Himachal: नियुक्ति के बाद 60 दिन में ओपीएस को नहीं चुना तो एनपीएस नियम होगा लागू, जानें पूरा मामला
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उठाए गए कुछ मामलों पर वित्त महकमे ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। वित्त विभाग के अनुसार कर्मचारियों को 60 दिनों के भीतर ओपीएस में शामिल होने के लिए विकल्प अनिवार्य है।
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हिमाचल प्रदेश में 30 सितंबर 2025 और 31 मार्च 2026 को दो साल का अनुबंध सेवाकाल पूरा कर नियमित होने वाले कर्मचारियों ने अगर नियुक्ति के बाद 60 दिनों में ओपीएस को नहीं चुना तो खुद ही एनपीएस का नियम लागू हो जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उठाए गए कुछ मामलों पर वित्त महकमे ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। वित्त विभाग के अनुसार कर्मचारियों को 60 दिनों के भीतर ओपीएस में शामिल होने के लिए विकल्प अनिवार्य है। एक बार विकल्प देने के बाद उसे अंतिम माना जाएगा। बाद में कोई भी बदलाव नहीं हो सकेगा।
उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे पत्र में ये कहा
उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों ने निर्धारित 60 दिन की अवधि के भीतर पुरानी पेंशन योजना के लिए विकल्प नहीं चुना, उन्हें स्वतः ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत माना जाएगा। शिक्षा सचिव की ओर से उच्च शिक्षा निदेशक को भेजे पत्र में वित्त (पेंशन) विभाग की सलाह का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार पहले ही 4 मई 2023 को जारी अधिसूचना और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के माध्यम से ओपीएस बहाली के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। इन निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों को 60 दिनों के भीतर ओपीएस में शामिल होने के लिए विकल्प देना अनिवार्य है।
विकल्प देने के बाद उसे अंतिम और अपरिवर्तनीय माना जाएगा
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक बार विकल्प देने के बाद उसे अंतिम और अपरिवर्तनीय माना जाएगा। जो कर्मचारी ओपीएस या एनपीएस में से किसी एक का चयन कर चुके हैं, वे बाद में इसे बदल नहीं सकते। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प देने में असफल रहता है, तो यह माना जाएगा कि वह एनपीएस के तहत ही बने रहना चाहता है। ऐसे मामलों में पुरानी पेंशन का लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं होगा। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी मामलों की जांच 4 मई 2023 की एसओपी के प्रावधानों के अनुसार ही की जाए और उसी आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाए। विभाग को अपने स्तर पर ही ऐसे मामलों का निपटारा करने को कहा गया है।
पेंशन मामलों में लापरवाही कर रहे महकमे, परेशानी में पेंशनर, वित्त विभाग सख्त
प्रदेश में पेंशन मामलों में महकमे लापरवाही कर रहे हैं। कई अधूरे दस्तावेज महालेखाकार कार्यालय भेजे जा रहे हैं। इससे पेंशनरों को परेशानी हो रही है, उन्हें समय पर उनका हक नहीं मिल पा रहा है। इस पर राज्य सरकार का वित्त विभाग सख्त हो गया है। राज्य वित्त विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं कि पेंशन मामलों से जुड़े पूरे और सही दस्तावेज जमा किए जाएं। अधूरे दस्तावेजों के कारण पेंशन मामलों का समय पर निपटारे संभव नहीं हो पा रहा है जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में अब विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की भी तैयारी हो रही है। प्रधान सचिव वित्त के हवाले से जारी आदेश के अनुसार महालेखाकार कार्यालय ने पेंशन मामलों की जांच के दौरान कई कमियां पाई हैं।
आवश्यक दस्तावेज और जानकारी अधूरी पाई जा रही
यह मामले मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से भेज रहे हैं लेकिन इनमें आवश्यक दस्तावेज और जानकारी अधूरी पाई जा रही है। वित्त विभाग के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या ई-सर्विस बुक में अधूरी जानकारी देने के बारे में है। कई मामलों में कर्मचारी की ज्वाइनिंग की तारीख, पदोन्नति, सेवा सत्यापन और कोर्ट के फैसलों से जुड़े दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए हैं। इसके अलावा वेतन सत्यापन प्रमाणपत्र, वेतन निर्धारण शीट और ई-चालान की प्रतियां भी कई मामलों में गायब हैं। पत्र में यह भी उल्लेख है कि गैर-योग्य सेवा, लंबित विभागीय या न्यायिक जांच और अनुबंध व वर्कचार्ज सेवा का विवरण भी सही तरीके से दर्ज नहीं किया जा रहा है जिससे पेंशन मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन कार्यरत डीडीओ को इन कमियों को दूर करने के लिए सख्ती से निर्देश दें। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि मानव संपदा पोर्टल पर सभी प्रविष्टियां सही और पूर्ण रूप से दर्ज होने के बाद ही पेंशन मामले महालेखाकार कार्यालय को भेजे जाएं।