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Himachal News: किन्नौर को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग उठी, जल विद्युत परियोजनाओं पर उठे सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 11 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

 किन्नौर जिले में जल विद्युत परियोजनाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर अब इस क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग उठी है।

Himachal: Demand Raised to Declare Kinnaur an Eco-Sensitive Zone; Questions Raised Over Hydropower Projects
किन्नाैर, पन बिजली विशेषज्ञ इंजीनियर आरएल जस्टा। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में जल विद्युत परियोजनाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर अब इस क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग उठी है। विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि सतलुज नदी पर बन रही परियोजनाएं किन्नौर के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। सतलुज पर बढ़ते प्रोजेक्टों से पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञ भूस्खलन और जल संकट बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। नाथपा-झाकड़ी प्रोजेक्ट से ऊपर के सतलुज बेसिन का तीन-चौथाई जल ग्रहण क्षेत्र तिब्बत में आता है। बाकी हिमाचल में हैं।

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हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में जल विद्युत उत्पादन की कुल क्षमता करीब 24,550 मेगावाट है, जिसमें से बड़ा हिस्सा सतलुज बेसिन का है। इन परियोजनाओं के निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आया है और कई स्थानों पर नदी सुरंगों में समा रही है, जिससे सतह पर जल की मात्रा घट रही है। पन बिजली विशेषज्ञ इंजीनियर आरएल जस्टा के अनुसार, सुरंग निर्माण और ब्लास्टिंग के कारण पहाड़ कमजोर हो रहे हैं, जिससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। किन्नौर का अधिकांश क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-पांच में आता है।

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2005 के पारछू का डर अभी भी सता रहा है। जल विद्युत परियोजनाओं के चलते किन्नौर में जल स्रोत सूखने लगे हैं, जिससे पीने और सिंचाई के पानी की समस्या बढ़ रही है। जस्टा ने सुझाव दिया है कि किन्नौर इको सेंसिटिव जोन घोषित हाे। जल संग्रहण क्षेत्रों के उपचार के लिए पौधरोपण और भूमि संरक्षण कार्यों को सही रूप तुरंत दिया जाए। प्रोजेक्टों के दोहन के लिए सतलुज ताल को पूर्ण विश्राम देना चाहिए। सतलुज नदी में जलविद्युत परियोजनाएं बनाने के लिए स्वीड पॉवर ने मास्टर प्लान बनाया। उसके अनुरूप ही बिजली का अधिकांश दोहन किया गया। किन्नौर में यह सफल नहीं हुआ।

किन्नौर को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने के फायदे और नुकसान दोनों पहलुओं को पहले जानने की जरूरत है। जब इस तरह की पूरी जानकारी ली जाएगी तो ही इस पर वह कोई बात कर सकेंगे।
- जगत सिंह नेगी, राजस्व मंत्री, हिमाचल प्रदेश



 
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