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Kangra News: एलआईसी को बचाने के लिए बीमा कर्मी एकजुट
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के अस्तित्व की रक्षा और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर शनिवार को देहरा में नॉर्दर्न जोन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन शिमला मंडल की विस्तारित सचिवालय बैठक देहरा में हुई। इसमें शिमला मंडल के अंतर्गत आने वाली सभी शाखाओं के अध्यक्षों और सचिवों ने भाग लिया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट करते हुए नारेबाजी की और भविष्य में एक निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी।
मंडल अध्यक्ष नरेंद्र धीमान की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का संचालन मंडल सचिव प्रदीप मिन्हास ने किया। बैठक में मुख्य रूप से पांच ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने लिपिक वर्ग में नई भर्ती की तुरंत मांग उठाते हुए कहा कि स्टाफ की कमी के कारण दफ्तरों में कार्यभार असहनीय स्तर पर पहुंच गया है। जिससे भविष्य में ग्राहक सेवा प्रभावित होने का अंदेशा है।
कर्मचारी नेताओं ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और एफपीओ का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि एलआईसी देश की आम जनता की बचत और भरोसे से खड़ा हुआ संस्थान है जिसे विदेशी हाथों में सौंपना न केवल जनविरोधी है बल्कि देशहित के भी खिलाफ है। इसके अलावा नए श्रम कोड को मजदूरों के अधिकारों पर हमला करार देते हुए इसे सिरे से खारिज करने का संकल्प लिया गया।
बैठक में 1995 की पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए पुरानी पेंशन उनका सांविधानिक हक है। वहीं, मंडल सचिव प्रदीप मिन्हास ने अपने संबोधन में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि एलआईसी कर्मचारियों की मेहनत और जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों को अनसुना किया तो शिमला मंडल का हर कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों ने जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
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मंडल अध्यक्ष नरेंद्र धीमान की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का संचालन मंडल सचिव प्रदीप मिन्हास ने किया। बैठक में मुख्य रूप से पांच ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने लिपिक वर्ग में नई भर्ती की तुरंत मांग उठाते हुए कहा कि स्टाफ की कमी के कारण दफ्तरों में कार्यभार असहनीय स्तर पर पहुंच गया है। जिससे भविष्य में ग्राहक सेवा प्रभावित होने का अंदेशा है।
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कर्मचारी नेताओं ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और एफपीओ का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि एलआईसी देश की आम जनता की बचत और भरोसे से खड़ा हुआ संस्थान है जिसे विदेशी हाथों में सौंपना न केवल जनविरोधी है बल्कि देशहित के भी खिलाफ है। इसके अलावा नए श्रम कोड को मजदूरों के अधिकारों पर हमला करार देते हुए इसे सिरे से खारिज करने का संकल्प लिया गया।
बैठक में 1995 की पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए पुरानी पेंशन उनका सांविधानिक हक है। वहीं, मंडल सचिव प्रदीप मिन्हास ने अपने संबोधन में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि एलआईसी कर्मचारियों की मेहनत और जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों को अनसुना किया तो शिमला मंडल का हर कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों ने जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया।