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Himachal Tourism: 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' का बढ़ता ट्रेंड, हिमाचल के पर्यटन कारोबार को मिल रही नई रफ्तार
Fri, 26 Jun 2026 01:38 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:38 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसौली जैसे पर्यटन स्थलों पर युवा प्रोफेशनल्स लंबे समय तक ठहरकर काम कर रहे हैं। इससे होटल, होमस्टे, टैक्सी, कैफे और स्थानीय कारोबार को बड़ा फायदा मिल रहा है।
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ऑफिस का काम... लेकिन पहाड़ों की गोद में!
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में इन दिनों पर्यटन का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। बड़ी संख्या में लोग न केवल सैर-सपाटे के लिए, बल्कि 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा का लाभ उठाते हुए पहाड़ों की शांत वादियों में काम करने के लिए आ रहे हैं। शांत वातावरण, सुहावने मौसम और प्राकृतिक सुंदरता के बीच काम करने की चाह रखने वाले युवा पेशेवर और निजी क्षेत्र के कर्मचारी शिमला, मनाली, कसौली, चायल और धर्मशाला जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में कई दिनों तक ठहर रहे हैं। इस 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' (Work From Mountain - WFM) चलन ने प्रदेश के पर्यटन उद्योग को एक नई दिशा दी है।
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कार्य संस्कृति में बदलाव का सीधा लाभ: कोविड-19 महामारी के बाद कार्य संस्कृति में आए बदलावों का सीधा लाभ हिमाचल के पर्यटन उद्योग को मिल रहा है। अब महानगरों और बड़े शहरों में कार्यरत कर्मचारी सप्ताहांत से पहले ही हिमाचल पहुंचने लगे हैं। जहां पहले अधिकतर पर्यटक शनिवार को पहुंचते थे, वहीं अब शुक्रवार दोपहर से ही पर्यटन स्थलों की ओर वाहनों की आवाजाही बढ़ने लगी है। कई कर्मचारी शुक्रवार को ही अपना काम ऑनलाइन पूरा करते हुए सीधे पहाड़ों की ओर रवाना हो जाते हैं और सोमवार तक वहीं से काम करते हुए ठहरते हैं। इसका परिणाम यह है कि होटलों और होमस्टे इकाइयों में सप्ताहांत की बुकिंग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
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बदलती प्राथमिकताएं और सुविधाओं का विस्तार: अब पर्यटक केवल कमरे की सुंदरता या प्राकृतिक नजारों से ही संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे इंटरनेट की गति, निर्बाध बिजली बैकअप और काम करने के लिए एक सुविधाजनक स्थान जैसी सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इस मांग को पूरा करने के लिए, होटल और होमस्टे संचालक भी अपनी सेवाओं में महत्वपूर्ण बदलाव कर रहे हैं। शिमला, मनाली और कसौली सहित कई पर्यटन स्थलों पर होटल संचालक अब अपने कमरों में हाई-स्पीड इंटरनेट, आरामदायक कार्यस्थल और निर्बाध बिजली आपूर्ति जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक ठहरने वाले मेहमानों के लिए विशेष पैकेज भी तैयार किए जा रहे हैं।
कई होमस्टे संचालकों ने तो कमरों के भीतर ही अलग से वर्कप्लेस (कार्यस्थल) विकसित किए हैं, ताकि मेहमान बिना किसी व्यवधान के अपना ऑफिस का काम कर सकें।
व्यापक आर्थिक प्रभाव: पर्यटन कारोबारियों के अनुसार, इस नए 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' ट्रेंड से केवल होटल उद्योग ही नहीं, बल्कि स्थानीय बाजार, टैक्सी सेवाएं, कैफे, रेस्तरां और साहसिक पर्यटन गतिविधियों से जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिल रहा है। हिमाचली होम स्टे एसोसिएशन की अध्यक्ष तनुजा धांटा के अनुसार, महानगरों के कामकाजी युवा अब बड़े होटलों के बजाय ग्रामीण और शांत इलाकों में स्थित होमस्टे को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
कमर्शियल व्हीकल ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि हाइब्रिड वर्क कल्चर के कारण अब पर्यटकों का दबाव केवल शनिवार-रविवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शुक्रवार दोपहर से ही टैक्सियों की मांग आने लगती है। लंबा प्रवास करने वाले इन कामकाजी पर्यटकों से स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों के काम में भी वृद्धि हुई है।
एक स्थायी ट्रेंड के रूप में 'वर्क फ्रॉम माउंटेन': फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र चंद ठाकुर का कहना है कि कोरोना काल के बाद 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' एक स्थायी ट्रेंड बन चुका है। कामकाजी पेशेवरों की विशेष जरूरतों को देखते हुए, प्रदेश के होटल संचालक अब हाई-स्पीड इंटरनेट और कॉर्पोरेट-फ्रेंडली सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे वीकेंड ऑक्यूपेंसी (सप्ताहांत पर कमरों की उपलब्धता) में भारी उछाल आया है। यह नया चलन हिमाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है, जो न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को एक नए आयाम के साथ प्रस्तुत कर रहा है।