{"_id":"696006d012cf9164b00dc15b","slug":"tanks-are-cleaned-twice-a-year-inspections-are-only-on-paper-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1005-179518-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: साल में दो बार टैंकों की सफाई, महज कागजों में निरीक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: साल में दो बार टैंकों की सफाई, महज कागजों में निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:04 AM IST
विज्ञापन
जल शक्ति विभाग की ओर से मालियां में बनाया ओवर हेड टैंक। संवाद
विज्ञापन
हमीरपुर। जिले में पेयजल शुद्धता को लेकर जल शक्ति विभाग के प्रयास प्री और पोस्ट मानसून के सफाई अभियान तक ही सिमटे हुए हैं। इस अभियान के तहत भी इन टैंकों में सफाई हुई है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
स्वच्छता की गारंटी इसलिए सवालों में है, क्योंकि सफाई के बाद टैंकों पर तिथि अंकित किए जाने के नियम का अधिकतर जगह पालन धरातल पर नहीं हो रहा है। वहीं, कोई ऐसी पारदर्शी व्यवस्था भी नहीं, जिससे लोग अथवा उपभोक्ता यह पता कर सकें कि इन टैंकों की सफाई हुई है अथवा नहीं।
जिले में पेयजल टैंकों से लाखों लोगों को पीने का पानी मिलता है, लेकिन इन टैंकों की सफाई में लापरवाही देखने को मिल रही है। जल शक्ति विभाग साल में दो बार पानी के टैंकों की सफाई कर इतिश्री कर रहा है। विभाग की ओर से मानसून से पहले और मानसून के बाद पानी के टैंकों की सफाई की जाती है। वहीं, पानी के कई टैंकों में न तो सफाई की तिथि अंकित है और न ही इसकी नियमित निगरानी का कोई ठोस प्रबंध है।
पानी की गुणवत्ता की जांच भी व्यापक रूप से नहीं होती है। हमीरपुर जिले में करीब 1204 पानी के टैंक हैं। इनमें से 919 अंडरग्राउंड और 285 ओवर हैडटैंक हैं। विभिन्न क्षमता वाले पेयजल टैंकों से रोजाना लाखों लीटर पानी लोगों तक पहुंचता है। वहीं, जल शक्ति विभाग इन टैंकों की सफाई साल में दो बार ही करता है।
अकसर डायरिया फैलने पर पानी की टेस्टिंग
पानी की शुद्धता जांचने को जिले में लैब भी है और इसमें टेस्टिंग भी होती है, लेकिन टेस्टिंग को लेकर कोई ठोस नियम नहीं है। हर माह अथवा साल में कितनी बार टैंकों का पानी टेस्ट किया जाएगा। वहीं, कई टैंकों में यह तिथि मिट गई होती है। इस कारण आम जनमानस को पता ही नहीं चल पाता है कि जिस टैंक का पानी वह प्रयोग कर रहे हैं, उसकी सफाई कब हुई है। जल शक्ति विभाग का दावा है कि हर महीने पानी के सैंपल जांच को भेजे जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका ठोस परिणाम नहीं है कि पानी के सैंपल कब-कब लिए गए हैं और इनका परिणाम क्या निकला है। हालांकि लोग जब जलजनित रोग से पीड़ित होते हैं, तब विभाग पानी के सैंपल लेने में तेजी दिखाता है। इसका सीधा असर पानी की गुणवत्ता और लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
साल में दो बार पेयजल स्टोरेज टैंकों की प्री और पोस्ट मानसून में सफाई की जाती है। इसके अलावा पानी की टेस्टिंग भी रेंडम की जाती है। हर माह सफाई का नियम नहीं है। सफाई के बाद टैंक पर सफाई की तिथि अंकित करना अनिवार्य है।
-नीरज भोगल, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति वृत्त हमीरपुर
Trending Videos
स्वच्छता की गारंटी इसलिए सवालों में है, क्योंकि सफाई के बाद टैंकों पर तिथि अंकित किए जाने के नियम का अधिकतर जगह पालन धरातल पर नहीं हो रहा है। वहीं, कोई ऐसी पारदर्शी व्यवस्था भी नहीं, जिससे लोग अथवा उपभोक्ता यह पता कर सकें कि इन टैंकों की सफाई हुई है अथवा नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में पेयजल टैंकों से लाखों लोगों को पीने का पानी मिलता है, लेकिन इन टैंकों की सफाई में लापरवाही देखने को मिल रही है। जल शक्ति विभाग साल में दो बार पानी के टैंकों की सफाई कर इतिश्री कर रहा है। विभाग की ओर से मानसून से पहले और मानसून के बाद पानी के टैंकों की सफाई की जाती है। वहीं, पानी के कई टैंकों में न तो सफाई की तिथि अंकित है और न ही इसकी नियमित निगरानी का कोई ठोस प्रबंध है।
पानी की गुणवत्ता की जांच भी व्यापक रूप से नहीं होती है। हमीरपुर जिले में करीब 1204 पानी के टैंक हैं। इनमें से 919 अंडरग्राउंड और 285 ओवर हैडटैंक हैं। विभिन्न क्षमता वाले पेयजल टैंकों से रोजाना लाखों लीटर पानी लोगों तक पहुंचता है। वहीं, जल शक्ति विभाग इन टैंकों की सफाई साल में दो बार ही करता है।
अकसर डायरिया फैलने पर पानी की टेस्टिंग
पानी की शुद्धता जांचने को जिले में लैब भी है और इसमें टेस्टिंग भी होती है, लेकिन टेस्टिंग को लेकर कोई ठोस नियम नहीं है। हर माह अथवा साल में कितनी बार टैंकों का पानी टेस्ट किया जाएगा। वहीं, कई टैंकों में यह तिथि मिट गई होती है। इस कारण आम जनमानस को पता ही नहीं चल पाता है कि जिस टैंक का पानी वह प्रयोग कर रहे हैं, उसकी सफाई कब हुई है। जल शक्ति विभाग का दावा है कि हर महीने पानी के सैंपल जांच को भेजे जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका ठोस परिणाम नहीं है कि पानी के सैंपल कब-कब लिए गए हैं और इनका परिणाम क्या निकला है। हालांकि लोग जब जलजनित रोग से पीड़ित होते हैं, तब विभाग पानी के सैंपल लेने में तेजी दिखाता है। इसका सीधा असर पानी की गुणवत्ता और लोगों की सेहत पर पड़ सकता है।
साल में दो बार पेयजल स्टोरेज टैंकों की प्री और पोस्ट मानसून में सफाई की जाती है। इसके अलावा पानी की टेस्टिंग भी रेंडम की जाती है। हर माह सफाई का नियम नहीं है। सफाई के बाद टैंक पर सफाई की तिथि अंकित करना अनिवार्य है।
-नीरज भोगल, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति वृत्त हमीरपुर