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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: NGT takes a strict stance on construction around a 200 year old banyan tree; seeks a response.

Himachal: दो सौ साल पुराने बरगद के चारों ओर निर्माण पर एनजीटी सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

Thu, 13 Aug 2026 07:00 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 13 Aug 2026 07:00 PM IST
सार

200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बनाए गए सुरक्षात्मक प्लेटफॉर्म के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल सरकार से जवाब मांगा है। एनजीटी ने वन विभाग के प्रधान सचिव को छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि बरगद के चारों ओर प्लेटफॉर्म का निर्माण किस तरह किया गया और इसके लिए किस सक्षम प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी। 

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Himachal: NGT takes a strict stance on construction around a 200 year old banyan tree; seeks a response.
एनजीटी - फोटो : संवाद

विस्तार

संरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बनाए गए सुरक्षात्मक प्लेटफॉर्म के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल सरकार से जवाब मांगा है। एनजीटी ने वन विभाग के प्रधान सचिव को छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि बरगद के चारों ओर प्लेटफॉर्म का निर्माण किस तरह किया गया और इसके लिए किस सक्षम प्राधिकरण से अनुमति ली गई थी। मामला परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य से जुड़ा है।

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11 अगस्त को एनजीटी की प्रधान पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने मामले की सुनवाई की। प्रतिवादी पक्ष की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि बरगद के चारों ओर छोटा सुरक्षात्मक बैठने का प्लेटफॉर्म (टियाला) बनाया गया था। इसका उद्देश्य करीब 200 साल पुराने पेड़ की सुरक्षा करना, उसकी जड़ों के आसपास मिट्टी का कटाव रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। अधिकारियों ने बताया कि पेड़ के आसपास लोगों की आवाजाही अधिक रहती है और पास में सरकारी स्कूल भी है।

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क्षेत्र में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए निर्माण को निवारक और सुरक्षात्मक कदम बताया गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य रोक दिया गया है। एनजीटी ने कहा कि सुनवाई के दौरान इस बात पर विवाद नहीं था कि बरगद का पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों से निर्माण की अनुमति और उसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। वन विभाग के प्रधान सचिव को छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर 2026 को होगी।

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