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Kangra News: धर्मशाला अस्पताल से हर पांचवीं गर्भवती की जा रही टांडा रेफर
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धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन आंकड़े इन दावों की पोल खोल रहे हैं। अस्पताल में आधारभूत सुविधाएं और दो स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद हर पांचवीं गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर किया जा रहा है। इस साल अब तक 64 गर्भवती महिलाओं को टांडा भेजा जा चुका है। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान माने जाने वाले क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव और सिजेरियन (ऑपरेशन) की पूरी सुविधा मौजूद है। इसके बावजूद प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को ऐन मौके पर टांडा भेजना तीमारदारों के लिए परेशानी और खतरे का सबब बनता जा रहा है। हाल ही में टीबी डेथ ऑडिट की बैठक में भी उपायुक्त ने टिप्पणी की थी कि अस्पताल केवल एक ''रेफरल अस्पताल'' बनकर रह गया है।
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शाम चार बजे के बाद स्टाफ नर्सों के भरोसे व्यवस्था
ड्यूटी समय के दौरान तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं लेकिन शाम चार बजे के बाद स्थिति बदल जाती है। शाम से अगली सुबह तक प्रसव का पूरा जिम्मा केवल स्टाफ नर्सों के कंधों पर आ जाता है। रात के समय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सीधी मौजूदगी न होने से जटिल मामलों में खतरा बढ़ जाता है और मरीजों को तुरंत टांडा रेफर कर दिया जाता है।
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धर्मशाला अस्पताल के लेबर वार्ड में हर आवश्यक सुविधा मौजूद है। हमारी प्राथमिकता रहती है कि अधिक से अधिक प्रसव यहीं सुरक्षित रूप से करवाए जाएं। कई बार गंभीर चिकित्सीय जटिलताएं आ जाती हैं जिस कारण मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें टांडा रेफर करना पड़ता है। -डॉ. अनुराधा शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
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धर्मशाला अस्पताल में प्रसव और रेफरल के आंकड़े (जनवरी से अगस्त)
माह कुल प्रसव सिजेरियन रेफर
जनवरी 38 14 6
फरवरी 45 13 8
मार्च 43 13 9
अप्रैल 33 18 9
मई 34 13 6
जून 39 - 8
जुलाई 34 10 15
अगस्त 21 9 3
कुल 287 90 64
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कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान माने जाने वाले क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव और सिजेरियन (ऑपरेशन) की पूरी सुविधा मौजूद है। इसके बावजूद प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को ऐन मौके पर टांडा भेजना तीमारदारों के लिए परेशानी और खतरे का सबब बनता जा रहा है। हाल ही में टीबी डेथ ऑडिट की बैठक में भी उपायुक्त ने टिप्पणी की थी कि अस्पताल केवल एक ''रेफरल अस्पताल'' बनकर रह गया है।
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शाम चार बजे के बाद स्टाफ नर्सों के भरोसे व्यवस्था
ड्यूटी समय के दौरान तो विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में जरूरत पड़ने पर सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं लेकिन शाम चार बजे के बाद स्थिति बदल जाती है। शाम से अगली सुबह तक प्रसव का पूरा जिम्मा केवल स्टाफ नर्सों के कंधों पर आ जाता है। रात के समय किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सीधी मौजूदगी न होने से जटिल मामलों में खतरा बढ़ जाता है और मरीजों को तुरंत टांडा रेफर कर दिया जाता है।
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धर्मशाला अस्पताल के लेबर वार्ड में हर आवश्यक सुविधा मौजूद है। हमारी प्राथमिकता रहती है कि अधिक से अधिक प्रसव यहीं सुरक्षित रूप से करवाए जाएं। कई बार गंभीर चिकित्सीय जटिलताएं आ जाती हैं जिस कारण मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें टांडा रेफर करना पड़ता है। -डॉ. अनुराधा शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
धर्मशाला अस्पताल में प्रसव और रेफरल के आंकड़े (जनवरी से अगस्त)
माह कुल प्रसव सिजेरियन रेफर
जनवरी 38 14 6
फरवरी 45 13 8
मार्च 43 13 9
अप्रैल 33 18 9
मई 34 13 6
जून 39 - 8
जुलाई 34 10 15
अगस्त 21 9 3
कुल 287 90 64