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HP News: हिमाचल के स्कूलों में नहीं चलेगा जाति-धर्म का भेदभाव, मिड-डे मील को लेकर शिक्षा विभाग का सख्त फरमान
Fri, 26 Jun 2026 01:28 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:28 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूलों में धर्म, जाति, पंथ और लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव पर सख्त रोक लगा दी है। सभी बच्चों को रोल नंबर के आधार पर एक साथ भोजन कराने और शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पीएम पोषण योजना में भेदभाव पर जीरो टॉलरेंस
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने देश की महत्वाकांक्षी पीएम पोषण (पूर्व में मिड-डे मील) योजना के क्रियान्वयन में समानता और भाईचारे के सिद्धांतों को सर्वोपरि रखने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी स्कूली बच्चे के साथ धर्म, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर कोई भी भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला उपनिदेशकों और खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी स्कूलों में बच्चों के साथ समान व्यवहार हो और किसी भी प्रकार का अलगाव न पनपे।
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भेदभाव की शिकायतों पर लगाम: निदेशालय द्वारा जारी किए गए आदेशों में इस बात पर जोर दिया गया है कि समय-समय पर मिड-डे मील वितरण के दौरान भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन घटनाओं को रोकने और योजना के मूल उद्देश्य को साकार करने के लिए, सभी स्कूलों को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पीएम पोषण योजना को सामाजिक समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखा जाए। भोजन वितरण के दौरान, सभी बच्चों को रोल नंबर के आधार पर एक साथ बैठकर भोजन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, बजाय इसके कि उन्हें उनकी जाति, धर्म या अन्य व्यक्तिगत पहचान के आधार पर अलग-अलग बैठाया जाए।
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कड़े अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी: शिक्षा विभाग ने इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त न करने का संकेत दिया है। विभाग ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या इस योजना से संबंधित कोई भी व्यक्ति इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम योजना के पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करना: विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और इस संबंध में अपनी मासिक रिपोर्ट निदेशालय को भेजें। इसके अतिरिक्त, नागरिकों को अपनी शिकायतें और सुझाव दर्ज कराने के लिए एक सुलभ तंत्र भी स्थापित किया गया है। निदेशालय के टोल-फ्री नंबर 1800-180-8007 को स्कूल परिसरों में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने तथा स्कूल प्रबंधन समितियों और आम जनता के बीच इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नंबर पर किसी भी कार्यदिवस में सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक संपर्क कर शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं।
पीएम पोषण योजना, जो बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के साथ-साथ उन्हें स्कूल में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, अब सामाजिक समानता के एक मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य करेगी। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग का यह सख्त रुख यह सुनिश्चित करेगा कि योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों तक पहुंचे और यह वास्तव में 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करे। इस तरह के कदम न केवल शैक्षिक समानता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश के भविष्य के नागरिकों में सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।