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Himachal: बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और तस्करी पर हाईकोर्ट सख्त, डीएफओ से मांगा हलफनामा

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 26 Jun 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने ऊना जिले के गगरेट तहसील में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और लकड़ी तस्करी के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। 

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High Court takes a tough stance on large scale deforestation and smuggling; seeks affidavit from DFO.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऊना जिले के गगरेट तहसील में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और लकड़ी तस्करी के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए ऊना के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) को अगली सुनवाई तक पूरा ब्योरा देते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। खंडपीठ ने जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण ऊना के सचिव को निर्देश दिया है कि वह गगरेट चेक पोस्ट का समय-समय पर औचक निरीक्षण करें और अपनी स्वतंत्र स्टेटस रिपोर्ट सीधे कोर्ट को सौंपें। 

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इसके साथ ही अदालत ने खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की खबर को भी रिकॉर्ड पर लिया है। इसी क्षेत्र में पहले हुई कटाई से जुड़ी एक पुरानी जनहित याचिका को भी अब इस नए मामले के साथ जोड़ दिया गया है। इन सभी मामलों की अगली सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी। अदालत को 8 मार्च 2026 को एक शिकायत पत्र मिला था, जिसमें जीपीएस-टैग्ड तस्वीरों के साथ यह दिखाया गया था कि छोटे और बड़े ट्रकों में भरकर हिमाचल के जंगलों से पेड़ काटे और ले जाए जा रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वन विभाग के स्तर पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट, वीडियो बनाने और शिकायत करने वाले लोगों को ही डराया-धमकाया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी गई।

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प्रशासन ने अदालत को बताया कि एक मोबाइल नंबर के उपयोगकर्ता और इंस्टाग्राम चैनल के एडमिनिस्ट्रेटर रोहित कटवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि हिमाचल-पंजाब सीमा पर एनएच-03 पर स्थित गगरेट वन चेक पोस्ट राज्य से वन उपज के परिवहन का मुख्य जरिया है। तस्वीरों में दिखाई दे रहे वैध वाहन सफेदा, चिनार, बांस, जापानी शहतूत जैसी स्वीकृत प्रजातियों की लकड़ी होशियारपुर की टिंबर मार्केट में ले जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार 69 वाहनों की कड़ाई से जांच की गई और उन्हें वैध पाया गया। हालांकि, रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि अवैध परिवहन में कुल 149 वाहन शामिल हैं। अकेले अंब रेंज में 102 वाहन अनधिकृत वन उपज ले जा रहे हैं, जबकि डेरा वन प्रभाग के कर्मचारियों ने अपने क्षेत्र में 15 अवैध वाहन को पकड़ा है।

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गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्लास्टिक फ्री इंडिया अभियान, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 एवं पर्यावरणीय कानूनों के कथित उल्लंघन से जुड़े 75 करोड़ गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर को लेकर दायर जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार, आबकारी विभाग, एवं अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। हाईकोर्ट में पर्यावरण संरक्षण एवं भारत के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा को लेकर देहरादून निवासी अभिनव थापर की ओर से यह जनहित याचिका याचिका दायर की गई है।

जनहित याचिका में हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग के लिए प्रस्तावित लगभग 75 करोड़ गैर-संग्रहणीय एवं गैर-पुनर्चक्रणीय 36 माइक्रोन प्लास्टिक एक्साइज होलोग्राम लेबल की खरीद प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिका के अनुसार भारत सरकार की ओर से गैर-आवश्यक एवं गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक को समाप्त करने तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की राष्ट्रीय नीति के बावजूद हिमालय जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में लगभग 75 करोड़ 36 माइक्रोन मेटालाइज़्ड पॉलिएस्टर प्लास्टिक होलोग्राम खरीदने की प्रक्रिया जारी रखी गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि टीईटी एक गैर-जैव अपघटनीय प्लास्टिक है, जिसकी पर्यावरण में आयु लगभग 300 से 400 वर्ष होती है तथा समय के साथ यह माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर मिट्टी, नदियों एवं भूजल को स्थायी रूप से प्रदूषित करता है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिनांक 29 दिसंबर 2025, 28 फरवरी और 24 मार्च 2026 को लगातार तीन वैधानिक पत्र जारी कर उक्त 36 माइक्रोन प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर को संशोधित/निरस्त करने तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मुख्य सचिव एवं अन्य अधिकारियों को बार-बार प्रस्तुतियां देने के बाद भी टेंडर निरस्त नहीं किया गया। याचिका में यह तथ्य भी रखा गया है कि हिमाचल प्रदेश में पूर्व में इसी प्रकार का 36 माइक्रोन प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर निरस्त किया जा चुका है।

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