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टाॅप बाक्स::::: जिले के 44% स्कूलों में पर्याप्त कमरे और 27% में फर्नीचर नहीं
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धर्मशाला। कांगड़ा जिले के 44 प्रतिशत स्कूलों में पर्याप्त कमरे और 27 प्रतिशत में फर्नीचर नहीं है। करीब नौ प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। इतने ही स्कूलों में पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं है। दो प्रतिशत स्कूलों में मिड-डे मील योजना के लिए रसोईघर तक नहीं है। 40 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में छात्राओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। एक-तिहाई स्कूलों में स्कूल सुरक्षा समितियां गठित नहीं हैं। शिकायत व सुझाव पेटियां भी नहीं रखी गई हैं।
सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित स्कूलों के ऑडिट में छात्र सुरक्षा, आधारभूत ढांचे, पुस्तकालय, परिवहन, स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हुए सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) ने शिक्षा व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया है। धर्मशाला में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान सोशल ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। कार्यक्रम में 2,000 से अधिक अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। उपायुक्त हेमराज बैरवा भी उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की टीम ने डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में जिले के 2,364 स्कूलों में से 519 स्कूलों का सर्वेक्षण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों की तुलना में कांगड़ा की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया।
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छात्र सुरक्षा को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में चहारदीवारी या सुरक्षा बाड़ नहीं है। 65 प्रतिशत स्कूल ऐसे पाए गए जहां तक गाड़ी योग्य सड़क नहीं पहुंचती।
यह भी सामने आया कि सर्वेक्षित किसी भी स्कूल में पेशेवर काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं का भी अभाव पाया गया। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों के अनुरूप पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं।
स्कूलों का नहीं किया जा रहा नियमित निरीक्षण
रिपोर्ट में शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभागीय दिशानिर्देशों के बावजूद स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। जनसुनवाई में अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने स्कूलों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, परिवहन सुविधाएं बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
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यह सर्वे सिर्फ 20 फीसदी स्कूलों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। सामने आई कमियों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार से पत्राचार किया जाएगा। -भाग सिंह, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा (समग्र गुणवत्ता शिक्षा), कांगड़ा
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सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित स्कूलों के ऑडिट में छात्र सुरक्षा, आधारभूत ढांचे, पुस्तकालय, परिवहन, स्वच्छता और निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आई हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हुए सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) ने शिक्षा व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया है। धर्मशाला में शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान सोशल ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। कार्यक्रम में 2,000 से अधिक अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। उपायुक्त हेमराज बैरवा भी उपस्थित रहे।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की टीम ने डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में जिले के 2,364 स्कूलों में से 519 स्कूलों का सर्वेक्षण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों की तुलना में कांगड़ा की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया।
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छात्र सुरक्षा को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में चहारदीवारी या सुरक्षा बाड़ नहीं है। 65 प्रतिशत स्कूल ऐसे पाए गए जहां तक गाड़ी योग्य सड़क नहीं पहुंचती।
यह भी सामने आया कि सर्वेक्षित किसी भी स्कूल में पेशेवर काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं का भी अभाव पाया गया। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल निर्धारित मानकों के अनुरूप पुस्तकालय सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं।
स्कूलों का नहीं किया जा रहा नियमित निरीक्षण
रिपोर्ट में शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभागीय दिशानिर्देशों के बावजूद स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। जनसुनवाई में अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने स्कूलों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, परिवहन सुविधाएं बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
यह सर्वे सिर्फ 20 फीसदी स्कूलों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। सामने आई कमियों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार से पत्राचार किया जाएगा। -भाग सिंह, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा (समग्र गुणवत्ता शिक्षा), कांगड़ा