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हिमाचल: शिमला हवाई सेवाओं से वंचित क्यों, सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं, हाईकोर्ट ने सचिव को किया तलब

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 30 Apr 2026 06:00 AM IST
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सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में हवाई कनेक्टिविटी की खस्ताहाल स्थिति और शिमला हवाई अड्डे से उड़ानों के बंद होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। 

Himachal: Why is Shimla Deprived of Air Services? Step-motherly Treatment Will Not Be Tolerated
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में हवाई कनेक्टिविटी की खस्ताहाल स्थिति और शिमला हवाई अड्डे से उड़ानों के बंद होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए पूछा है कि राजधानी शिमला हवाई सेवा से वंचित क्यों है, इस तरह का सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव को व्यक्तिगत रूप से (वर्चुअल माध्यम से) उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि शिमला को उड़ान योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।

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अदालत ने हैरानी जताई कि शिमला देश की एकमात्र ऐसी राज्य राजधानी है, जिसे रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि अन्य सभी राज्यों की राजधानियां हवाई मार्ग से जुड़ी हुई हैं। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है जहां सड़क मार्ग से दिल्ली पहुंचने में 8-10 घंटे लगते हैं। पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य जरिया है, ऐसे में बेहतर हवाई सुविधा देना केंद्र का सांविधानिक और नैतिक कर्तव्य है।राज्य सरकार ने अपनी सीमित वित्तीय क्षमता के बावजूद 5 अप्रैल 2026 को एलायंस एयर के साथ समझौता कर 32.64 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान की है, ताकि उड़ानें फिर से शुरू हो सकें।

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राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित संशोधित उड़ान योजना में भी शिमला की अनदेखी की गई है। दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला जैसे महत्वपूर्ण रूटों के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया।सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एलायंस एयर ने विमानों की कमी का बहाना बनाकर शिमला से परिचालन बंद कर दिया है।चूंकि एलायंस एयर ने मई से उड़ानें शुरू करने का आश्वासन दिया है, इसलिए मामले की अगली सुनवाई 6 मई को तय की गई है। यह जनहित याचिका मूल रूप से कांगड़ा हवाई अड्डे पर पक्षियों के खतरे को लेकर शुरू हुई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने जनहित को देखते हुए इसका दायरा बढ़ाकर पूरे हिमाचल की हवाई कनेक्टिविटी को इसमें शामिल कर लिया है।

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