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Hamirpur (Himachal) News: सिलाई-बुनाई से बदली किस्मत, अब दूसरों को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 04 May 2026 12:39 AM IST
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संगरोह गांव की कल्पना ठाकुर सिलाई करते हुए। संवाद
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अवाहदेवी (हमीरपुर)। संगरोह गांव की कल्पना ठाकुर ने सिलाई-बुनाई के हुनर को अपनाकर न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया। अब वह गांव की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
शिमला जिले के चिड़गांव क्षेत्र के डिस्वाणी गांव की कल्पना ठाकुर ने जमा दो तक शिक्षा प्राप्त की है। वर्ष 2003 में उनका विवाह हमीरपुर जिले के संगरोह गांव में सुरेंद्र ठाकुर के साथ हुआ। उनके पति ट्रक चालक हैं, जिनकी आय से परिवार का खर्च चलता था, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था।
परिवार की स्थिति सुधारने के लिए कल्पना ने पहले मनरेगा के तहत मजदूरी शुरू की। साथ ही उन्होंने खाली समय में सिलाई केंद्र से महिलाओं के कपड़े सिलने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वे सरकार की स्वयं सहायता समूह योजना से जुड़ीं और स्वेटर सहित अन्य ऊनी वस्त्रों की बुनाई का कार्य भी सीखा।
आज कल्पना ठाकुर कपड़ों की सिलाई के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने अपने बेटे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी करवाई है, जिससे परिवार को बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हुआ है।
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परिवार की स्थिति सुधारने के लिए कल्पना ने पहले मनरेगा के तहत मजदूरी शुरू की। साथ ही उन्होंने खाली समय में सिलाई केंद्र से महिलाओं के कपड़े सिलने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वे सरकार की स्वयं सहायता समूह योजना से जुड़ीं और स्वेटर सहित अन्य ऊनी वस्त्रों की बुनाई का कार्य भी सीखा।
आज कल्पना ठाकुर कपड़ों की सिलाई के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी सिलाई-बुनाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने अपने बेटे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी करवाई है, जिससे परिवार को बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हुआ है।
