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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court: Divorced wife has full right to receive maintenance until she remarries.

हिमाचल हाईकोर्ट: तलाकशुदा पत्नी के दोबारा शादी नहीं करने तक भरण-पोषण पाने का पूरा हक

Tue, 11 Aug 2026 06:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 11 Aug 2026 06:15 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने पति की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि तलाक होने के बाद भी पत्नी जब तक दूसरी शादी नही कर लेती, तब तक उसे अपने पूर्व पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है।

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Himachal High Court: Divorced wife has full right to receive maintenance until she remarries.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पति की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि तलाक होने के बाद भी पत्नी जब तक दूसरी शादी नही कर लेती, तब तक उसे अपने पूर्व पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की पीठ ने कहा कि सक्षम और कमाने में समर्थ पति स्वास्थ्य या उम्र का बहाना बनाकर अपनी कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। चूंकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि पत्नी ने दूसरी शादी की है, इसलिए वह भरण-पोषण की पूरी हकदार है।

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उच्च न्यायालय ने माना कि फैमिली कोर्ट की ओर से न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना के आधार पर पति की मासिक आय 11,250 रुपये आंकी गई थी, इसके एवज में 4,000 प्रतिमाह का भरण-पोषण पूरी तरह से तर्कसंगत और न्यायसंगत है। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह आदेश जारी होने के चार सप्ताह के भीतर बकाया भरण-पोषण राशि का भुगतान करे। यह मामला हमीरपुर का है। अपीलकर्ता सुरजीत और सावित्री देवी का विवाह 21 दिसंबर 1997 को हुआ था। विवाह के बाद दोनों के तीन बच्चे हुए। पत्नी का आरोप था कि उसके पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार, मारपीट और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करना शुरू कर दिया, जिससे तंग आकर और क्रूरता के आधार पर उसने वर्ष 2019 में तलाक की याचिका दायर की।

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22 नवंबर 2021 को पारिवारिक अदालत ने तलाक की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही पत्नी ने धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण के लिए भी याचिका दायर की थी। हमीरपुर के फैमिली कोर्ट ने 23 जनवरी 2024 को फैसला सुनाते हुए पति को 18 मई 2019 से 4,000 प्रति माह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने इस फैसले इस को हाईकोर्ट में चुनौती दी। पति ने दलील दी कि वह एक दिहाड़ी मजदूर है और उम्र व खराब स्वास्थ्य के कारण कमाने में असमर्थ है। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए पाया कि पति ने 93,000 रुपये का बिजनेस लोन लिया था। पीठ ने टिप्पणी की कि एक आम दिहाड़ी मजदूर को बिजनेस लोन नहीं मिलता,जो पत्नी के इस दावे का समर्थन करता है कि पति ठेकेदारी का काम करता है। इसके अलावा, स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति शारीरिक अक्षमता का पुख्ता प्रमाण दिए बिना भरण-पोषण से नहीं बच सकता।पति का दावा है कि पत्नी सिलाई का काम करती है और अपनी आजीविका चला सकती है। पत्नी अपनी मर्जी से अलग हुई थी और अब दोनों का तलाक हो चुका है। तलाक के बाद भरण-पोषण का अधिकार नहीं है।

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