Himachal: नगर निकाय के नवनिर्वाचित पार्षदों को आठ जून से पहले दिलाई जाएगी शपथ, सरकार ने हाईकोर्ट में दिया जवाब
नगर निकाय चुनाव के बाद पार्षदों को तय सात दिन के भीतर शपथ नहीं दिलाने और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की चयन प्रक्रिया में देरी के मामले पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नियमों के अनुसार 30 दिन के भीतर शपथ दिलाना अनिवार्य
सरकार की ओर से बताया गया कि नियमों के अनुसार नवनिर्वाचित सदस्यों को सात दिन का नोटिस देकर 30 दिन के भीतर शपथ दिलाना अनिवार्य है। शपथ प्रक्रिया में देरी का कारण बताते हुए महाधिवक्ता ने कहा कि जिला उपायुक्त (डीसी), उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) सहित प्रशासनिक अधिकारी इन दिनों पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने में व्यस्त हैं। पंचायत चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 28 मई और तीसरे चरण का मतदान 30 मई को होना है, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के परिणाम 31 मई तक घोषित किए जाने हैं। इसी कारण नगर निकायों की शपथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में ये कहा गया
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि चुनाव की शेष प्रक्रिया और उसका कार्यक्रम तय करने का अधिकार राज्य सरकार के बजाय राज्य निर्वाचन आयोग के पास है। आयोग एक स्वतंत्र सांविधानिक संस्था है, इसलिए उसका पक्ष आना जरूरी है। इस पर महाधिवक्ता ने दलील दी कि 23 मई को अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका समाप्त हो चुकी है। नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद अब हिमाचल प्रदेश नगर पालिका चुनाव नियम, 2015 के नियम 80 के तहत आगे की प्रक्रिया जैसे शपथ ग्रहण आदि कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
अगली सुनवाई में जवाब दाखिल करे आयोग
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं थे। कोर्ट को बताया गया कि वे अपने पैतृक पंचायत क्षेत्र में चल रहे पंचायतीराज चुनाव में मतदान करने गए हैं। इस पर खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई में यदि आयोग की ओर से कोई उपस्थित नहीं होता, तो आयोग अपने किसी जिम्मेदार अधिकारी के माध्यम से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता को आवश्यक निर्देश उपलब्ध कराए, ताकि मामले में अंतिम निर्णय लिया जा सके। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है। अदालत ने आयोग से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
नगर निकायों में अध्यक्ष चुनाव के नए नियम लागू, बैठक की तारीख तय करेगा प्रशासन
शहरी विकास विभाग ने हिमाचल प्रदेश नगर निकाय चुनाव नियम, 2015 में संशोधन लागू कर दिए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद उपायुक्त या उनकी ओर से अधिकृत उपमंडलाधिकारी स्तर से कम नहीं अधिकारी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक की तिथि, समय और स्थान तय करेंगे। वही, अधिकारी बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। नियमों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि बैठक की तिथि और स्थान तय करने के कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाएं। संशोधन के तहत अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी को निर्वाचित सदस्यों को उम्मीदवारों के नामांकन के लिए पर्याप्त समय देना होगा। विभाग ने इन बदलावों को लेकर जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग से परामर्श कर संशोधित नियम लागू कर दिए गए।
बीएड पास उम्मीदवारों के मामले में सरकार ने दायर किया जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट में वर्ष 2023 की भर्ती प्रक्रिया में बीएड पास उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के मामले में सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दाखिल कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने रजिस्ट्री को रिकॉर्ड पर लाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इस जवाब पर अपना प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। उसके बाद ही इस मामले में अगली सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर 2024 को हेमंत शर्मा मामले में सरकार के 11 अक्टूबर 2023 के सर्कुलर को पूरी तरह से रद्द कर दिया था।अदालत ने नोट किया कि जब सर्कुलर को पहले ही रद्द किया जा चुका था, इसके बावजूद सरकार ने उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 25 अप्रैल 2026 को परिणाम घोषित कर दिए। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान इस पर सरकार को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए है।
सिल्ट मामले में शिमला, मंडी के डीसी करें सर्वे : हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने सतलुज नदी और कोल डैम जलाशय क्षेत्र तत्तापानी में भारी मात्रा में जमा अतिरिक्त गाद (सिल्ट) को हटाने और सुरक्षात्मक उपाय करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर अहम आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की अदालत ने शिमला और मंडी के उपायुक्त को निर्देश दिए हैं कि खनन विभाग के माध्यम से एक व्यापक सर्वे करेंगे। इस सर्वे में यह आकलन किया जाएगा कि इस रेत का उपयोग राज्य में खनन उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है या नविनियमों का उल्लंघन किए बिहीं। यदि नियमों और ना यह संभव पाया जाता है, तो इससे राज्य को वित्तीय लाभ भी होगा।मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के उद्योग एवं खनन सचिव को मामले में प्रतिवादी बनाया है और नोटिस जारी कर दिया गया है, साथ ही अदालत में एक विस्तृत एवं व्यापक हलफनामा दायर करने को कहा गया है।
खंडपीठ ने यह आदेश कोल बांध जन कल्याण समिति सुन्नी की ओर से दायर जनहित याचिका पर किया है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आम बात है कि सतलुज नदी के किनारों पर रेत के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं। मानसून के दौरान पानी का बहाव बढ़ने से रेत के ढेर डूब जाते हैं और इसकी गाद नदी के पानी में मिल जाती है, इससे कोल डैम जलाशय में सिल्ट का स्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं, जब नदी उफान पर नहीं होती, तो ये रेत के ढेर दोनों तरफ साफ दिखाई देते हैं। याचिका में केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि जनसुविधाओं का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने तत्तापानी में अत्यधिक सिल्ट हटाने के साथ-साथ वहां राजकीय प्राथमिक पाठशाला के लिए एक अलग भवन के निर्माण और एक पुल आदि बनाने की भी गुहार लगाई है। अदालत को बताया गया कि इसी तरह के दो अन्य मामले पहले ही लंबित हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि अलग-अलग फैसलों में किसी भी तरह के विरोधाभास से बचने के लिए इन सभी मामलों को एक साथ जोड़कर सुना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी।