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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Mountains of wool pile up at sheep farms; efforts to agree on purchase prices fall short.

Hamirpur (Himachal) News: भेड़ फार्मों में ऊन का पहाड़, खरीद मूल्य पर सहमति के प्रयास बौने

Wed, 29 Jul 2026 01:43 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Wed, 29 Jul 2026 01:43 AM IST
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खरीद मूल्य पर एक मत नहीं हो सके पशुपालन विभाग और फेडरेशन
सरकारी फार्मों में तीन साल से ऊन की खरीद ठप, गुणवत्ता बिगड़ने का खतरा
नवीन ठाकुर
हमीरपुर। प्रदेश के सरकारी भेड़ फार्मों में तैयार होने वाली ऊन पिछले तीन वर्षों से खरीदार का इंतजार कर रही है। हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति किसी निजी एजेंसी के कारण नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार के दो उपक्रमों पशुपालन विभाग और हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के बीच खरीद मूल्य पर सहमति नहीं बनने से पैदा हुई है।
वर्ष 2023 से चंबा, हमीरपुर, मंडी, शिमला और किन्नौर के सरकारी भेड़ फार्मों में ऊन का भारी स्टॉक जमा हो गया है। फार्मों में हर साल भेड़ों की ऊन की कटाई नियमित रूप से होती रही, लेकिन खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
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वर्तमान में पशुपालन विभाग की ओर से ऊन का मूल्य 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है, जबकि वूल फेडरेशन इससे कम कीमत पर खरीद करना चाहता है। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
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इस गतिरोध का सीधा असर सरकारी भेड़ फार्मों पर पड़ रहा है। हमीरपुर के ताल स्थित सरकारी भेड़ फार्म में ही करीब 20 क्विंटल ऊन का स्टॉक जमा है। इसके अलावा चंबा, मंडी, शिमला और किन्नौर के कुल पांच फार्मों में भी बड़ी मात्रा में ऊन गोदामों में रखी गई है।
फिलहाल ऊन को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भंडारण से इसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। यदि जल्द खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो विभाग को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ वर्षों से जमा स्टॉक के निस्तारण की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
एक ओर सरकार ऊन उत्पादन और भेड़ पालन को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके अपने ही दो उपक्रम खरीद मूल्य को लेकर सहमति नहीं बना पा रहे हैं। ऐसे में सरकारी फार्मों में तैयार ऊन गोदामों तक ही सीमित होकर रह गई है।

समय पर खरीद से बनी रहती है गुणवत्ता
विशेषज्ञों के अनुसार ऊन की समय पर खरीद और प्रसंस्करण उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। लंबे समय तक भंडारण से रेशों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। समय पर खरीदी गई ऊन मशीनों में आसानी से प्रसंस्कृत होती है और उससे तैयार उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। इसलिए ऊन की खरीद में देरी आर्थिक नुकसान के साथ गुणवत्ता पर भी असर डालती है।


कोट

मामला हमारे संज्ञान में है। सरकार को पत्र लिखकर खरीद मूल्य और गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक निर्णय होगा, ताकि ऊन की खरीद प्रक्रिया शुरू की जा सके। -दीपक सैनी, ईओ, हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन
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