{"_id":"6a6a19dee03094511c0c1cf9","slug":"army-withdraws-relief-work-handed-over-to-panchayat-40-kanals-of-land-identified-for-rehabilitation-kangra-news-c-95-1-kng1005-247429-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: सेना लौटी<bha>;<\/bha> पंचायत संभालेगी राहत कार्य, पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: सेना लौटी<bha>;</bha> पंचायत संभालेगी राहत कार्य, पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित
Thu, 30 Jul 2026 08:48 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 30 Jul 2026 08:48 AM IST
विज्ञापन
बोह पंचायत के गढ़गून गांव में मलबे को हटाते हुए पोकलेन। स्रोत: ग्रामीण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्मशाला। बोह त्रासदी को नौ दिन बीत गए हैं। बादल फटने से मची तबाही के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटे सेना के जवान बुधवार को दोपहर को लौट गए। अब बाकी के कार्यों का जिम्मा स्थानीय पंचायत के हवाले होगा। प्रशासन ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए स्पैड़ा गांव में 40 कनाल भूमि चिह्नित कर ली है, जहां प्रत्येक परिवार को 6-6 मरले भूमि आवंटित की जाएगी।
21 जुलाई को बादल फटलने के बाद मलबे में दबे गढ़गून गांव के रास्तों को बनाने और वहां भारी मशीनरी पहुंचाने के बाद सेना के जवान की मदद ली गई थी। लगभग छह दिन तक सेना के जवान ने यहां राहत व बचाव अभियान चलाया। सेना के मैन्युअल प्रयासों से गढ़गून और स्पैड़ा के कई परिवारों का सामान निकाल लिया गया है। अब आगे के राहत और अवशेष हटाने के कार्य की कमान पंचायत स्तर पर संभाल ली गई है, जिसके अगले दो से तीन दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने आपदा में सब कुछ गंवा चुके लोगों के पुनर्वास के लिए स्पैड़ा गांव में 40 कनाल भूमि चिह्नित कर ली है। घर खो चुके प्रत्येक प्रभावित परिवार को नए मकान के निर्माण के लिए 6-6 मरले भूमि आवंटित की जाएगी। इसके अलावा क्षतिग्रस्त जमीन के एवज में 5,000 और फसल नुकसान के लिए 2,000 की आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है। मलबे में दबी गाय-भैंस के लिए 55,000 और भेड़-बकरी के नुकसान पर 15,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
विज्ञापन
गांव में मशीनरी न पहुंचने के कारण बुलानी पड़ी सेना
उपायुक्त हेम राज बैरवा ने बताया गढ़गून गांव में बादल फटने से अधिक नुकसान हुआ था और लोग के घर भी मलबे में दब गए थे। गांव के लिए सड़क न होने के कारण मशीनरी पहुंचाना बहुत मुश्किल था। गांव में मशीनरी पहुंचाने के लिए सेना को बुलाना पडा। सेना के जवानों ने सर्वे कर रास्ता बनाकर मशीनरी को गांव तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि राहत कार्य के दौरान एक मशीनरी खराब भी हो गई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर कार्य शुरू किया जाएगा। प्रभावित लोगों के राशन कार्ड और गैस कनेक्शन फिर से दिए जा रहे हैं।
स्पैड़ा में चट्टानों से खतरा बरकरार
एसडीएम शाहपुर डॉ. गणेश ठाकुर ने बताया कि स्पैड़ा गांव के ऊपर अब भी तीन बड़ी चट्टानों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रही बारिश और फिसलन के कारण फिलहाल उन चट्टानों को हटाने का काम जोखिम भरा है, जिससे वहां सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी तरह घर खो चुके परिवारों को 30-30 हजार और आंशिक रूप से प्रभावित परिवारों को 10-10 हजार रुपये की फौरी राहत दी जा चुकी है। यदि कोई प्रभावित परिवार किराये पर कमरा लेना चाहता है तो प्रशासन उसको 5,000 रुपये प्रति माह मदद दी जाएगी।
शिविरों में घटी संख्या, रिश्तेदारों के यहां शरण
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोह में बनाए गए राहत शिविर में शुरुआती दिनों में 150 से अधिक लोग ठहरे हुए थे। हालांकि शिविर में वायरल फैलने और असुविधाओं के चलते अधिकतर लोग अब अपने रिश्तेदारों के घरों में शिफ्ट हो चुके हैं। वर्तमान में शिविर में केवल 15 से 20 लोग ही शेष बचे हैं, जिनके स्वास्थ्य की नियमित जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठन और दानदाता राहत सामग्री सीधे भेजने से पहले एसडीएम कार्यालय शाहपुर में संपर्क करें। वर्तमान में प्रभावितों को बर्तन, चूल्हा, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान की आवश्यकता है, ताकि जरूरत के हिसाब से सही सामग्री पहुंचाई जा सके।
विज्ञापन
21 जुलाई को बादल फटलने के बाद मलबे में दबे गढ़गून गांव के रास्तों को बनाने और वहां भारी मशीनरी पहुंचाने के बाद सेना के जवान की मदद ली गई थी। लगभग छह दिन तक सेना के जवान ने यहां राहत व बचाव अभियान चलाया। सेना के मैन्युअल प्रयासों से गढ़गून और स्पैड़ा के कई परिवारों का सामान निकाल लिया गया है। अब आगे के राहत और अवशेष हटाने के कार्य की कमान पंचायत स्तर पर संभाल ली गई है, जिसके अगले दो से तीन दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
प्रशासन ने आपदा में सब कुछ गंवा चुके लोगों के पुनर्वास के लिए स्पैड़ा गांव में 40 कनाल भूमि चिह्नित कर ली है। घर खो चुके प्रत्येक प्रभावित परिवार को नए मकान के निर्माण के लिए 6-6 मरले भूमि आवंटित की जाएगी। इसके अलावा क्षतिग्रस्त जमीन के एवज में 5,000 और फसल नुकसान के लिए 2,000 की आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है। मलबे में दबी गाय-भैंस के लिए 55,000 और भेड़-बकरी के नुकसान पर 15,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
विज्ञापन
गांव में मशीनरी न पहुंचने के कारण बुलानी पड़ी सेना
उपायुक्त हेम राज बैरवा ने बताया गढ़गून गांव में बादल फटने से अधिक नुकसान हुआ था और लोग के घर भी मलबे में दब गए थे। गांव के लिए सड़क न होने के कारण मशीनरी पहुंचाना बहुत मुश्किल था। गांव में मशीनरी पहुंचाने के लिए सेना को बुलाना पडा। सेना के जवानों ने सर्वे कर रास्ता बनाकर मशीनरी को गांव तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि राहत कार्य के दौरान एक मशीनरी खराब भी हो गई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर कार्य शुरू किया जाएगा। प्रभावित लोगों के राशन कार्ड और गैस कनेक्शन फिर से दिए जा रहे हैं।
स्पैड़ा में चट्टानों से खतरा बरकरार
एसडीएम शाहपुर डॉ. गणेश ठाकुर ने बताया कि स्पैड़ा गांव के ऊपर अब भी तीन बड़ी चट्टानों के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रही बारिश और फिसलन के कारण फिलहाल उन चट्टानों को हटाने का काम जोखिम भरा है, जिससे वहां सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी तरह घर खो चुके परिवारों को 30-30 हजार और आंशिक रूप से प्रभावित परिवारों को 10-10 हजार रुपये की फौरी राहत दी जा चुकी है। यदि कोई प्रभावित परिवार किराये पर कमरा लेना चाहता है तो प्रशासन उसको 5,000 रुपये प्रति माह मदद दी जाएगी।
शिविरों में घटी संख्या, रिश्तेदारों के यहां शरण
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बोह में बनाए गए राहत शिविर में शुरुआती दिनों में 150 से अधिक लोग ठहरे हुए थे। हालांकि शिविर में वायरल फैलने और असुविधाओं के चलते अधिकतर लोग अब अपने रिश्तेदारों के घरों में शिफ्ट हो चुके हैं। वर्तमान में शिविर में केवल 15 से 20 लोग ही शेष बचे हैं, जिनके स्वास्थ्य की नियमित जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठन और दानदाता राहत सामग्री सीधे भेजने से पहले एसडीएम कार्यालय शाहपुर में संपर्क करें। वर्तमान में प्रभावितों को बर्तन, चूल्हा, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान की आवश्यकता है, ताकि जरूरत के हिसाब से सही सामग्री पहुंचाई जा सके।

बोह पंचायत के गढ़गून गांव में मलबे को हटाते हुए पोकलेन। स्रोत: ग्रामीण

बोह पंचायत के गढ़गून गांव में मलबे को हटाते हुए पोकलेन। स्रोत: ग्रामीण