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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court Order: Govt to clear pending Ayushman-Himcare bills worth ₹36 crore within three weeks.

हिमाचल हाईकोर्ट का आदेश: आयुष्मान-हिमकेयर के लंबित 36 करोड़ के बिल तीन हफ्ते में चुकाए सरकार

Wed, 22 Jul 2026 05:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 22 Jul 2026 05:20 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और हिमकेयर योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के बकाये के भुगतान को लेकर राज्य सरकार को झटका दिया है। 

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Himachal High Court Order: Govt to clear pending Ayushman-Himcare bills worth ₹36 crore within three weeks.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और हिमकेयर योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के बकाये के भुगतान को लेकर राज्य सरकार को झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विजिलेंस जांच के नाम पर अस्पतालों के स्वीकृत बिलों का भुगतान अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने निजी अस्पतालों की याचिकाओं का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को 3 सप्ताह के भीतर आयुष्मान भारत और हिमकेयर दोनों योजनाओं के तहत निजी अस्पतालों के सभी स्वीकृत लंबित बिलों का भुगतान करे। यदि विजिलेंस जांच पूरी होने पर किसी अस्पताल से फर्जीवाड़े या गलत दावे के तहत वसूली बनती है, तो राज्य सरकार कानून के अनुसार कानूनी कार्रवाई और रिकवरी करने के लिए स्वतंत्र होगी। अदालत ने कहा कि फर्जी बिलों की जांच के लिए विजिलेंस ब्यूरो की अप्रैल 2026 से जारी जांच के नाम पर अस्पतालों का स्वीकृत भुगतान नहीं रोका जा सकता, क्योंकि अस्पतालों ने मरीजों के इलाज पर धनराशि खर्च की है। 6 जुलाई तक निजी अस्पतालों के हिमकेयर के तहत 11.03 करोड़ और आयुष्मान भारत के तहत 25.22 करोड़ (कुल 36.25 करोड़ से अधिक) के स्वीकृत बिल लंबित हैं।

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केंद्र की सीमा समाप्त होने के बाद अतिरिक्त देनदारी राज्य सरकार की
केंद्र और राज्य सरकार के बीच योजना का खर्च 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है, लेकिन केंद्र ने प्रति परिवार वार्षिक सीमा 952 निर्धारित की है (अधिकतम 49.71 करोड़ प्रति वर्ष)। वर्ष 2021-22 के बाद से निजी अस्पतालों में उपचार का खर्च बढ़ा, जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य पर आ गया। कोर्ट ने माना कि समझौता ज्ञापन की शर्तों के अनुसार, केंद्र सरकार की निर्धारित सीमा के बाद होने वाला कोई भी अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार को स्वयं वहन करना होगा। चूंकि केंद्र अपना निर्धारित हिस्सा दे चुका है, इसलिए लंबित स्वीकृत बिलों के भुगतान की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

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सरकार की दलील, विजिलेंस जांच भुगतान रोकने का बहाना नहीं
राज्य सरकार ने दलील दी थी कि निजी अस्पतालों द्वारा जमा किए गए फर्जी बिलों की जांच के लिए स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच चल रही है, इसलिए भुगतान रोका गया है।कोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अप्रैल 2026 से जारी विजिलेंस जांच को अनिश्चितकाल के लिए भुगतान लटकाने का जरिया नहीं बनाया जा सकता। अस्पताल पहले ही मरीजों के इलाज पर पैसा खर्च कर चुके हैं और भुगतान में देरी से उनका दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

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पौंग बांध और रेणुका वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त
 प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा में पौंग बांध और सिरमौर में रेणुका झील की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने वन्यजीवों की सुरक्षा, धार्मिक मेलों के दौरान होने वाले प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार और संबंधित प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। खंडपीठ ने सिरमौर के उपायुक्त को रेणुका झील से जुड़े सभी मुद्दों, धार्मिक मेले से बढ़ा प्रदूषण, वन्यजीवों पर खतरा और अतिक्रमण हटाने संबंधी पुराने आदेशों के अनुपालन पर स्थिति रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया गया है। न्याय मित्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि रेणुका झील दुर्लभ गोल्डन महाशीर मछली, ब्लैक स्पॉटेड टर्टल और हिमालयन ब्लैक बियर का निवास स्थान है। इसकी बदहाली पर गंभीर चिंता जताई गई थी। हाईकोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि रेणुका और राज्य के अन्य हिस्सों में पिंजरों में बंद ऐसे सभी जानवरों का विस्तृत ब्योरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। रेणुका मेले में (नवंबर 2024) के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लाउडस्पीकरों का शोर 110 से 120 डेसिबल तक पहुंच गया, जबकि स्वीकार्य सीमा 85 डेसिबल है। डस्टबिन और पर्याप्त शौचालय प्रबंधन न होने से कचरा झील व गिरि नदी में फेंका गया और विक्रेताओं ने कचरा जलाकर वायु प्रदूषण फैलाया। हाईकोर्ट ने उपायुक्त कांगड़ा धर्मशाला को भी पूर्व आदेशों के तहत नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी। वन विभाग ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 के दौरान पौंग बांध क्षेत्र में अवैध शिकार (पोचिंग) का कोई मामला सामने नहीं आया है। खंडपीठ ने विभाग के इस जीरो पोचिंग वाले दावे को स्वीकार करने से स्पष्ट इन्कार कर दिया।

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