हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा: तलाक के बाद भी धन-उपहार वापसी के लिए दी जा सकती अर्जी; जानें पूरा मामला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को कहा कि स्त्री धन व संपत्ति की वापसी पर गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाए। वहीं, वैवाहिक विवादों और संपत्ति के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों और संपत्ति के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री पारित हो चुकी है, तब भी महिला धन, उपहार और अन्य संपत्तियों की वापसी के लिए फैमिली कोर्ट में स्वतंत्र रूप से अर्जी दे सकती है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत पति-पत्नी के बीच संपत्ति से जुड़े किसी भी विवाद को सुलझाने का विशेष अधिकार फैमिली कोर्ट के पास है। यह अधिकार सिविल कोर्ट से भी ऊपर है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हम पक्षकारों को दोबारा लंबी कानूनी लड़ाई या अलग से दीवानी मुकदमा दायर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। न्याय का तकाजा है कि फैमिली कोर्ट ही संपत्ति से जुड़े इन विवादों का निपटारा करे। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले को वापस भेज दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि फैमिली कोर्ट दोनों पक्षों को सबूत पेश करने का मौका दे और स्त्री धन व संपत्ति की वापसी पर गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाए। अदालत ने दोनों पक्षों को 17 फरवरी को फैमिली कोर्ट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि अपीलकर्ता ने अपने पति से तलाक के लिए याचिका दायर की थी। साल 2018 में उन्हें एकतरफा तलाक की डिक्री मिल गई। इसी दौरान उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 27 के तहत अपने स्त्रीधन और उपहारों की वापसी के लिए एक आवेदन दायर किया था। हमीरपुर के फैमिली कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था।
नशा तस्करों पर प्रदेश में चल रही कार्रवाई के बीच शिमला की विशेष अदालत ने पुलिस कांस्टेबल राहुल वर्मा की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी है। राहुल पर अंतरराज्यीय हेरोइन (चिट्टा) तस्करी गिरोह के सरगना संदीप शाह के साथ संबंध का आरोप है। 31 दिसंबर 2025 को विशेष न्यायाधीश-2 यजुवेंद्र सिंह की ओर से पारित आदेश में आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा गया कि वर्मा ने पिछले छह वर्षों से नारकोटिक्स मामलों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट में तैनात होने के बावजूद अपने पद का दुरुपयोग किया।
वह सरगना शाह के साथ मिलकर शिमला में हेरोइन की ढुलाई, तौल, पैकिंग और वितरण में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रहा था। अदालत में पेश पुलिस स्टेटस रिपोर्ट में मुख्य सबूतों का उल्लेख इस तरह है। इसमें संदीप शाह द्वारा राहुल को दी गई सिमकार्ड का ससुराल से बरामद होना, व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजेक्शन से दोनों के बीच संबंध, ड्रग की रकम को सहयोगियों और परिवार के खातों में जमा करवाने के साथ सह-आरोपी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मोबाइल फॉर्मेट करना जैसे आरोप शामिल हैं।
हिमाचल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि टेंडर की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है तो विभाग न तो ठेकेदार की सुरक्षा राशि (ईएमडी) जब्त कर सकता है और न ही उसे भविष्य के लिए ब्लैक लिस्ट कर सकता है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दवा आपूर्तिकर्ता फर्म के खिलाफ जारी 21 मार्च 2025 के आदेश को असांविधानिक और मनमाना करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता फर्म की जब्त की गई 2 लाख रुपये की ईएमडी तीन महीने के भीतर वापस की जाए। कोर्ट ने फर्म पर लगाया तीन साल का प्रतिबंध तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
एक दवा आपूर्ति करने वाली फर्म ने मई 2023 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाओं की आपूर्ति के लिए निकाले गए टेंडर में भाग लिया था। टेंडर की शर्तों के अनुसार बोली जमा करने की अंतिम तिथि से 180 दिनों तक ही वैध रहनी थी। यह अवधि 24 नवंबर 2023 को समाप्त हो गई।