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Hamirpur (Himachal) News: मुआवजा पर पेच, खतरे में जिंदगी... 40 दिन से जर्जर मकान में रहने को मजबूर परिवार
Fri, 26 Jun 2026 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 26 Jun 2026 12:35 AM IST
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चिल्ड्रन पार्क हमीरपुर से पक्का भरो चौक तक आयोजित मिनी मैराथन में दौड़ लगाते धावक। स्रोत जागरूक
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हमीरपुर। शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत मसयाणा चौक पर कोहली बाईपास निर्माण के चलते एक मकान जर्जर हो गया है, जिसमें एक परिवार पिछले 40 दिनों से रहने को मजबूर है। मकान को सुरक्षित करने के लिए लगाया जा रहा डंगा 15 मई को गिर गया था।
प्रभावित परिवार का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जब तक मुआवजा नहीं मिलता या सुरक्षा का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, वे घर छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं। मसयाणा चौक पर कोहली बाईपास निर्माण के तहत व्हीकल ओवरपास (वीओपी) का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए करीब 20 मीटर गहरी कटिंग (खोदाई) की गई है।
इस कटिंग की जद में लोक निर्माण विभाग की सड़क भी आ गई है, जो प्रभावित मकान से सटी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार मकान को बचाने के लिए लगाया डंगा भी मई में बिना बारिश के ही ढह गया था। वहीं, प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर मकान को असुरक्षित घोषित कर दिया है।
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प्रभावित पुष्पा पटियाल और सिद्धार्थ पटियाल का कहना है कि निर्धारित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से बाहर जाकर कटिंग की गई है, जिससे सड़क धंस गई और मकान में जगह-जगह दरारें आ गई हैं। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन पहले ही किया जा चुका है और मुआवजे की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन राशि एनएचएआई की ओर से जारी नहीं की जा रही है।
परिवार का कहना है कि प्रशासन ने मकान को असुरक्षित घोषित कर दिया है, फिर भी उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि वे घर खाली करने के बाद कहां जाएंगे। उन्होंने मांग की है कि या तो तुरंत मुआवजा दिया जाए या लिखित रूप से सुरक्षा का आश्वासन दिया जाए।
एक्ट ऑफ गॉड का बहाना बनाने की तैयारी, एनएचएआई पर अनदेखी का आरोप
प्रभावित परिवार का आरोप है कि बरसात सिर पर है और मकान की नींव तक प्रभावित हो चुकी है। घर के भीतर तक दरारें पहुंच चुकी हैं, लेकिन मई के बाद एनएचएआई का कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी कई बार मौके का निरीक्षण कर चुके हैं और मकान को असुरक्षित भी घोषित कर चुके हैं, इसके बावजूद एनएचएआई की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। उनका आरोप है कि भविष्य में नुकसान होने पर इसे एक्ट ऑफ गॉड बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा सकती है।
कोट
घर को गंभीर खतरा बना हुआ है। दोनों पक्षों से बात की जा रही है। यहां निर्माण को आगे बढ़ाने से मकान को खतरा हो सकता है। ऐसे में मकान खाली करवाने से पहले परिवार का पक्ष सुनना जरूरी है। -संजीत सिंह, एसडीएम, हमीरपुर
मकान को खाली करवाने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा गया है। फिलहाल मकान को कोई तत्काल खतरा नहीं है। यदि भविष्य में मकान को नुकसान होता है अथवा गिरने की आशंका बनती है, तो प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। -भूपिंदर सिंह, तकनीकी प्रबंधक, एनएचएआई हमीरपुर
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प्रभावित परिवार का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जब तक मुआवजा नहीं मिलता या सुरक्षा का लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, वे घर छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं। मसयाणा चौक पर कोहली बाईपास निर्माण के तहत व्हीकल ओवरपास (वीओपी) का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए करीब 20 मीटर गहरी कटिंग (खोदाई) की गई है।
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इस कटिंग की जद में लोक निर्माण विभाग की सड़क भी आ गई है, जो प्रभावित मकान से सटी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार मकान को बचाने के लिए लगाया डंगा भी मई में बिना बारिश के ही ढह गया था। वहीं, प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर मकान को असुरक्षित घोषित कर दिया है।
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प्रभावित पुष्पा पटियाल और सिद्धार्थ पटियाल का कहना है कि निर्धारित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) से बाहर जाकर कटिंग की गई है, जिससे सड़क धंस गई और मकान में जगह-जगह दरारें आ गई हैं। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन पहले ही किया जा चुका है और मुआवजे की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन राशि एनएचएआई की ओर से जारी नहीं की जा रही है।
परिवार का कहना है कि प्रशासन ने मकान को असुरक्षित घोषित कर दिया है, फिर भी उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि वे घर खाली करने के बाद कहां जाएंगे। उन्होंने मांग की है कि या तो तुरंत मुआवजा दिया जाए या लिखित रूप से सुरक्षा का आश्वासन दिया जाए।
एक्ट ऑफ गॉड का बहाना बनाने की तैयारी, एनएचएआई पर अनदेखी का आरोप
प्रभावित परिवार का आरोप है कि बरसात सिर पर है और मकान की नींव तक प्रभावित हो चुकी है। घर के भीतर तक दरारें पहुंच चुकी हैं, लेकिन मई के बाद एनएचएआई का कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी कई बार मौके का निरीक्षण कर चुके हैं और मकान को असुरक्षित भी घोषित कर चुके हैं, इसके बावजूद एनएचएआई की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। उनका आरोप है कि भविष्य में नुकसान होने पर इसे एक्ट ऑफ गॉड बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा सकती है।
कोट
घर को गंभीर खतरा बना हुआ है। दोनों पक्षों से बात की जा रही है। यहां निर्माण को आगे बढ़ाने से मकान को खतरा हो सकता है। ऐसे में मकान खाली करवाने से पहले परिवार का पक्ष सुनना जरूरी है। -संजीत सिंह, एसडीएम, हमीरपुर
मकान को खाली करवाने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा गया है। फिलहाल मकान को कोई तत्काल खतरा नहीं है। यदि भविष्य में मकान को नुकसान होता है अथवा गिरने की आशंका बनती है, तो प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। -भूपिंदर सिंह, तकनीकी प्रबंधक, एनएचएआई हमीरपुर

चिल्ड्रन पार्क हमीरपुर से पक्का भरो चौक तक आयोजित मिनी मैराथन में दौड़ लगाते धावक। स्रोत जागरूक

चिल्ड्रन पार्क हमीरपुर से पक्का भरो चौक तक आयोजित मिनी मैराथन में दौड़ लगाते धावक। स्रोत जागरूक