायी सम्मान मिल सके।
कोट
कारगिल युद्ध के दौरान सुजानपुर क्षेत्र से पांच सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी स्मृति में प्रवेश द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, अन्य प्रस्तावित प्रवेश द्वारों का भी निर्माण कराया जाएगा। इसमें कुछ समय लगेगा। -कैप्टन रंजीत सिंह, विधायक सुजानपुर
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सरकार की अन्य घोषणाएं भले ही पूरी हो गई हों, लेकिन इस मांग के अधूरा रहने से परिजनों का दर्द आज भी छलक उठता है। कारगिल युद्ध के दौरान हमीरपुर जिले के आठ जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
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अंदराल गांव के 3 पंजाब रेजिमेंट के वीर बलिदानी दिनेश कुमार की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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बलिदानी दिनेश कुमार के पिता भूप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च पर बेटे की प्रतिमा स्थापित करवाई है। उनकी इच्छा है कि गांव में दिनेश कुमार की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाया जाए, लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी।
इसी तरह 28 राष्ट्रीय राइफल्स (20 जैक राइफल) के वीर बलिदानी सुनील कुमार की स्मृति में अमरोह चौक पर प्रवेश द्वार बनाने की भी घोषणा हुई थी। इस संबंध में स्थानीय विधायक कैप्टन रंजीत सिंह से भी मुलाकात की गई, लेकिन बजट के अभाव में निर्माण शुरू नहीं हो सका।
बलिदानी सुनील कुमार के भाई मेहर चंद ने बताया कि 25 जुलाई को सुनील कुमार को अपने बुआ के बेटे की शादी में घर आना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 20 जुलाई को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ घर पहुंचा।
बलिदानियों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि कारगिल के वीर बलिदानियों की स्मृति में प्रस्तावित प्रवेश द्वारों का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि उनके सर्वोच्च बलिदान को स्थायी सम्मान मिल सके।
कोट
कारगिल युद्ध के दौरान सुजानपुर क्षेत्र से पांच सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी स्मृति में प्रवेश द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, अन्य प्रस्तावित प्रवेश द्वारों का भी निर्माण कराया जाएगा। इसमें कुछ समय लगेगा। -कैप्टन रंजीत सिंह, विधायक सुजानपुर