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Kangra News: जसूर की मालविका पठानिया इंटैक की राष्ट्रीय गवर्निंग काउंसिल में निर्वाचित
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 21 Mar 2026 05:33 AM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के सांस्कृतिक संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश की वरिष्ठ समाजसेविका और भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट (इंटैक) की राज्य संयोजक मालविका पठानिया को संस्था की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गवर्निंग काउंसिल के लिए चुना गया है। यह पहला अवसर है जब हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर की इस परिषद में प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है।
नई दिल्ली स्थित इंटैक मुख्यालय में आयोजित 41वें अखिल भारतीय चुनावों के दौरान मालविका पठानिया ने जीत दर्ज की। उन्होंने इस चुनाव में तेलंगाना के राज्य संयोजक वेद कुमार को पराजित किया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संस्था के चेयरमैन अशोक ठाकुर ने सम्मानित किया और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में हिमालयी क्षेत्र की विरासत को नई पहचान मिलेगी।
जसूर निवासी मालविका पठानिया का सफर 1984 से ही इस संस्था के साथ शुरू हो गया था। उन्होंने 1984 से 2004 तक कांगड़ा शाखा की बागडोर संभाली और 2012 तक राज्य सह-संयोजक के रूप में कार्य किया। ऐतिहासिक भूतनाथ मंदिर, भद्रकाली मंदिर और देई का मंदिर जैसे प्राचीन स्थलों के जीर्णोद्धार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
यह है इंटैक का महत्व
वर्ष 1984 में स्थापित यह संगठन भारत की प्राकृतिक, वास्तुशिल्प, भौतिक और अमूर्त विरासत के संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है। देशभर में इसकी 200 से अधिक सक्रिय शाखाएं हैं। हिमाचल जैसे राज्य के लिए जहां वास्तुकला और प्राचीन मंदिर पर्यटन का मुख्य आधार हैं, राष्ट्रीय परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना प्रदेश की धरोहरों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
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नई दिल्ली स्थित इंटैक मुख्यालय में आयोजित 41वें अखिल भारतीय चुनावों के दौरान मालविका पठानिया ने जीत दर्ज की। उन्होंने इस चुनाव में तेलंगाना के राज्य संयोजक वेद कुमार को पराजित किया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संस्था के चेयरमैन अशोक ठाकुर ने सम्मानित किया और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में हिमालयी क्षेत्र की विरासत को नई पहचान मिलेगी।
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जसूर निवासी मालविका पठानिया का सफर 1984 से ही इस संस्था के साथ शुरू हो गया था। उन्होंने 1984 से 2004 तक कांगड़ा शाखा की बागडोर संभाली और 2012 तक राज्य सह-संयोजक के रूप में कार्य किया। ऐतिहासिक भूतनाथ मंदिर, भद्रकाली मंदिर और देई का मंदिर जैसे प्राचीन स्थलों के जीर्णोद्धार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
यह है इंटैक का महत्व
वर्ष 1984 में स्थापित यह संगठन भारत की प्राकृतिक, वास्तुशिल्प, भौतिक और अमूर्त विरासत के संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है। देशभर में इसकी 200 से अधिक सक्रिय शाखाएं हैं। हिमाचल जैसे राज्य के लिए जहां वास्तुकला और प्राचीन मंदिर पर्यटन का मुख्य आधार हैं, राष्ट्रीय परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना प्रदेश की धरोहरों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।