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Kangra News: वी-बीजी राम जी में रिपेयर और रखरखाव पर पांच साल का ब्रेक
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धर्मशाला। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (वी-बीजी राम) योजना में लागू किए गए नए प्रावधान पंचायतों, श्रमिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आए हैं। योजना में अब कच्चे कार्यों को शामिल नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही रिपेयर और रखरखाव संबंधी कार्य भी पांच वर्ष पूरे होने के बाद ही करवाए जा सकेंगे। दूसरी ओर योजना में मनरेगा की तर्ज पर 60:40 (मजदूरी : सामग्री) अनुपात लागू किए जाने से पंचायतों के लिए कार्यों का एस्टीमेट तैयार करना भी मुश्किल हो गया है।
जानकारों के अनुसार योजना में निर्धारित 318 प्रकार के कार्यों में अधिकांश सामग्री आधारित हैं, जबकि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर विकास कार्य श्रम आधारित होते हैं। ऐसे में पंचायतों को 60:40 अनुपात के अनुरूप कार्य स्वीकृत करवाने में दिक्कतें आने की आशंका है।
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सबसे अधिक असर उन जिलों पर पड़ सकता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में कूहलों की गाद निकासी के कार्य वी-बीजी राम और पहले मनरेगा के तहत करवाए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था में इन कार्यों के बाहर होने से सिंचाई व्यवस्था और कृषि गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों की मानें तो पहले सिक्योर सॉफ्टवेयर में लेबर रेट के आधार पर एस्टीमेट तैयार होते थे, जिससे 60:40 अनुपात बनाना अपेक्षाकृत आसान था। अब थ्रू-रेट के आधार पर एस्टीमेट बनने से अधिकांश कार्यों में मजदूरी और सामग्री का अनुपात निर्धारित सीमा में लाना कठिन हो रहा है। यदि एस्टीमेट ही निर्धारित अनुपात में नहीं बनेंगे तो पंचायत और ब्लॉक स्तर पर 60:40 का पालन करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
उधर, श्रमिकों की चिंता दिहाड़ी को लेकर भी बढ़ गई है। वी-बीजी राम में 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी निर्धारित की गई है, जबकि मनरेगा के तहत 320 रुपये दिहाड़ी मिल रही थी। ऐसे में श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर कम होने के साथ उनकी आय भी घटेगी।
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इसके साथ ही रिपेयर और रखरखाव संबंधी कार्य भी पांच वर्ष पूरे होने के बाद ही करवाए जा सकेंगे। दूसरी ओर योजना में मनरेगा की तर्ज पर 60:40 (मजदूरी : सामग्री) अनुपात लागू किए जाने से पंचायतों के लिए कार्यों का एस्टीमेट तैयार करना भी मुश्किल हो गया है।
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जानकारों के अनुसार योजना में निर्धारित 318 प्रकार के कार्यों में अधिकांश सामग्री आधारित हैं, जबकि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर विकास कार्य श्रम आधारित होते हैं। ऐसे में पंचायतों को 60:40 अनुपात के अनुरूप कार्य स्वीकृत करवाने में दिक्कतें आने की आशंका है।
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सबसे अधिक असर उन जिलों पर पड़ सकता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में कूहलों की गाद निकासी के कार्य वी-बीजी राम और पहले मनरेगा के तहत करवाए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था में इन कार्यों के बाहर होने से सिंचाई व्यवस्था और कृषि गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों की मानें तो पहले सिक्योर सॉफ्टवेयर में लेबर रेट के आधार पर एस्टीमेट तैयार होते थे, जिससे 60:40 अनुपात बनाना अपेक्षाकृत आसान था। अब थ्रू-रेट के आधार पर एस्टीमेट बनने से अधिकांश कार्यों में मजदूरी और सामग्री का अनुपात निर्धारित सीमा में लाना कठिन हो रहा है। यदि एस्टीमेट ही निर्धारित अनुपात में नहीं बनेंगे तो पंचायत और ब्लॉक स्तर पर 60:40 का पालन करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
उधर, श्रमिकों की चिंता दिहाड़ी को लेकर भी बढ़ गई है। वी-बीजी राम में 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी निर्धारित की गई है, जबकि मनरेगा के तहत 320 रुपये दिहाड़ी मिल रही थी। ऐसे में श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर कम होने के साथ उनकी आय भी घटेगी।