Himachal: सरकार ने वापस लिया पांच स्कूलों के विलय का फैसला, एमडीएम के लिए चावल आवंटित
शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लाहौल-स्पीति, मंडी और शिमला जिलों के पांच स्कूलों के विलय को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने पांच सरकारी स्कूलों के विलय संबंधी पूर्व निर्णय को वापस ले लिया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लाहौल-स्पीति, मंडी और शिमला जिलों के पांच स्कूलों के विलय को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। लाहौल-स्पीति जिले के प्राइमरी स्कूल खोलकसा, चिचौंग, कुंगरी, मंडी जिले के प्राइमरी स्कूल बनौन और शिमला जिले के प्राइमरी स्कूल झंगरोली के विलय संबंधी निर्णय को निरस्त किया गया है।
मिड-डे मील बनाने को 27,384 क्विंटल चावल आवंटित
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 की दूसरी तिमाही एक जुलाई से 30 सितंबर के लिए 27,384.70 क्विंटल चावल आवंटित किया गया है। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। बाल वाटिका एवं प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए 3289.50 क्विंटल, पहली से पांचवीं कक्षाओं के लिए 11108.10 क्विंटल तथा छठी से आठवीं कक्षाओं के लिए 12987.10 क्विंटल चावल आवंटित किया गया है। जिलों को निर्देश दिए हैं कि खाद्यान्न का वितरण मांग के अनुसार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्कूलों तक निर्धारित मात्रा में चावल पहुंचे।
साथ ही भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) डिपो से उच्च गुणवत्ता का खाद्यान्न ही उठाया जाए तथा गुणवत्ता संबंधी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जाएं। बाल वाटिका, प्री-प्राइमरी और प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन 100 ग्राम तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 150 ग्राम चावल प्रति छात्र निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध कराया जाए। जिलावार आवंटन में मंडी को सबसे अधिक 4170.20 क्विंटल चावल आवंटित किया गया है। इसके बाद चंबा को 3843.30 क्विंटल, सिरमौर को 3747.30, शिमला को 3290.80 और कांगड़ा को 2957.30 क्विंटल चावल दिया गया है। वहीं लाहौल-स्पीति के केलांग और काजा क्षेत्रों को क्रमशः 48.30 और 49.70 क्विंटल चावल आवंटित किया गया है। ब्लॉक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में कम से कम एक माह का बफर स्टॉक बनाए रखा जाए तथा खाद्यान्न की उठान और उपयोगिता प्रमाणपत्र नियमित रूप से प्राप्त कर रिकॉर्ड संधारित किया जाए।